रायपुर (मनीष जायसवाल)। स्कूल शिक्षा विभाग में विभिन्न लिपिकीय, अलिपिकीय, शैक्षणिक एवं प्रशासनिक पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया 15 अगस्त तक पूरी करने की समय-सीमा ने विभागीय अधिकारियों की मुश्किल बढ़ा दी है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को पदोन्नति प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसी सिलसिले में सोमवार 10 अगस्त को दोपहर तीन बजे से आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में संभाग और जिला स्तर पर चल रही पदोन्नति प्रक्रिया की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक करीब शाम पांच बजे के बाद तक चली।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में पदोन्नति से जुड़े सभी बिंदुओं के साथ पहले मांगी गई जानकारी लेकर अधिकारियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे। बैठक में संभाग एवं जिला स्तर पर पदोन्नति की स्थिति, रिक्त पदों, वरिष्ठता सूची और 15 अगस्त तक प्रक्रिया पूरी करने को लेकर अधिकारियों से जानकारी ली गई। पदोन्नति की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने और उनकी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।

सूत्रों के मुताबिक बैठक में सामने आया कि प्रदेश के सभी जिलों में पदोन्नति की तैयारी एक जैसी स्थिति में नहीं है। कुछ जिलों में प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है, जबकि कई जिलों में वरिष्ठता सूची और अन्य जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में 15 अगस्त की समय-सीमा में सभी संवर्गो की पदोन्नति पूरी कर पाना विभाग के सामने बड़ी चुनौती बन गया है।

पदोन्नति के बीच सबसे बड़ा पेच अब शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को लेकर सामने आ रहा है। खासकर सहायक शिक्षक से प्राथमिक प्रधान पाठक और शिक्षक पद पर पदोन्नति के मामले में अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं होने की चर्चा है कि पदोन्नति के लिए TET की अनिवार्यता को किस तरह लागू किया जाएगा।

न्यायालयीन मामलों के जानकारों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 के अपने फैसले में इन-सर्विस शिक्षकों के लिए TET को अनिवार्य पात्रता से जोड़ा था।बताते है कि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि पदोन्नति की आकांक्षा रखने वाले शिक्षक के लिए TET की पात्रता जरूरी होगी। बाद में 29 मई 2026 के पुनर्विचार आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने पहले दी गई समय-सीमा को बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया। कोर्ट ने राज्यों और सक्षम प्राधिकारियों से TET समय-समय पर, बेहतर हो तो साल में दो बार आयोजित करने की अपेक्षा भी जताई है।

इसी कानूनी स्थिति को देखते हुए पदोन्नति प्रक्रिया में TET को लेकर विभाग के सामने पेच खड़ा हो गया है। एक ओर लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे शिक्षक हैं, जिनकी वरिष्ठता और सेवा अनुभव के आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है, दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद TET को लेकर कानूनी स्थिति भी विभाग के सामने है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष राजेश चटर्जी का कहना है कि Teachers Eligibility Test (TET) अर्थात शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं होने की स्थिति में सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका (सिविल) डायरी क्रमांक 53434/2025, State of U.P. versus Anjuman Ishaat-E-Taleem Trust & Others, सिविल अपील क्रमांक 1385/2025 में 29 मई 2026 को राहत दी है। उनके मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कार्यरत शिक्षकों को TET उत्तीर्ण करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया गया है।

राजेश चटर्जी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते बताया कि आदेश के पैरा-34 में कहा गया है कि राज्यों और सक्षम प्राधिकारियों को TET नियमित रूप से और बेहतर हो तो साल में दो बार आयोजित करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि पात्र शिक्षकों को वैधानिक आवश्यकता पूरी करने का उचित अवसर मिल सके। सुप्रीम कोर्ट के 29 मई 2026 के आदेश में वास्तव में TET हासिल करने की समय-सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाई गई है।

श्री चटर्जी के मुताबिक 1 सितंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के मूल फैसले के पैरा-216 में पांच साल से कम सेवा शेष रहने वाले शिक्षकों को सेवानिवृत्ति तक सेवा में रहने की स्थिति बताई गई है, हालांकि उन्हें पदोन्नति के विचार क्षेत्र में नहीं रखने की बात कही गई है। वहीं पैरा-218 में यह स्पष्ट किया गया है कि जो शिक्षक सेवा में हैं और पदोन्नति के आकांक्षी हैं, लेकिन TET की पात्रता नहीं रखते, उनकी पदोन्नति के लिए उम्मीदवारी पर विचार नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के मूल फैसले में भी TET को इन-सर्विस शिक्षकों के लिए पदोन्नति की अनिवार्य पात्रता माना गया था।

ऐसे में अब विभाग के सामने यह स्थिति है कि 15 अगस्त तक पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी करने के लिए वरिष्ठता सूची और विभागीय नियमों के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए या TET को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश का इंतजार किया जाए। यदि TET को पदोन्नति में अनिवार्य किया जाता है तो ऐसे शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं जो वरिष्ठता में आगे हैं, लेकिन TET उत्तीर्ण नहीं हैं। दूसरी ओर उनसे जूनियर TET उत्तीर्ण शिक्षकों को पदोन्नति का अवसर मिलने की स्थिति बन सकती है। यही स्थिति शिक्षक संगठनों के विरोध का कारण बन रही है।

नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ ने पदोन्नति में विभाग का TET अनिवार्य किए जाने का विरोध किया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया में नई पात्रता लागू करने से बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि विभाग को शिक्षकों की सेवा, अनुभव और पहले से अर्जित पात्रता को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए। संघ ने सहायक शिक्षक से प्राथमिक प्रधान पाठक एवं शिक्षक पद पर पदोन्नति के लिए सेवारत शिक्षकों को राहत देने और प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की है।

विभागीय स्तर पर अभी पदोन्नति को लेकर 15 अगस्त की समय-सीमा तय है, लेकिन वरिष्ठता सूची और TET की स्थिति ने पूरी प्रक्रिया को पेचीदा बना दिया है। ऐसे में आने वाले एक-दो दिन महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि विभाग की ओर से TET को लेकर अलग से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होते हैं तो पदोन्नति की पूरी प्रक्रिया उसी के अनुरूप आगे बढ़ेगी। फिलहाल विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती तय समय-सीमा में पदोन्नति पूरी करने के साथ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करने की है।