बिलासपुर….विधानसभा में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला द्वारा उठाए गए कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाले ने अब बड़ा आपराधिक रूप ले लिया है। कलेक्टर के जांच आदेश के बाद बिलासपुर पुलिस की पड़ताल में फर्जीवाड़े का ऐसा संगठित नेटवर्क सामने आया है, जिसने वर्षों तक मौत के मामलों को सांप के काटने से हुई मौत बताकर सरकारी मुआवजा हड़पने का खेल खेला। पुलिस कप्तान रजनेश सिंह ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में इस पूरे रैकेट का खुलासा करते हुए बताया कि 16 मामलों में एफआईआर दर्ज हो चुकी है, 13 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं और पूरे गिरोह के तार वकीलों, डॉक्टरों, बैंक कर्मचारियों, बिचौलियों और अन्य लोगों से जुड़े मिले हैं।

एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि जांच के दौरान 11 से 12 स्थानों पर छापेमारी की गई, जहां से डायरी, सील, तैयार दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड बरामद हुए। बरामद डायरियों में यह तक दर्ज मिला कि किस प्रकरण को किस तरह तैयार करना है, किसके नाम पर बैंक खाता खुलवाना है, किसे कितना पैसा देना है और सरकारी मुआवजे की रकम का बंटवारा कैसे करना है।

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उन्होंने बताया कि जांच में सामने आया है कि लाभार्थियों को समझाया जाता था कि यदि वे सर्पदंश से मौत की पुष्टि करेंगे तो उन्हें 50 हजार रुपये का सरकारी मुआवजा मिलेगा। इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर पूरे मामले को वैध दिखाया जाता था। कई मामलों में वास्तविक मौत का कारण कुछ और था, लेकिन डॉक्टरों से कथित रूप से सर्पदंश का उल्लेख कराकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कराई गई।

तीन नेक्सस का खुलासा, कई बड़े नाम

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पुलिस कप्तान ने बताया कि जांच में अब तक तीन अलग-अलग नेक्सस सामने आए हैं। इनमें वकील हीरा खांडेकर, उसका मुंशी मनहर, बैंक कर्मचारी आशीष, एक अन्य वकील कांत साहू, डॉक्टर प्रियंका सोनी, एक अन्य डॉक्टर तथा ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा सहित कई लोगों की भूमिका सामने आई है। गोविंद विश्वकर्मा के खाते में करीब पांच लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन मिले हैं।

एसएसपी ने बताया कि सिम्स के एक डॉक्टर की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिस पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने का आरोप है। नोटिस देने के बावजूद वह न तो अस्पताल में मिला और न ही घर पर। उसकी तलाश जारी है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।

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2019 से 2024 तक के मामलों की जांच

पुलिस के मुताबिक अब तक की जांच वर्ष 2019 से फरवरी 2024 के बीच स्वीकृत सर्पदंश मुआवजा प्रकरणों पर केंद्रित रही है। इनकी पड़ताल में 16 मामलों में अपराध दर्ज किया गया है, जबकि एक मामला जांच में सही पाया गया। शेष मामलों की भी जांच जारी है।

छोटी मछलियां पकड़ी हैं, बड़ी भी बचेंगी नहीं

एक सवाल के जवाब में एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि फिलहाल जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई है, वे इस नेटवर्क का हिस्सा हैं, लेकिन इन्हीं के जरिए बड़े लोगों तक पहुंचा जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरा फर्जीवाड़ा बेहद सुनियोजित तरीके से संचालित होता था। कहीं फर्जी पंचनामा और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार होती थी तो कहीं मृतक के परिजनों को पहले से समझा दिया जाता था कि पुलिस और डॉक्टर के सामने केवल सर्पदंश से मौत की बात ही कहनी है।

कलेक्टर को सौंपी जाएगी पूरी रिपोर्ट

एसएसपी ने कहा कि जांच में सामने आए सभी तथ्यों से जिला प्रशासन को अवगत कराया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह के फर्जी मुआवजा प्रकरणों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इस तरह के और मामले तो सामने नहीं आने वाले हैं।

अब तक इस मामले में 16 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस कप्तान का कहना है कि जांच अभी जारी है और इस संगठित फर्जीवाड़े में शामिल कोई भी व्यक्ति कानून से बच नहीं पाएगा।