8th Pay Commission Latest News/केंद्र सरकार के करीब एक करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बहुप्रतीक्षित 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से जुड़ी एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आ रही है। नए वेतनमान और भत्तों का खाका तैयार करने के लिए आयोग ने अब दिल्ली के गलियारों से निकलकर ‘ग्राउंड जीरो’ पर उतरने का फैसला किया है।

8th Pay Commission Latest News/सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित यह आयोग जून की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दौरे पर रहेगा, जिसके तुरंत बाद 22 और 23 जून को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दो दिवसीय “महामंथन” का आयोजन किया जाएगा। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश में कार्यरत केंद्रीय कर्मचारियों और उनकी यूनियनों की मांगों व जमीनी हकीकत को सीधे तौर पर समझना है।

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इस बार आयोग के साथ संवाद करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाई गई है। यदि कोई कर्मचारी यूनियन आयोग के समक्ष अपनी बात रखना चाहती है, तो उसे एक सख्त डिजिटल प्रोटोकॉल (Digital Protocol) का पालन करना होगा।

8th Pay Commission Latest News/यूनियनों को 10 जून से पहले सरकार के अधिकृत एनआईसी (NIC) पोर्टल पर अपना विस्तृत ‘मांग पत्र’ अपलोड करना अनिवार्य है। इसके बाद सिस्टम एक ‘यूनिक मेमो आईडी’ (Unique Memo ID) जनरेट करेगा, जिसके बिना मुलाकात का समय मिलना मुमकिन नहीं होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह डिजिटल विंडो विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की यूनियनों के लिए खोली गई है, ताकि लखनऊ बैठक को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सके।

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8वें वेतन आयोग की पूरी चर्चा इस समय एक जादुई फॉर्मूले पर टिकी है, जिसे ‘फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) कहा जाता है। यही वह गणितीय आधार है जो यह तय करेगा कि कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में कितनी वृद्धि होगी। कर्मचारी संगठनों (NC-JCM और AIDEF) ने इस बार सरकार के सामने बेहद आक्रामक मांग रखी है।

8th Pay Commission Latest News/जहां 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर इस्तेमाल किया गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 तय हुई थी, वहीं इस बार यूनियनें इसे बढ़ाकर 2.86 से 3.83 के बीच ले जाने की जिद पर अड़ी हैं। यदि सरकार इस मांग को स्वीकार कर लेती है, तो एंट्री-लेवल के कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी सीधे ₹50,000 के पार पहुंच सकती है।

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हालांकि, इतनी बड़ी वेतन वृद्धि को लेकर विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज है कि क्या सरकारी खजाना वेतनमान में होने वाली इस ‘मेजर सर्जरी’ का भार सह पाएगा? वेतन आयोग के सामने यह चुनौती होगी कि वह कर्मचारियों की उम्मीदों और सरकार की राजकोषीय क्षमता के बीच एक बेहतर संतुलन बनाए। लखनऊ दौरे के साथ-साथ पूरे देश की कर्मचारी यूनियनों और पेंशनर्स एसोसिएशन्स के लिए 31 मई 2026 की एक महत्वपूर्ण समय-सीमा भी नजदीक आ रही है। आयोग ने सभी हितधारकों को अपनी अंतिम सिफारिशें और वेतन ढांचे से जुड़े सुझाव सौंपने के लिए इसी तारीख तक का समय दिया है।

अगले कुछ हफ्ते भारतीय नौकरशाही और कर्मचारी संगठनों के बीच भारी रस्साकशी के होने वाले हैं। लखनऊ की दो दिवसीय बैठक न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के केंद्रीय कर्मचारियों के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 31 मई के बाद ड्राफ्ट रिपोर्ट में क्या निकलकर आता है और क्या सरकार चुनावी व सामाजिक समीकरणों को देखते हुए कर्मचारियों की ₹50,000 न्यूनतम सैलरी वाली ऐतिहासिक मांग पर कोई सकारात्मक रुख अपनाती है।