उत्सव या अत्याचार? कार्यक्रम के नाम पर 25 हजार लोगों को अंधेरे में धकेलने की तैयारी
बिजली गई तो बिगड़ेगा सिस्टम! स्वास्थ्य से लेकर घर तक संकट की चेतावनी

रामानुजगंज ( पृथ्वीलाल केशरी)…शहर में 27 तारीख को प्रस्तावित बड़े आयोजन से पहले एक बार फिर वही पुराना डर सिर उठाने लगा है—क्या इस बार भी ‘शक्ति प्रदर्शन’ के नाम पर पूरे शहर की बिजली बंद होगी? पिछले अनुभवों ने लोगों की चिंता को आशंका से आगे बढ़ाकर चेतावनी में बदल दिया है। यदि हालात दोहराए गए, तो यह सिर्फ असुविधा का मामला नहीं रहेगा, बल्कि कानून व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बन सकता है।

शहर के भीतर यह चर्चा खुलकर हो रही है कि आयोजनों के दौरान प्रभावशाली समूह अपने दबदबे के प्रदर्शन के लिए मूलभूत सेवाओं तक को प्रभावित करने से पीछे नहीं हटते। आरोप सीधे तौर पर विद्युत विभाग और आयोजन से जुड़े प्रभावशाली लोगों की संभावित मिलीभगत की ओर इशारा कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस बार भी तमाशबीन रहेगा या समय रहते स्थिति को नियंत्रित करेगा।
पिछले साल का उदाहरण लोगों के ज़हन में ताज़ा है, जब एक बड़े आयोजन के दौरान करीब 12 घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रही। हालात तब बिगड़ने लगे थे और देर रात लगभग 11 बजे प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद आपूर्ति बहाल हो सकी थी। उस दिन शहर ने देखा था कि बिजली जैसी बुनियादी सेवा ठप होते ही जनजीवन किस तरह पटरी से उतर जाता है।
इस बार भी वैसी ही आशंका गहराने लगी है। शहर की लगभग 25 हजार आबादी सीधे प्रभावित हो सकती है। सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने की आशंका है। अस्पतालों और क्लीनिकों में बिजली बाधित होने का मतलब है—इलाज में रुकावट, आपात स्थिति में खतरा और कई मरीजों का बिना उपचार लौटना। यह स्थिति केवल असुविधा नहीं, बल्कि संवेदनशील सेवाओं पर सीधा प्रहार मानी जाएगी।
घरेलू स्तर पर भी हालात कम गंभीर नहीं होंगे। बिजली पर निर्भर रसोई व्यवस्था ठप पड़ सकती है, पानी की आपूर्ति बाधित हो सकती है और दिनचर्या पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो सकती है। ऐसे हालात में घर-परिवारों के भीतर तनाव बढ़ना तय है, जिसका असर सबसे अधिक महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है।
इस पूरे परिदृश्य के बीच विद्युत विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सरगुजा संभाग में पदस्थ मुख्य अभियंता यशवंत शिलेदार ने पदभार ग्रहण करते समय बेहतर सेवा देने का दावा किया था, लेकिन जमीनी स्थिति उन दावों के विपरीत दिखाई दे रही है। मामले पर उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। यह चुप्पी कई नए सवाल खड़े करती है—क्या विभाग स्थिति को लेकर गंभीर है या फिर दबाव में काम कर रहा है?
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। नगर पालिका परिषद के नेता प्रतिपक्ष प्रतीक सिंह ने स्पष्ट कहा कि किसी भी आयोजन को उत्सव के रूप में मनाया जाए, लेकिन उसे शक्ति प्रदर्शन का माध्यम न बनाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि बिजली बाधित होने से सबसे पहले जल प्रदाय व्यवस्था प्रभावित होती है और उसके बाद पूरे शहर का जनजीवन ठप हो जाता है।
इसी बीच छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर ने हाल ही में साफ निर्देश दिए हैं कि उपभोक्ता सेवा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात भी दोहराई गई है। ऐसे में अब नजर इस बात पर टिक गई है कि जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का पालन होता है या नहीं।
रामानुजगंज इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। एक तरफ आयोजन के नाम पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी है, दूसरी तरफ आम जनता का अधिकार और बुनियादी सुविधाओं का सवाल। अब यह प्रशासन को तय करना है कि वह किसके साथ खड़ा होता है—प्रभावशाली दबाव के साथ या जनता के हक के साथ।





