रवि भोई/कहते हैं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों अपनी बस्तर यात्रा के दौरान भाजपा के एक सांसद को खरी-खरी सुना दी। हुआ यूँ कि मेल-मुलाक़ात के दौरान एक भाजपा सांसद ने अमित शाह से कहा कि उनकी कोई नहीं सुनता। शाह ने सांसद से पूछा कौन नहीं सुनता, तो सांसद ने जवाब दिया गुरूजी लोग नहीं सुनते। फिर शाह ने कहा-एकाध नाम बताएं और उन्हें लेकर आएं। सांसद ने कहा-अभी तो कोई नहीं मिलेगा। शाह ने कहा-जो गुरूजी, आपकी नहीं सुनता, उसको ढूढ़ना और अगली बार मुझसे मिलवाना। आपकी जगह उसे सांसद बनाऊंगा। वही सभी गुरूजी को ठीक करेगा। शाह का जवाब सुनकर सांसद जी पानी-पानी हो गए और उनकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई।

बस्तर में श्वेत क्रांति का जिम्मा केदार को
बस्तर के आदिवासियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार उन्हें गाय बांटेगी। कहते हैं केंद्र सरकार श्वेत क्रांति के जरिए बस्तर को बदलना चाहती है। खबर है कि बस्तर में श्वेत क्रांति की जिम्मेदारी केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्य के सहकारिता मंत्री केदार कश्यप को सौंपी है। कहा जा रहा है कि अमित शाह ने केदार कश्यप को कह दिया कि बस्तर में गुजरात के अमूल जैसा प्लांट बस्तर में भी चाहिए। ऐसा ही कुछ अमित शाह कवर्धा में भी चाहते हैं। बताते हैं कि मंत्री केदार कश्यप और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा गुजरात जाकर अमूल का प्लांट देख आए हैं और सिस्टम भी समझ आए हैं। सुनने में आ रहा है कि बस्तर और कवर्धा में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार हर संभव मदद को तैयार है। अब देखते हैं नक्सलवाद के खात्मे के बाद बस्तर श्वेत क्रांति में कैसे आगे बढ़ता है।

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भाजपा नेत्री हुई मायूस
कहते हैं बस्तर भाजपा की एक नेत्री केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ फोटो खिंचवाना चाहती थी। पहले तो शाह साहब नेत्री को शालीनता से टालते रहे,पर नेत्री जिद पर ही अड़ गई तो दो टूक कह दिया -मैं जो काम करने आया हूँ, उसे करने दें। फोटो-वोटो बहुत हो गया। अमित शाह के सख्त तेवर देखकर नेत्री फिर उनके आसपास नजर नहीं आई। भाजपा नेत्री विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं और कई सालों से पार्टी की राजनीति कर रही है। इस कारण अमित शाह के पास उन्हें जाने का मौका मिल गया।

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बिना एसपी का जिला
आईपीएस आंजनेय वार्ष्णेय के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद सरकार ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में अब तक किसी को एसपी के तौर पर पदस्थ नहीं किया है। एएसपी के जिम्मे जिला है। आंजनेय वार्ष्णेय बीजापुर और धमतरी जैसे जिलों में सेवा दे चुके हैं। आंजनेय वार्ष्णेय को आठ मई को बिलासपुर रेंज आफिस में बाकायदा विदाई पार्टी भी दी गई, लेकिन जिले को अनाथ छोड़ दिया गया। सारंगढ़-बिलाईगढ़ है तो छोटा जिला, पर जिला तो जिला है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए सरकार ने ही सहमति दी होगी, ऐसे में उनके जाने के बाद किसी की पोस्टिंग सरकार की प्राथमिकता में होनी थी। अब सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के लोगों को नए एसपी की पोस्टिंग का इंतजार है। बताते हैं 2020 बैच के आईपीएस एसपी पद पर पोस्टिंग के इंतजार में हैं। अब देखते हैं 2020 वाले किसी आईपीएस का भाग्य चमकता है क्या ?

