गौधाम पर सख्त छंटनी: 39 में सिर्फ 5 पास, धीरेंद्र दुबे की बैठक में बाकी प्रस्तावों पर कड़ी कार्रवाई
जिला अध्यक्ष धीरेंद्र दुबे की मौजूदगी में 19 प्रस्तावों की समीक्षा, अपूर्ण आवेदनों पर सीधी कार्रवाई

बिलासपुर…जिले में गौसंरक्षण व्यवस्था को लेकर अब निर्णय की दिशा और सख्त होती नजर आ रही है। जिला स्तरीय गौधाम समिति की बैठक में प्रस्तावों की समीक्षा के दौरान साफ कर दिया गया कि अब अधूरे दस्तावेज और कमजोर तैयारी के साथ गौधाम की स्वीकृति संभव नहीं होगी। बैठक जिला अध्यक्ष धीरेंद्र दुबे की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जहां विस्तार और संचालन दोनों पर गंभीरता से निर्णय लिए गए।

मंथन सभा कक्ष में हुई इस बैठक में अब तक प्राप्त 39 प्रस्तावों की स्थिति सामने रखी गई। इनमें से सिर्फ 5 गौधामों को राज्य स्तर से स्वीकृति मिल सकी है। इनमें 4 गौधाम वर्तमान में संचालित हैं, जबकि कनई खोंधरा का गौधाम अभी शुरू होना बाकी है। यह अंतर बताता है कि स्वीकृति के बाद भी संचालन तक पहुंचने में कई स्तर की चुनौतियां मौजूद हैं।
बैठक में 12 नए प्रस्तावों को गौ सेवा आयोग के पास भेजे जाने की जानकारी दी गई। इनमें जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से प्रस्ताव शामिल हैं, जिन पर अंतिम निर्णय अब राज्य स्तर पर होगा। लेकिन सबसे अहम चर्चा 19 प्रस्तावों की समीक्षा को लेकर रही, जहां जांच में 12 प्रस्ताव अपूर्ण पाए गए। इन प्रस्तावों को आगे की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
केवल कोटा विकासखंड के तीन प्रस्ताव—लालपुर, कुरुवार और खैरा—पूर्ण पाए गए, जिन्हें स्वीकृति के लिए अनुशंसित किया गया। वहीं, जाली गांव में महिला स्व सहायता समूह द्वारा संचालन में असहमति जताने और कुछ अन्य समितियों के दस्तावेज अधूरे पाए जाने के कारण संबंधित प्रस्ताव निरस्त कर दिए गए। लालपुर क्षेत्र में भी दो आवेदनों में से केवल गिरजा बंद गौ सेवा समिति का प्रस्ताव ही आगे बढ़ पाया, जबकि दूसरा आवेदन तकनीकी कारणों से खारिज कर दिया गया।
बैठक में पहले से स्वीकृत गौधामों की स्थिति की भी समीक्षा हुई। सुरभि गौधाम कनई खोंधरा और हरदी कला टोना में शेड निर्माण पूरा होने और संचालन की सहमति मिलने के बाद उन्हें शुरू करने की मंजूरी दी गई। लाखासर, ओकर और जैतपुर गौधामों में संरक्षित गौवंश की स्थिति भी रखी गई, जहां अब वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण बढ़ाने के लिए सेक्स सॉर्टेड सीमन के जरिए कृत्रिम गर्भाधान शुरू करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में यह स्पष्ट संकेत उभरा कि अब गौधाम योजना केवल प्रस्तावों की संख्या तक सीमित नहीं रहेगी। जिला अध्यक्ष धीरेंद्र दुबे की मौजूदगी में लिए गए फैसलों ने यह तय कर दिया है कि आगे वही प्रस्ताव आगे बढ़ेंगे जो जमीन पर पूरी तैयारी और जिम्मेदारी के साथ उतरने की स्थिति में होंगे।




