Why China is taxing condoms decline in birth rate/दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शुमार चीन इस समय एक ऐसी समस्या से जूझ रहा है जिसने सरकार की नींद उड़ा दी है। बीजिंग ने देश में गिरती जन्म दर को रोकने के लिए एक अनोखा और विवादित फैसला लेते हुए कंडोम और अन्य गर्भनिरोधक उत्पादों पर भारी टैक्स लगा दिया है। चीन में पिछले 32 सालों से कंडोम टैक्स फ्री थे, लेकिन अब सरकार ने अपनी नीति बदलते हुए इन पर 13 प्रतिशत टैक्स लागू कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट अनुसार सरकार की मंशा साफ है कि गर्भनिरोधकों को महंगा कर लोगों को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, लेकिन हाल ही में जारी सरकारी आंकड़े बताते हैं कि ड्रैगन का यह दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है। 9 जनवरी को जारी आंकड़ों के अनुसार, चीन की जन्म दर गिरकर 5.63 प्रति हजार व्यक्ति रह गई है, जो साल 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना के बाद से अब तक का सबसे निचला स्तर है।

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जनसांख्यिकी विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट इतनी भयानक है कि इसकी तुलना साल 1738 के दौर से की जा सकती है जब चीन की कुल आबादी मात्र 15 करोड़ के आसपास थी।

मीडिया रिपोर्ट अनुसार  चीन की सरकार केवल टैक्स बढ़ाकर ही नहीं रुकी है, बल्कि उसने साल 2026 में जन्म दर बढ़ाने वाली योजनाओं पर लगभग 180 अरब युआन यानी करीब 2.14 लाख करोड़ भारतीय रुपये खर्च करने का भारी-भरकम बजट भी रखा है।

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इस योजना के तहत सरकार तीन साल से कम उम्र के हर बच्चे के लिए परिवार को सालाना करीब 48 हजार भारतीय रुपये की वित्तीय सहायता दे रही है। इसके अलावा, सरकार ने शादी कराने वाली एजेंसियों, डेटिंग वेबसाइटों और बच्चों की देखभाल से जुड़ी सेवाओं को टैक्स फ्री कर दिया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सरकार ने प्रसव और गर्भावस्था के दौरान होने वाले सभी मेडिकल खर्चों को ‘लगभग फ्री’ करने का वादा किया है और आईवीएफ जैसे महंगे फर्टिलिटी ट्रीटमेंट को भी नेशनल मेडिकल इंश्योरेंस के दायरे में ला दिया गया है। सरकार की कोशिश है कि आर्थिक बोझ को कम कर युवाओं को परिवार बढ़ाने के लिए तैयार किया जाए, लेकिन हकीकत इन योजनाओं से कोसों दूर नजर आती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कंडोम पर टैक्स बढ़ाने या कुछ हजार रुपये की सब्सिडी देने से चीन की युवा पीढ़ी का फैसला नहीं बदलने वाला है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह बच्चे को पालने का अत्यधिक खर्च है। एक शोध के मुताबिक, चीन में एक बच्चे को 18 साल की उम्र तक पालने का कुल खर्च करीब 64 लाख रुपये तक आता है, जो दुनिया में सबसे महंगा माना जाता है।

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मीडिया रिपोर्ट अनुसार  आज की युवा पीढ़ी बेहतर वित्तीय स्थिरता और व्यक्तिगत आजादी चाहती है, जिसके कारण वे भारी खर्च वाले इस उत्तरदायित्व से पीछे हट रहे हैं। इसके साथ ही, चीन में महिलाओं की शिक्षा और करियर के अवसरों में वृद्धि हुई है, जिसके चलते वे शादी और बच्चों के फैसले को या तो टाल रही हैं या पूरी तरह से इससे दूरी बना रही हैं। 1990 के दशक से शुरू हुई यह गिरावट अब लोगों की अपनी व्यक्तिगत पसंद बन चुकी है, जिसे सरकारी नीतियों के जरिए बदलना बेहद कठिन साबित हो रहा है।

चीन में लगातार चौथे साल आबादी का घटना सरकार के लिए केवल सामाजिक ही नहीं बल्कि आर्थिक संकट का भी संकेत है। देश में अब कम युवा शादी कर रहे हैं और जो कर रहे हैं वे भी काफी देर से इस बंधन में बंध रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, शादी के पंजीकरण में पिछले कई सालों से निरंतर गिरावट देखी जा रही है।

भले ही सरकार ने ‘वन-चाइल्ड पॉलिसी’ को खत्म कर दिया हो और अब पैसे देकर बच्चों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही हो, लेकिन समाज में आए इस गहरे बदलाव ने जन्म दर में वह उछाल नहीं आने दिया जिसकी बीजिंग को उम्मीद थी। भारत और अमेरिका की तुलना में चीन की जन्म दर काफी पीछे रह गई है, जो आने वाले समय में चीन के श्रम बाजार और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।