LIVE UPDATE
editorial

फोटो में भविष्य तलाश रहे कांग्रेसियों को भी ट्रेनिंग देंगे क्या राहुल जी…?

जिस दिन यह खबर छपी है उसी दिन के अखबार में यह खबर भी है कि 10 फरवरी को राहुल गांधी दिल्ली में नवनियुक्त जिला कांग्रेस अध्यक्षों को ट्रेनिंग देंगे। जिसमें छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के जिला कांग्रेस अध्यक्ष शामिल होंगे। दिल्ली के इंदिरा भवन में यह प्रशिक्षण का कार्यक्रम हो रहा है। राहुल गांधी जिला कांग्रेस अध्यक्षों से सीधे संवाद भी करने वाले हैं और वन-टू-वन बातचीत भी करेंगे। यह ट्रेनिंग वैचारिक, संगठनात्मक और राजनीतिक रूप से पार्टी को मजबूत बनाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

एक ही दिन के अखबार की दो खबरों पर नजर पड़ी। पहली खबर थी – मनरेगा बचाओ संग्राम के बैनर में प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष की फोटो नदारद….. जिला कांग्रेस अध्यक्ष को नोटिस….। दूसरी खबर में बताया गया है कि 10 फरवरी को दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी नव नियुक्त जिला कांग्रेस अध्यक्षों को ट्रेनिंग देंगे।

वैसे तो दोनों खबरें अलग-अलग हैं और उनके बीच सीधा कोई नाता नहीं है। लेकिन लगा कि हालात को देखते हुए दोनों खबरें एक दूसरे से जुड़ रही है। मसलन एक तरफ नेताओं की फोटो बैनर में नदारद होने के कारण नौसीखिए जिला कांग्रेस अध्यक्ष को नोटिस जारी हो रही है। दूसरी तरफ देश के नव नियुक्त जिला कांग्रेस अध्यक्षों को राहुल गांधी ट्रेनिंग देने वाले हैं।

यानी एक तरफ हाल ही में नियुक्त हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष को एक चूक के कारण नोटिस मिल रही है और दूसरी तरफ उन्हें कांग्रेस कमेटी को चलाने के लिए हुनर सिखाने का भी इंतजाम है। उम्मीद की जानी चाहिए कि राहुल गांधी जैसे कांग्रेस के बड़े नेता उन्हें यह जरूर सिखाएंगे की कोई भी मुहिम हो पब्लिक आए या ना आए….. पब्लिक तक अपनी बात पहुंचे या ना पहुंचे…. लेकिन प्रोटोकॉल के हिसाब से फोटो जरूर लगना चाहिए ।

इस ट्रेनिंग के जरिए इस सवाल का जवाब भी तो आना चाहिए कि हाल ही में नियुक्त जिला कांग्रेस के अध्यक्ष नौसिखिए हैं या प्रदेश कांग्रेस में बैठे लोग अब तक नौसिखिया हैं, जो अभी भी पार्टी मुहिम की कामयाबी और अपना भविष्य फोटो में तलाश रहे हैं।

यह खबर किसी गंभीर आरोप से जुड़ी हुई नहीं है और न ही कोई सार्वजनिक लड़ाई से इसका वास्ता है। लेकिन इस खबर में संजीदगी सिर्फ इस बात को लेकर है कि प्रदेश कांग्रेस ने हाल ही में नियुक्त हुए बिलासपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री को नोटिस जारी किया है। नोटिस का सबब यह है कि कुछ दिनों पहले कोटा में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत आयोजित कार्यक्रम के दौरान पदयात्रा में लगाए गए बैनर में प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट और अध्यक्ष दीपक बैज की तस्वीर क्यों नहीं लगाई गई  ?  इसके लिए उनसे 3 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।

खबर की लाइन यह भी है कि किसी ने बैनर की तस्वीर लेकर इसकी शिकायत प्रदेश कांग्रेस से थी। जिस पर यह नोटिस जारी हुआ है।

जिस दिन यह खबर छपी है उसी दिन के अखबार में यह खबर भी है कि 10 फरवरी को राहुल गांधी दिल्ली में नवनियुक्त जिला कांग्रेस अध्यक्षों को ट्रेनिंग देंगे। जिसमें छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के जिला कांग्रेस अध्यक्ष शामिल होंगे। दिल्ली के इंदिरा भवन में यह प्रशिक्षण का कार्यक्रम हो रहा है। राहुल गांधी जिला कांग्रेस अध्यक्षों से सीधे संवाद भी करने वाले हैं और वन-टू-वन बातचीत भी करेंगे। यह ट्रेनिंग वैचारिक, संगठनात्मक और राजनीतिक रूप से पार्टी को मजबूत बनाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अब दोनों ही खबरों पर बात कर लेते हैं। बिलासपुर जिले के कोटा से उठा फोटो का यह मामला दिलचस्प है। दरअसल यह जिला कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री के मौजूदा ओहदे का पहले नोटिस है। हालांकि जिला कांग्रेस अध्यक्ष बनने के चंद दिनों के भीतर उन्होंने पार्टी के महत्वपूर्ण अभियान मनरेगा बचाओ संग्राम को लेकर अपने जिले में कई कार्यक्रम किए हैं। कई जगह पदयात्राएं निकाली गई और बाजारों में भी सभाएं हुई है। लेकिन पहली नोटिस उन्हें फोटो को लेकर मिल गई। जाहिर सी बात है कि उन्हें जिला कांग्रेस अध्यक्ष का पद भार संभाले हुए जितने दिन हुए हैं, उस लिहाज से उन्हें कोई भी नौसिखिया कह देगा।

