कन्फर्म टिकट, बीच रास्ते ट्रेन ‘गायब’: अंबाला में उतारे गए यात्री, बिलासपुर रेल प्रबंधन के दावों की खुली पोल”
अंबाला में ट्रेन रद्द, परेशान परिवार ने निजी वाहन से तय किया सफर; 15 हजार अतिरिक्त खर्च

बिलासपुर .. रेल प्रबंधन के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फासला एक बार फिर उजागर हुआ है। उसलापुर से जम्मू तवी तक दुर्ग–जम्मू तवी एक्सप्रेस में कन्फर्म टिकट लेकर निकले 9 यात्रियों को अंबाला में अचानक ट्रेन रद्द होने के बाद भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। यात्रियों में बिलासपुर शहर के प्रमुख व्यवसायी और मित्तल परिवार के मुखिया जयप्रकाश मित्तल भी शामिल थे, जिन्होंने पूरी घटना को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अंबाला में ट्रेन रद्द होने के बाद पूरे परिवार को आगे का सफर निजी वाहन से तय करना पड़ा, जिस पर करीब 15 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े।
जयप्रकाश मित्तल ने बताया कि 31 जनवरी को 1 अप्रैल की यात्रा के लिए उसलापुर से जम्मू तवी तक का कन्फर्म रिजर्वेशन कराया गया था। यात्रा के दौरान ट्रेन अंबाला तक तो पहुंची, लेकिन वहां अचानक इसे रद्द कर दिया गया। यात्रियों को न तो पहले से स्पष्ट सूचना दी गई और न ही आगे की यात्रा के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की गई। नतीजतन पूरा परिवार—जिसमें महिलाएं और अन्य सदस्य भी शामिल थे—बीच रास्ते फंस गया और मजबूरी में निजी वाहन कर जम्मू तक पहुंचना पड़ा।
उन्होंने यह भी कहा कि जब रेल प्रबंधन को पहले से जानकारी थी कि ट्रेन अंबाला से आगे नहीं जाएगी, तो जम्मू तवी तक का कन्फर्म रिजर्वेशन जारी करना समझ से परे है। उनके अनुसार यह सीधी प्रशासनिक लापरवाही है, जिसने यात्रियों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से नुकसान पहुंचाया।
जयप्रकाश मित्तल के अनुसार, इस पूरी यात्रा के दौरान सबसे बड़ी समस्या यह रही कि बीच रास्ते में यात्रियों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया। न तो रेलवे की ओर से कोई वैकल्पिक ट्रेन की व्यवस्था की गई और न ही अन्य मदद उपलब्ध कराई गई, जिससे परिवार को कठिन परिस्थितियों में यात्रा पूरी करनी पड़ी।
इस पूरे घटनाक्रम ने उस समय और सवाल खड़े कर दिए, जब हाल ही में बिलासपुर रेल मंडल के प्रबंधन ने ट्रेनों की लेटलतीफी और संचालन को लेकर सफाई पेश की थी। उनका कहना है कि जहां अन्य रूट्स की गाड़ियों को जम्मू तवी तक संचालन की अनुमति दी जा रही थी, वहीं बिलासपुर से जुड़ी इस महत्वपूर्ण ट्रेन को अंबाला में रोककर अंततः रद्द कर दिया गया।
घटना के बाद से यात्रियों में नाराजगी है और रेल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मित्तल ने स्पष्ट कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में यात्रियों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े। अब नजर इस बात पर है कि रेलवे प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर क्या कदम उठाता है।