जून में एसपी में फेरबदल संभव

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अब कई जिलों के एसपी बदले जाने की चर्चा शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि एसपी में फेरबदल काफी दिनों से चर्चा में है, पर पोस्टिंग आर्डर अब तक नहीं निकला है। माना जा रहा है कि 10 जून को सुशासन तिहार समाप्त होने के बाद एसपी की लिस्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा। माना जा रहा है कि इस लिस्ट में कुछ आईजी और एडीजी स्तर के अधिकारी भी इधर से उधर हो सकते हैं। बस्तर के आईजी पी सुंदरराज को वहां काफी साल हो गए हैं। अब बस्तर में नक्सलवाद समाप्त हो गया है तो सुंदरराज की पोस्टिंग बदलने की खबर है। कुछ लोग पी सुंदरराज के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में जाने की भी अटकलें लगा रहे हैं।

क्या अरुण साव की घेराबंदी ?

उपमुख्यमंत्री अरुण साव के लोक निर्माण और नगरीय प्रशासन विभाग में 2005 बैच के दो अफसरों की पोस्टिंग की गई है। लोक निर्माण विभाग का सचिव मुकेश बंसल को बनाया गया है। मुकेश बंसल अब तक वित्त संभाल रहे थे। नगरीय प्रशासन में आर शंगीता को सचिव के तौर पर पदस्थ किया गया है। आर शंगीता को आबकारी से हटाकर अरुण साव के विभाग में भेजा गया है। राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी 2005 बैच के आईएएस रहे हैं। चौधरी और बंसल की ट्यूनिंग अच्छी बताई जाती है। ऐसे में मुकेश बंसल को वित्त से हटाकर पीडब्ल्यूडी में भेजा जाना चर्चा का विषय बन गया है। कहा जा रहा है कि राज्य में सड़कों की दुर्दशा को सुधारने के लिए तेजतर्रार अफसर मुकेश बंसल को भेजा गया है। बताते हैं अगले विधानसभा चुनाव से पहले सरकार सड़कों को दुरुस्त कर अपनी छवि को सुधार लेना चाहती है। वैसे मुकेश बंसल से वित्त विभाग अलग किया गया है, पर जीएसटी उनके पास ही है। 2005 बैच के अफसरों को ओपी का करीबी माना जाता है। अब ओपी चौधरी के करीबी अफसरों को अरुण साव के विभाग में भेजे जाने को लोग कई नजरिये से देख रहे हैं।

कांग्रेस में खींचतान

लगता है प्रदेश कांग्रेस में अध्यक्ष को लेकर घमासान मचना शुरू हो गया है। पूर्व उप मुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए काफी समय से प्रयासरत हैं। अब वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल 10 जून को समाप्त होने वाला है,उससे पहले प्रदेश अध्यक्ष के लिए नेताओं में संघर्ष दिखाई पड़ने लगा है। करीब तीन साल पहले मोहन मरकाम को हटाकर दीपक बैज को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। तब दीपक बैज बस्तर के सांसद थे। बताते हैं तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनवाया था। कहा जा रहा है कि भूपेश बघेल ने महिला कांग्रेस अध्यक्ष अपनी समर्थक को बनवा दिया और अब प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर भी अपना आदमी चाहते हैं। अब वे दीपक बैज के लिए हामी भरेंगे या नहीं, यह तो समय बताएगा। पर लोगों का मानना है कि टी एस सिंहदेव के लिए तो राजी नहीं होंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कोई पत्ता नहीं खोला है। संतुलन बनाकर चल रहे हैं। पर एक बात तो साफ़ है कि प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी के लिए कांग्रेस के भीतर युद्ध छिड़ गया है।

लगेगा अरुण पांडे पर दांव ?

कहा जा रहा है कि सरकार ने अरुण पांडे को पीसीसीएफ और वन बल प्रमुख बनाने का मन बना लिया है। अभी डीपीसी नहीं हो पाएगी तो प्रभारी बनाकर चार्ज दे दिया जाएगा और बाद में डीपीसी कर ली जाएगी। भाजपा की सरकार पिछली सरकार की तरह किसी जूनियर को पीसीसीएफ बनाने के पक्ष में नहीं है। अरुण पांडे से वरिष्ठ कुछ वन अफसर हैं, पर उनकी सेवा अवधि कम होने से सरकार उन पर दांव नहीं चलना चाहती। इस कारण अरुण पांडे के लिए लाइन क्लियर बताई जा रही है।
(लेखक पत्रिका समवेत सृजन के प्रबंध संपादक और स्वतंत्र पत्रकार हैं।)