UP News/गाजियाबाद के वैशाली इलाके से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। यहां एक परिवार ने जिस बेटे की मौत का मातम मनाया और जिसकी तेहरवीं की रस्में पूरी कीं, वही शख्स अपनी ही मौत की रस्मों के ठीक अगले दिन सही-सलामत घर वापस लौट आया। गिरधर सिंह नाम के इस व्यक्ति के अचानक सामने आने से जहां एक ओर परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं है, वहीं दूसरी ओर पुलिस प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर गिरधर जिंदा है, तो वह शव किसका था जिसका परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया?

पूरा मामला करीब एक महीने पहले शुरू हुआ जब गिरधर सिंह लापता हो गए थे। उनकी मां ने मसूरी पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी बीच, 12 जून को मसूरी नहर से एक अज्ञात शव बरामद हुआ। पुलिस ने शिनाख्त के लिए परिवार को बुलाया और परिजनों ने उस शव की पहचान गिरधर के रूप में की।

पहचान पुख्ता होने के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम कराया, जिसमें मौत का कारण डूबना बताया गया और शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिवार ने गिरधर की ‘मृत्यु’ को स्वीकार कर लिया, शव का अंतिम संस्कार किया और विधि-विधान से 13 दिनों की शोक रस्में (तेहरवीं) भी पूरी कीं। गुरुवार को रस्में खत्म हुईं और शुक्रवार को गिरधर अचानक घर पहुंच गए।

इस नाटकीय घटनाक्रम पर पुलिस का कहना है कि जब परिवार ने शव की पहचान की थी, तब उन्हें अपनी पहचान पर पूरा यकीन था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यदि परिजनों को जरा भी संदेह होता तो डीएनए टेस्ट करवाया जाता, लेकिन परिवार के दावों के कारण इसकी आवश्यकता नहीं समझी गई। पुलिस के मुताबिक, गिरधर सिंह 16 मई को एक मारपीट के मामले में डासना जेल गए थे।

जेल से रिहा होने के बाद वह घर लौटने के बजाय पंजाब के ब्यास स्थित राधा स्वामी सत्संग चले गए थे, जिसकी जानकारी उनके परिवार को नहीं थी।

हैरानी की बात यह भी है कि गिरधर के लापता होने और शव मिलने के बाद उनके परिवार ने कुछ लोगों पर हत्या का आरोप लगाया था। पुलिस ने इस आधार पर शैलेश वर्मा और अन्य के खिलाफ हत्या की एफआईआर भी दर्ज कर ली थी। अब गिरधर के जिंदा लौटने के बाद जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई है।

UP News/पुलिस अब उस अज्ञात शव की पहचान करने की कोशिश कर रही है जिसका अंतिम संस्कार गिरधर समझकर कर दिया गया था। यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और पुलिस की पहचान प्रक्रिया पर भी सवालिया निशान लगा रहा है।