सरकारी परिसर में शराब-डांस, मंत्री बोले– ‘क्या फर्क पड़ता है?’ छत्तीसगढ़ में शर्मनाक सियासत
सरकारी रेस्ट हाउस में अश्लील डांस, शराब और नोटों की बारिश… मंत्री बोले— ‘कला तो कहीं भी जागृत हो सकती है!’ सुशासन की असली तस्वीर

सूरजपुर( पृथ्वी लाल केशरी)..छत्तीसगढ़ में इन दिनों सामने आ रही घटनाएं किसी एक वीडियो या बयान तक सीमित नहीं रहीं। यह मामला अब सीधे तौर पर सरकारी मर्यादा, प्रशासनिक अनुशासन और सत्ता की संवेदनशीलता पर सवाल बन चुका है। सरकारी विश्राम गृहों में अश्लील डांस, शराब की महफिल और उस पर जिम्मेदार मंत्री की हल्की-फुल्की टिप्पणी ने राज्य सरकार के सुशासन के दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
सूरजपुर जिले के रामानुजनगर ब्लॉक स्थित कुमेली फॉरेस्ट रेस्ट हाउस से सामने आया वीडियो चौंकाने वाला है। जिस सरकारी परिसर का उपयोग जनसेवा और प्रशासनिक जरूरतों के लिए किया जाना चाहिए था, वहां रातभर बार-बालाओं के अश्लील ठुमके लगे, शराब के जाम छलके और नोटों की खुलेआम बारिश होती रही। बताया जा रहा है कि इस पूरी महफिल का आयोजन एक जनपद सदस्य द्वारा किया गया था। जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि और सरकारी कर्मचारी भी शामिल थे। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि डांस हुआ, बल्कि यह है कि सरकारी संपत्ति में यह सब किसके संरक्षण में और किसकी अनुमति से हुआ।
जब यह वीडियो सामने आया और कृषि मंत्री रामविचार नेताम से इस संबंध में सवाल किया गया, तो उनके बयान ने विवाद को और गहरा कर दिया। मंत्री ने मामले की गंभीरता समझने के बजाय टिप्पणी करते हुए कहा कि “कला तो विविध क्षेत्र की कला ही है। अगर रेस्ट हाउस में भी कला जागृत हो जा रही है, तो क्या कहेंगे?” जिस प्रकरण में कार्रवाई और जवाबदेही की अपेक्षा थी, वहां अश्लीलता को ‘कला’ कह देना न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना माना जा रहा है, बल्कि सरकारी पद की गरिमा के भी खिलाफ समझा जा रहा है।
यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह की घटनाएं सामने आई हों। इससे पहले गरियाबंद जिले से आए वीडियो में भी सरकारी कार्यक्रम के दौरान ऑर्केस्ट्रा के नाम पर हो रही अश्लीलता के बीच एसडीएम तुलसी दास मरकाम और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी, यहां तक कि डांसरों पर नोट उड़ाने के दृश्य सामने आ चुके हैं। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने यह साफ कर दिया है कि सवाल अब किसी एक आयोजन या व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की ढील और संरक्षण का है।
एक तरफ सरकार मंचों से सुशासन, नैतिकता और अनुशासन की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी परिसरों में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं और जिम्मेदार मंत्री उसे मजाक में बदलते दिख रहे हैं। सोशल मीडिया और आम जनता के बीच अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या सरकारी रेस्ट हाउस अब मनोरंजन और अश्लीलता के केंद्र बनते जा रहे हैं और क्या नियम सिर्फ आम नागरिकों के लिए ही बनाए गए हैं।
सरकारी संपत्तियों का इस तरह दुरुपयोग और उस पर सत्ता के शीर्ष स्तर से आई प्रतिक्रिया ने सरकार की नैतिक विश्वसनीयता को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या सरकार इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करेगी या फिर अश्लीलता को ‘कला’ कहकर ही इस प्रकरण पर पर्दा डाल दिया जाएगा।




