बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला बिलासपुर का है, जहां शेयर ट्रेडिंग में कम समय के भीतर मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर साइबर ठगों ने सिम्स से रिटायर्ड एक डॉक्टर से कथित तौर पर करीब 3 करोड़ रुपये ठग लिए।

आरोप है कि महज डेढ़ महीने के भीतर ठगों ने पहले निवेश पर मुनाफा दिखाकर भरोसा जीता और फिर लगातार बड़ी रकम निवेश कराने के बाद भुगतान के नाम पर भी पैसे मांगते रहे। मामले में सिटी कोतवाली थाने में अपराध दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जानकारी के मुताबिक, ठगों ने रिटायर्ड डॉक्टर को शेयर ट्रेडिंग में कम समय में अच्छी कमाई का भरोसा दिलाया। शुरुआत में निवेश पर मुनाफा दिखाकर उनका विश्वास हासिल किया गया।

इसके बाद अधिक लाभ का लालच देकर उनसे लगातार रकम निवेश कराई जाती रही। निवेश की रकम बढ़ने का भरोसा मिलने पर डॉक्टर ने भी अलग-अलग चरणों में पैसे लगाए।

ठगी का खुलासा तब हुआ, जब डॉक्टर ने निवेश से मिली कथित कमाई निकालने की कोशिश की। आरोप है कि रकम जारी करने के बदले उनसे अतिरिक्त पैसे मांगे गए।

मुनाफा मिलने की उम्मीद में उन्होंने कुछ और रकम भी दे दी, लेकिन इसके बाद भी भुगतान नहीं किया गया। लगातार टालमटोल के बाद जब उन्होंने ठगों से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनके मोबाइल नंबर बंद मिले।

इसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। पीड़ित की पहचान और मामले से जुड़े अन्य विस्तृत तथ्यों को सार्वजनिक नहीं किया गया है।

इसी तरह का एक अन्य मामला भी बिलासपुर में सामने आया है। जानकारी के अनुसार, साइबर रेंज थाने में शेयर ट्रेडिंग के नाम पर एक व्यक्ति से करीब 7 लाख रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत मिली है। इस मामले में भी निवेश पर मोटा मुनाफा देने का लालच दिए जाने की बात कही जा रही है।

छत्तीसगढ़ में साइबर अपराध के दूसरे मामलों में भी लोगों को अलग-अलग तरीकों से निशाना बनाया गया है। रायपुर के सड्डू क्षेत्र में एक शिक्षक से करीब 18 लाख रुपये की ठगी की जानकारी सामने आई थी।

आरोप है कि ठगों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर जम्मू-कश्मीर में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने का डर दिखाया और उन्हें तीन दिन तक वीडियो कॉल के जरिए तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में रखा।

बिलासपुर में ही एक रिटायर्ड कर्मचारी से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब 35 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया था।

वहीं, रायपुर में एक बुजुर्ग महिला से कथित तौर पर एनआईए अधिकारी बनकर संपर्क किया गया और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी देकर एफडी तुड़वाकर 7 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए। एक अन्य मामले में आधार कार्ड के दुरुपयोग का डर दिखाकर 65 वर्षीय महिला से करीब 8 लाख रुपये ठगने की जानकारी भी सामने आई थी।

रायपुर में एक किराना कारोबारी को भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने का डर दिखाकर कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट किया गया और अलग-अलग खातों में करीब 8.5 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए।

इसके अलावा, खैरागढ़ में करीब 1.86 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में उत्तराखंड और दिल्ली से जुड़े दो आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई थी। दुर्ग-भिलाई में साइबर ठगी की रकम अपने खातों में मंगाने के आरोप में 13 लोगों की गिरफ्तारी का मामला भी सामने आया है। इन अलग-अलग मामलों के विवरण और वर्तमान स्थिति की पुष्टि संबंधित पुलिस रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।

साइबर ठगी से बचने के लिए निवेश करने से पहले ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और कंपनी की विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।

सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप पर मिले अनजान निवेश समूहों, निश्चित या असाधारण मुनाफे के दावों और रकम निकालने के लिए अतिरिक्त भुगतान मांगने वालों से सावधान रहें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें और बैंक खाते या ओटीपी की जानकारी साझा न करें।

इसी तरह, कोई भी सरकारी जांच एजेंसी या पुलिस फोन अथवा वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को कानूनी रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती। यदि कोई खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या एनआईए का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का डर दिखाए और पैसे मांगे, तो उसकी बातों में न आएं।