लालखदान हादसा, 11 जिम्मेदार और SOP फेल… उपलब्धियों की प्रेस वार्ता में घिरे DRM राकेश रंजन
लालखदान के बाद खुला पूरा सिस्टम—11 जिम्मेदार, SOP फेल, ट्रेनें बेपटरी; स्टेशन डिजाइन में खामी और रिकॉर्ड कमाई के बीच यात्रियों का भरोसा डगमगाया

बिलासपुर: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल में वित्तीय वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब नवंबर में लालखदान में हुए रेल हादसे, CRS जांच और सिस्टम की खामियों का मुद्दा सामने आया। प्रेस वार्ता की शुरुआत भले ही उपलब्धियों से हुई, लेकिन जल्द ही चर्चा का केंद्र हादसा, जवाबदेही और यात्रियों की परेशानी बन गया।

डीआरएम राकेश रंजन ने स्वीकार किया कि बिलासपुर मंडल में ट्रेनों की लेटलतीफी चिंता का विषय रही है, लेकिन उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार पंक्चुअलिटी बेहतर होगी और सुरक्षा कवच लगाने का काम भी तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि चौथी लाइन का तेजी से विस्तार हो रहा है और बिलासपुर-कटनी सेक्शन को दिसंबर तक दुरुस्त करने का लक्ष्य है, भले इसमें समय लगे, लेकिन काम तेजी से किया जा रहा है।
इसी बीच पत्रकारों ने लालखदान हादसे को लेकर सीधे सवाल उठाए। नवंबर में हुए इस हादसे में यात्रियों की जान गई थी और CRS की जांच में सामने आया कि स्पेशल ऑपरेटिंग प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई। रिपोर्ट में 11 लोगों की जिम्मेदारी तय की गई, लेकिन अब तक उन पर क्या कार्रवाई हुई, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। सवाल उठा कि जिम्मेदारों में से कुछ को प्रमोशन और ट्रांसफर तक मिल गया, तो बाकी पर क्या कार्रवाई हुई।
इस पर डीआरएम राकेश रंजन ने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं, लेकिन अंतिम कार्रवाई फाइनल रिपोर्ट के बाद ही होगी, क्योंकि यह निर्णय रेलवे बोर्ड के स्तर पर लिया जाता है। उन्होंने बताया कि जांच प्रक्रिया कई चरणों में होती है और फाइनल रिपोर्ट आने में सामान्यतः 180 दिन का समय लगता है, हालांकि इसमें देरी भी हो सकती है। उनका कहना था कि CRS की जो तत्काल सिफारिशें थीं, उन्हें लागू किया गया है और फाइनल रिपोर्ट आते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पत्रकारों ने यहां तक सवाल उठाया कि जब बार-बार SOP के पालन को लेकर निर्देश दिए जाते हैं, तो बिलासपुर मंडल में इसका पालन क्यों नहीं होता और आखिर यात्रियों की सुरक्षा के साथ इस तरह का जोखिम क्यों लिया गया। इस पर डीआरएम ने कहा कि हर रेल दुर्घटना की गहराई से जांच होती है और देशभर में इस पर चर्चा कर कारणों का समाधान किया जाता है, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
प्रेस वार्ता के दौरान बिलासपुर रेलवे स्टेशन के नवनिर्माण में डिजाइन और ड्राइंग की गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठा। रेलवे बोर्ड ने इस पर नाराजगी जताई थी और एक इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई भी की गई। हालांकि इस कार्रवाई की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं होने पर सवाल खड़े हुए। इस पर डीआरएम ने कहा कि खामियों को इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार सुधारा जा रहा है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हुई है और आगे भी होगी, लेकिन विस्तृत जानकारी उनके पास तत्काल उपलब्ध नहीं है।
उपलब्धियों की बात करें तो डीआरएम ने बताया कि बिलासपुर मंडल ने 193.97 मिलियन टन माल ढुलाई कर देश में शीर्ष स्थान हासिल किया है, जो पिछले वर्ष से 4.27 मिलियन टन अधिक है। मार्च 2026 में 18.31 मिलियन टन लोडिंग के साथ मासिक रिकॉर्ड भी बनाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की पंक्चुअलिटी में 11.5 प्रतिशत सुधार हुआ है और तीसरी-चौथी लाइन के विस्तार से ट्रैफिक दबाव कम करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि इसी पर सवाल उठा कि क्या बिलासपुर मंडल को केवल माल ढुलाई का केंद्र बना दिया गया है और यात्री गाड़ियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। इस पर डीआरएम ने कहा कि ऐसा नहीं है, यात्रियों की सुविधाओं में लगातार सुधार किया जा रहा है, टिकट काउंटर बढ़ाए गए हैं और मोबाइल टिकटिंग को बेहतर बनाया गया है, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पंक्चुअलिटी अभी भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है।
ट्रेनों की लेटलतीफी पर उन्होंने कहा कि इसके कई कारण हैं, जिनमें निर्माण कार्य, लाइन विस्तार और लंबी दूरी की ट्रेनों का पहले से लेट आना शामिल है। उनका कहना था कि एक ट्रेन के लेट होने से पूरी श्रृंखला प्रभावित होती है और यह एक जटिल सिस्टम है, जिसमें सुधार के प्रयास लगातार जारी हैं।
सुरक्षा कवच के मुद्दे पर उन्होंने बताया कि देशभर में इसे लागू किया जा रहा है और बिलासपुर मंडल में अब तक 16 लोको में यह लगाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि पहले लोको में कवच लगाया जा रहा है, फिर स्टेशनों पर, और यह प्रक्रिया समय लेने वाली है, लेकिन इस साल इसमें तेजी लाई जाएगी।
पूरी प्रेस वार्ता के दौरान उपलब्धियों के साथ-साथ जो तस्वीर उभरकर सामने आई, उसमें एक तरफ रिकॉर्ड माल ढुलाई और विकास कार्यों के दावे थे, तो दूसरी तरफ लालखदान हादसे जैसी गंभीर घटना, CRS रिपोर्ट में सामने आई खामियां, इंजीनियर पर कार्रवाई और यात्रियों की लगातार लेटलतीफी जैसे सवाल भी बराबरी से खड़े नजर आए। जवाब दिए गए, लेकिन कई जगह स्पष्टता का अभाव भी दिखा। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या बिलासपुर मंडल वास्तव में संतुलित विकास की ओर बढ़ रहा है, या फिर माल ढुलाई के दबाव में यात्री सुविधाएं और सुरक्षा पीछे छूटती जा रही हैं।