लेकिन फोटो के मामले में हुई इस चूक को प्रदेश कांग्रेस ने जिस तरह संजीदगी से लिया है उसे देखकर सवाल उठ रहा है कि नौसिखिया कौन है ? इस मामले में यह बात भी सामने आई है कि कोटा के कार्यक्रम में जगह-जगह लगे पोस्टरों में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज की तस्वीर लगी थी। किसी उत्साही कार्यकर्ता ने कार्यक्रम के ठीक पहले रात में बैनर बनवाया और पदयात्रा के दौरान सीधे कार्यक्रम में लेकर पहुंच गया। जिसमें मनरेगा बचाओ संग्राम के लिए समन्वयक बनाए गए उमेश पटेल की तस्वीर तो थी । लेकिन पायलट और बैज की फोटो नहीं थी। उत्साह के माहौल में किसी ने इस पर गौर नहीं किया। मोबाइल के इस दौर में हर हाथ में कैमरा होता है और कांग्रेस के किसी “शुभचिंतक” की मेहरबानी से यह तस्वीर भी प्रदेश कांग्रेस तक पहुंच गई । और जवाब तलब हो गया ।

यह सही है की चंद् दिन पहले जिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाए गए महेंद्र गंगोत्री को अभी सीखने की जरूरत है। फील्ड में उतरने वाला व्यक्ति तो जिंदगी भर सीखता है।

इत्तेफाक से राहुल गांधी 10 फरवरी को ट्रेनिंग लेने वाले हैं। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में सामने आए इस घटनाक्रम को देखते हुए लोग उम्मीद कर रहे हैं कि राहुल गांधी शायद जिला कांग्रेस अध्यक्षों को यह भी सिखाएंगे कि पार्टी की किसी मुहिम में अगर भीड़ जुटे या ना जुटे… पब्लिक तक अपनी बात पहुंचे या ना पहुंचे ……. फिक्र इस बात को लेकर होनी चाहिए की नेताओं की फोटो लगी है या नहीं….। प्रोटोकॉल किसी भी मुहिम से पहले जरूरी है। अगर अपने नेता राहुल गांधी से रूबरू होकर अपनी बात रखने का मौका मिला तो जिला कांग्रेस अध्यक्षों को लगे हाथ पूछ भी लेना चाहिए कि क्या ट्रेनिंग की जरूरत प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भी है…. ?

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में फोटो को लेकर विवाद नया नहीं है। लोग यह भी याद कर रहे हैं कि रायपुर में हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान तब के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम की फोटो कट आउट से गायब थी।

जिस पर रायपुर के तब के महापौर एजाज ढ़ेबर से जवाब तलब किया गया था। लोगों को तो यह भी याद है कि बिलासपुर में उस समय की कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा के दौरे के समय कांग्रेस भवन के सामने पोस्टर में मोहन मरकाम की तस्वीर नहीं लगी थी । इस पर भी जवाब मांगा गया था। यह सब याद करने वाले दिमाग पर जोर देकर यह याद करने की कोशिश भी कर रहे हैं कि उस समय बैनर पोस्टर, कट आउट में अपनी फोटो तलाशने वाले अब खुद कहां है ?

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी मुद्दों की राजनीति पर जोर दे रहे हैं। हाल ही में वे हुए संसद में अपने मुद्दे को लेकर टिके रहे और इसकी चर्चा देश भर में बनी। लेकिन छत्तीसगढ़ में “मनरेगा बचाओ संग्राम” जैसे मुद्दे को कांग्रेस के अंदर ही “संग्राम” के रूप में खड़ा करने की कोशिश दिखाई दे तो लोगों को यह कहने का भी मौका मिल ही जाएगा कि वैसे भी गुटबाजी – खेमेबाजी जैसे जुमलों से कांग्रेस का पुराना नाता है। ऐसे एपीसोड गुब्बारे में फिर से हवा भर देते हैं। यही गुब्बारा पार्टी के मुद्दे को जमीन में छोड़कर खुले आसमान में उड़ान भरता रहता है। ऐसे में समझा जा सकता है कि ट्रेनिंग की जरूरत किसे है  ?

चलते चलते लोगों के इस सवाल पर भी गौर करना जरूरी है कि कहीं कोटा के कार्यक्रम में उमेश पटेल की बड़ी तस्वीर तो नज़रों में नहीं खटक गई ….? और प्रदेश प्रभारी – प्रदेश अध्यक्ष की फोटो के बहाने कांग्रेसियों के लिए नया मैसेज तो जारी नहीं हो गया… ? दरअसल प्रदेश कांग्रेस में बदलाव की चर्चाओं के बीच उमेश पटेल अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार के रूप में देखे जा रहे हैं। क्या उनकी बड़ी तस्वीर पर इसी वजह से नजर पड़ी है और फोटो विवाद सतह पर तैरने लगा  ? कांग्रेस इन दिनों संगठन सृजन अभियान चला रही है। राहुल गांधी जोर दे रहे हैं कि नजर मुद्दे पर होनी चाहिए… पद पर नहीं…। लेकिन ताजा एपीसोड देखकर क्या ऐसा नहीं लगता कि यहां तो कहीं पर नजर है… कहीं पर निशाना है… और फोटो में आने वाले कल की तलाश चल रही है….?

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
Back to top button
close