भिलाई। छत्तीसगढ़ के भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के निजीकरण और इसे अडानी समूह को सौंपे जाने की चर्चाओं ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।

इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और दुर्ग से भाजपा सांसद विजय बघेल आमने-सामने आ गए हैं। विजय बघेल ने भूपेश बघेल पर तंज कसते हुए उन्हें अडानी का पीए या पीआरओ तक बता दिया। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए सांसद को भिलाई स्टील प्लांट और वहां काम करने वाले युवाओं की समस्याओं पर ध्यान देने की नसीहत दी।

दरअसल, भिलाई स्टील प्लांट को निजी हाथों में सौंपे जाने की आशंका जताते हुए भूपेश बघेल और कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाए थे।

उनका आरोप था कि अडानी समूह के प्लांट दौरे की आड़ में बीएसपी के निजीकरण की तैयारी की जा रही है। हालांकि, बीएसपी प्रबंधन और केंद्रीय इस्पात मंत्रालय ने प्लांट को बेचने से जुड़ी खबरों का खंडन किया है। ऐसे में निजीकरण की चर्चा और उस पर राजनीतिक बयानबाजी को लेकर विवाद तेज हो गया है।

भाजपा सांसद विजय बघेल ने पूर्व मुख्यमंत्री के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अडानी न तो घूमने आ रहे हैं और न ही भिलाई स्टील प्लांट खरीदने। भूपेश बघेल पर कटाक्ष करते हुए सांसद ने कहा कि अडानी क्या करते हैं और कहां जाते हैं, इसकी इतनी जानकारी भूपेश बघेल को रहती है कि ऐसा लगता है जैसे वे उनके पीए या पीआरओ हों।

विजय बघेल ने कहा कि किसी व्यक्ति को दूसरे के कामकाज और गतिविधियों की इतनी जानकारी होना असामान्य है। उनके इस बयान के बाद बीएसपी के निजीकरण का मुद्दा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में आ गया।

विजय बघेल के बयान पर पलटवार करते हुए भूपेश बघेल ने उनकी टिप्पणी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विजय बघेल दो बार के सांसद हैं और उन्हें इस तरह की बातें करने के बजाय क्षेत्र के महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने भिलाई स्टील प्लांट में भर्ती नहीं होने और युवाओं के बेरोजगार रहने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है, जबकि कर्मचारियों को ठेके पर काम करना पड़ रहा है। उनके मुताबिक, सांसद को इन समस्याओं को लेकर आवाज उठानी चाहिए।


बीएसपी के निजीकरण की चर्चा के बीच भाजपा विधायक रिकेश सेन ने इन आरोपों को भ्रामक बताया था। उन्होंने इसे राजनीतिक और चुनावी स्टंट करार देते हुए प्रदर्शन की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद बीएसपी प्रबंधन और इस्पात मंत्रालय की ओर से प्लांट को बेचे जाने की खबरों का खंडन किया गया।

हालांकि, खंडन के बाद भी भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि जब मामला भारत सरकार से जुड़ा है, तो बीएसपी प्रबंधन को इसका खंडन करने का अधिकार किसने दिया। इस बयान के साथ ही विवाद और बढ़ गया।

फिलहाल, भिलाई स्टील प्लांट के निजीकरण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। बीएसपी प्रबंधन और इस्पात मंत्रालय ने बिक्री की खबरों को गलत बताया है। ऐसे में निजीकरण की आशंका और राजनीतिक आरोपों के बीच अंतिम स्थिति को लेकर आधिकारिक बयानों और दस्तावेजों को ही निर्णायक माना जाना चाहिए।