बिलासपुर में प्रशासनिक भूचाल: कलेक्टर से निगम आयुक्त तक बड़े बदलाव, नारायण गवेल को नई जिम्मेदारी…सियासी हलकों में हलचल
बिलासपुर में ‘मेगा’ प्रशासनिक फेरबदल की चर्चा: कलेक्टर से निगम आयुक्त तक बड़े बदलाव की सूची वायरल

बिलासपुर..होली से ठीक पहले जारी एक ‘सिंगल ऑर्डर’ ने जिले में प्रशासनिक हलचल की ऐसी लहर पैदा की कि कुर्सियां भी एक-दूसरे को पहचानने लगीं। सूची लंबी है, बदलाव चौंकाने वाले हैं—और अंदाज कुछ अलग।
कलेक्टर बदले, पुरानी फाइलें फिर चर्चा में
राज्य सरकार ने नारायण प्रसाद गबेल को बिलासपुर का नया कलेक्टर नियुक्त किया है। वही गबेल, जिनका नाम जमीन से जुड़े विवादों और 24 जून 2021 को एसीबी की एफआईआर के कारण सुर्खियों में रहा था। आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापों की चर्चा अब फिर ताजा हो गई है। तबादले की राजनीति में यह वापसी कई सवाल भी छोड़ती है—और कई भौंहें भी उठाती है।
तखतपुर में नई तैनाती, सियासी ताव
संजय अग्रवाल को तखतपुर एसडीएम बनाया गया है। खबर यह भी कि इस नियुक्ति से विधायक धर्मजीत सिंह खासे नाराज बताए जा रहे हैं। वजह—स्थानीय समीकरण।
निगम आयुक्त की छुट्टी, प्रभारी की एंट्री
अमृत मिशन की गैस्केट खरीदी और करोड़ों की स्ट्रीट लाइट बंद रहने के आरोपों के बीच प्रकाश कुमार सर्वे को निगम आयुक्त पद से हटा दिया गया।
अब एडिशनल कलेक्टर ज्योति पटेल प्रभारी आयुक्त होंगी—जब तक सौमिल रंजन चौबे विदेश से लौट नहीं आते। चौबे इन दिनों University of Pennsylvania (फिलाडेल्फिया) में अध्ययनरत हैं।
अरपा मिशन को नया कप्तान
नगर विधायक के अरपा पुनरुद्धार कार्यक्रम को गति देने के लिए जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल को अरपा प्राधिकरण का सीईओ बनाया गया है।
वहीं एसडीएम आकांक्षा त्रिपाठी अब जिला पंचायत की कमान संभालेंगी।
शिक्षा, खनन और रेत का नया समीकरण
एडीएम शिवकुमार बनर्जी प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी होंगे। फूड कंट्रोलर अमृत कुजूर को माइनिंग का प्रभार, रेत खनन के लिए विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी की नियुक्ति, सहायक आयुक्त आबकारी नवनीत तिवारी को गौ-धन विकास की जिम्मेदारी—कुर्सियों ने विभाग बदले और विभागों ने चेहरे।
विश्वविद्यालयों में भी ‘रंग’
बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुल सचिव तारनेश गौतम अब गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय और सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय के भी प्रभारी कुलसचिव होंगे। शिक्षा जगत में इसे ‘तीन रंग एक साथ’ कहा जा रहा है।
और अब… सच का रंग
सूची लंबी है, नाम असली हैं, पद असली हैं—लेकिन यह पूरा घटनाक्रम होली स्पेशल अंदाज में बुना गया है।
प्रशासनिक फेरबदल की कल्पना अगर इतनी तेज हो जाए तो पाठक चौंकें भी और मुस्कुराएं भी।
तो बिलासपुर के प्रशासनिक गलियारों में फिलहाल इतना ही—रंगों से खेलिए, खबरों से नहीं। बुरा न मानो… होली है!





