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केतकी खदानः ठेका श्रमिकों की 9 सूत्रीय मांगों पर एटक ने दिया तीन दिन का अल्टीमेटम

बिश्रामपुर। केतकी खदान के गेट पर एटक ने ठेका श्रमिकों की 9 सूत्रीय मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन कर प्रबंधन को तीन दिन का अल्टीमेटम देकर मांगें पूरी न होने पर आरजीके कार्यालय के घेराव की चेतावनी है।

मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार को संयुक्त कोयला मजदूर संघ (एटक) के बैनर तले एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र की केतकी भूमिगत खदान के समक्ष ठेका श्रमिकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर हुंकार भरी। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सुबह सात से नव बजे तक चले इस सांकेतिक धरने में बड़ी संख्या में श्रमिकों ने हिस्सा लेकर प्रबंधन की वादाखिलाफी के खिलाफ उग्र नारेबाजी की।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एटक के क्षेत्रीय सचिव कामरेड पंकज कुमार गर्ग ने प्रबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लिखित आश्वासनों के बाद भी श्रमिकों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खदान में ठेका श्रमिकों के लिए कोई स्टैंडिंग ऑर्डर नहीं है, जिससे कंपनियां मनमानी कर रही हैं। महीने में श्रमिकों को मात्र 10-15 दिन ही काम दिया जा रहा है, जो उनके आर्थिक शोषण का प्रमाण है।इसके अलावा सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की जा रही है।

कामरेड पंकज कुमार ने बताया कि सीएमपीएफ के नाम पर लाखों की कटौती की गई, जिसका भुगतान डेढ़ साल बाद भी नहीं हुआ। नियोजन और टर्मिनेशन का कोई ठोस नियम न होने से पेटी कॉन्ट्रैक्टर और दलाल भ्रष्टाचार और अवैध उगाही कर रहे हैं।

कामरेड गर्ग ने आगे बताया कि वर्ष 2024-25 का पीएलआई/बोनस का पूर्ण भुगतान नहीं हुआ है और न ही श्रमिकों को वेतन या बोनस पर्ची दी जा रही है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अब श्रमिकों का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धरना प्रदर्शन को क्षेत्रीय उपाध्यक्ष कामरेड आर.के. द्विवेदी और क्षेत्रीय कल्याण समिति सदस्य सजल मित्रा ने भी संबोधित किया। उन्होंने श्रमिकों को उनके वैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और हक की लड़ाई के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

संघ ने ज्ञापन सौंपकर प्रबंधन को तीन कार्य दिवसों का अल्टीमेटम दिया है। एटक ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो यूनियन आरजीके सहक्षेत्र कार्यालय का घेराव करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
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