रामानुजगंज (पृथ्वी लाल केशरी)..वन परिक्षेत्र रामानुजगंज के कन्हर अंतर्राज्यीय बैरियर पर वन विभाग ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर परिवहन किए जा रहे लकड़ी से लदे एक ट्रक को जब्त कर बड़ी कार्रवाई का दावा किया है। लेकिन कार्रवाई के बाद विभाग की ओर से जारी जानकारी ने जितने सवालों के जवाब दिए, उससे कहीं अधिक नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दस्तावेज फर्जी पाए गए, तो उन दस्तावेजों में दर्ज प्रेषक, प्राप्तकर्ता और संबंधित व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?

वन विभाग के अनुसार, वन परिक्षेत्राधिकारी डॉ. दिलरुबा बनो के नेतृत्व में गुरुवार सुबह करीब पांच बजे कन्हर बैरियर पर वाहनों की जांच के दौरान ट्रक क्रमांक CG-15-ED-9966 को रोका गया। जांच में खम्हार, जामुन और नीलगिरी प्रजाति की कुल 89 नग लकड़ियां (22.074 घन मीटर) फर्जी दस्तावेजों के आधार पर परिवहन करते पाई गईं। इसके बाद वन अपराध दर्ज कर ट्रक और लकड़ी को चोरपहरी बास डिपो में सुरक्षित रख जांच शुरू कर दी गई।

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हालांकि, विभाग ने यह नहीं बताया कि फर्जी दस्तावेज किसके नाम से बने थे, लकड़ी मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में किस स्थान से लोड की गई थी और बिहार में किस व्यक्ति या फर्म तक पहुंचाई जानी थी। यही चुप्पी अब पूरे मामले को लेकर संदेह और चर्चाओं को जन्म दे रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दस्तावेज वास्तव में फर्जी थे, तो संबंधित नामों और नेटवर्क का खुलासा जांच को प्रभावित नहीं बल्कि पारदर्शी बनाता। इसके विपरीत, प्रमुख जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किए जाने से यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या जांच की आड़ में कुछ तथ्यों को फिलहाल सामने आने से रोका जा रहा है।

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मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि ट्रक फर्जी दस्तावेजों के सहारे मध्य प्रदेश से बिहार की ओर जा रहा था, तो उसने कई जिलों और विभिन्न जांच चौकियों को पार कैसे कर लिया? क्या कहीं भी दस्तावेजों की जांच नहीं हुई, या फिर निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामी है? यह सवाल भी अब चर्चा का विषय बन गया है।

फिलहाल वन विभाग जांच जारी होने की बात कह रहा है, लेकिन जब तक फर्जी दस्तावेजों में दर्ज नाम, लकड़ी की वास्तविक उत्पत्ति और अंतिम गंतव्य का खुलासा नहीं होता, तब तक इस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल शांत होते नहीं दिख रहे हैं।

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