रायपुर… छत्तीसगढ़ की भौगोलिक विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरणीय परिस्थितियों पर शोध को अकादमिक मंच देने की दिशा में छत्तीसगढ़ भूगोल परिषद की शोध पत्रिका ‘ज्योग्राफर्स टुडे’ का शनिवार को राजधानी रायपुर में विमोचन किया गया। परिषद के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. एच. एस. गुप्ता ने पत्रिका का विमोचन करते हुए भूगोल के अध्ययन, शोध और उसके सामाजिक महत्व पर अपने विचार रखे।

डॉ. एच. एस. गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ का भौगोलिक स्वरूप और प्राकृतिक विविधता शोध की व्यापक संभावनाएं समेटे हुए हैं। प्रदेश की धरती की बनावट, प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरणीय परिस्थितियों और क्षेत्रीय विविधताओं का वैज्ञानिक अध्ययन यहां की विशिष्टताओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकता है। भूगोल केवल धरातल और प्राकृतिक संरचनाओं का अध्ययन नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और मानवीय गतिविधियों के बीच संबंधों को समझने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने शोध पत्रिका के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी विषय की अकादमिक प्रगति के लिए शोध निष्कर्षों का प्रकाशन और उनका विशेषज्ञों के बीच आदान-प्रदान जरूरी है। ‘ज्योग्राफर्स टुडे’ के माध्यम से भूगोलवेत्ताओं और शोधार्थियों को अपने अध्ययन सामने रखने का अवसर मिलेगा। इससे छत्तीसगढ़ की भौगोलिक विशेषताओं, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर शोधपरक विमर्श को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

छत्तीसगढ़ की भौगोलिक परिस्थितियों को समझने के लिए स्थानीय स्तर पर अध्ययन और शोध की अहम भूमिका है। प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, क्षेत्रीय संरचना और पर्यावरण में हो रहे बदलावों से जुड़े विषयों पर शोध के निष्कर्ष नीति, नियोजन और अकादमिक अध्ययन के लिए उपयोगी आधार बन सकते हैं। ऐसे में शोध पत्रिका का प्रकाशन प्रदेश के भूगोल से जुड़े अध्ययन को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम में डॉ. जे. पी. शिवहरे, डॉ. डी. डी. कश्यप और डॉ. टी. एल. वर्मा सहित अन्य भूगोलवेत्ताओं एवं शिक्षाविदों ने भी अपने विचार रखे।

परिषद के सचिव प्राध्यापक डॉ. पी. एल. चंद्राकर ने पत्रिका के प्रकाशन और परिषद की गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परिषद वर्ष 2017 से राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियां आयोजित करती रही है। परिषद से करीब 150 आजीवन सदस्य जुड़े हैं। कोरोना काल में भी ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठियों के माध्यम से अकादमिक गतिविधियां जारी रखी गईं।