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How to identify natural holi colors, होली पर हर्बल के नाम पर कहीं आप जहर तो नहीं खरीद रहे? असली और नकली रंगों में फर्क करने के लिए अपनाएं ये 5 आसान तरीके

होली का त्योहार खुशियों, रंगों और भाईचारे का प्रतीक है, लेकिन बाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त रंग अक्सर इस जश्न में खलल डाल देते हैं। त्वचा की एलर्जी और आंखों की समस्याओं से बचने के लिए आजकल लोग 'हर्बल रंगों' की तलाश में रहते हैं। हालांकि, हर्बल के नाम पर बिकने वाले हर रंग सुरक्षित नहीं होते।

How to identify natural holi colors।रंगों का त्योहार होली करीब है और बाजार गुलाल के पैकेटों से पट गया है। स्किन और बालों को नुकसान से बचाने के लिए अधिकांश लोग अब ‘हर्बल और नेचुरल’ रंगों की मांग कर रहे हैं।

How to identify natural holi colors।लेकिन क्या आप जानते हैं कि मार्केट में मिलने वाले कई हर्बल ब्रांड्स केवल भ्रामक विज्ञापनों का सहारा ले रहे हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि होली पर मांग बढ़ने के कारण केमिकल युक्त रंगों को ही खुशबू डालकर हर्बल बताकर बेचा जा रहा है।

​आपकी सुरक्षा के लिए यहाँ कुछ ऐसे आसान तरीके दिए गए हैं जिनसे आप असली और नकली हर्बल रंगों की पहचान कर सकते हैं:

1. सामग्री (Ingredients) की बारीकी से जांच करें

​असली हर्बल गुलाल फूलों, हल्दी, चंदन, पालक और चुकंदर जैसी प्राकृतिक चीजों से तैयार होता है। पैकेट खरीदते समय उसके पीछे दी गई लिस्ट जरूर पढ़ें। यदि सामग्री में लीड ऑक्साइड, क्रोमियम या कॉपर सल्फेट जैसे भारी रसायनों का उल्लेख है, तो समझ जाएं कि वह रंग पूरी तरह केमिकल युक्त है।

2. खुशबू से मिलेगी सटीक पहचान

​प्राकृतिक रंगों में मिट्टी, चंदन या फूलों की बहुत ही हल्की और सौम्य महक आती है। इसके विपरीत, अगर पैकेट खोलते ही आपको तेज, चुभने वाली या सिंथेटिक गंध महसूस हो, तो वह रंग नकली हो सकता है। केमिकल वाले रंगों में अक्सर दुर्गंध को छिपाने के लिए तेज परफ्यूम का इस्तेमाल किया जाता है।

3. बनावट (Texture) को महसूस करें

​नेचुरल कलर्स बनाने के लिए फूलों और पत्तियों को सुखाकर पीसा जाता है, जिससे वे बेहद मुलायम और हल्के होते हैं।

  • सावधानी: यदि रंग बहुत ज्यादा चमकीला है, उसमें कांच जैसे कण दिख रहे हैं या वह हाथों पर रगड़ने पर दानेदार महसूस हो रहा है, तो उसमें केमिकल या मिलावट पक्की है।

4. ‘पैच टेस्ट’ है सबसे सुरक्षित तरीका

​किसी भी रंग को सीधे चेहरे पर लगाने से बचें। खरीदने के बाद हाथ के एक छोटे हिस्से पर थोड़ा सा रंग लगाकर 10-15 मिनट के लिए छोड़ दें। अगर इस दौरान त्वचा पर किसी भी तरह की जलन, खुजली या लालिमा (Irritation) महसूस होती है, तो उस रंग का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।

5. प्रमाणपत्र और ब्रांड पर दें ध्यान

​सस्ते के चक्कर में खुले या बिना ब्रांड वाले रंगों को न खरीदें। हमेशा विश्वसनीय आयुर्वेदिक ब्रांड चुनें और पैकेट पर ISO या ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन का लेबल जरूर देखें। यह सुनिश्चित करता है कि उत्पाद मानक प्रक्रियाओं के तहत बनाया गया है।How to identify natural holi colors

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