TET news/रायपुर. छत्तीसगढ़ में सेवारत शिक्षकों के लिए प्रस्तावित विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के आयोजन को लेकर शिक्षक साझा मंच ने शासन के समक्ष 11 प्रमुख सुझाव एवं मांगें रखी हैं।

मंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के संचालक को ज्ञापन सौंपकर परीक्षा प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी, तकनीकी रूप से विश्वसनीय और शिक्षक हितैषी बनाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।

शिक्षक साझा मंच ने शासन की ओर से विभागीय TET आयोजित करने की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह परीक्षा प्रदेश के हजारों सेवारत शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है।

लंबे समय से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे शिक्षकों को अपनी पात्रता सिद्ध करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। परीक्षा की व्यवस्था बनाते समय उनके अनुभव, वर्तमान शैक्षणिक दायित्वों और तकनीकी सुविधाओं से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों को भी ध्यान में रखा जाना आवश्यक है।

मंच ने मांग की है कि विभागीय TET की परीक्षा तिथि, आवेदन प्रक्रिया, पाठ्यक्रम, प्रश्नों की संख्या, अंक विभाजन और परीक्षा पद्धति की जानकारी पर्याप्त समय पहले जारी की जाए। इससे शिक्षकों को तैयारी के लिए उचित समय मिल सकेगा और अंतिम समय में नियमों में बदलाव से होने वाली परेशानियों से बचा जा सकेगा।

मंच ने यह भी कहा है कि प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) और उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) की पात्रता परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक शिक्षकों को नियमानुसार दोनों स्तरों पर परीक्षा देने का अवसर दिया जाए।

दोनों परीक्षाओं की पालियां इस तरह निर्धारित हों कि किसी शिक्षक को समय के टकराव के कारण एक परीक्षा से वंचित न होना पड़े।

प्रस्तावित परीक्षा कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) पद्धति से होने की स्थिति में मंच ने सभी इच्छुक शिक्षकों के लिए ब्लॉक अथवा जिला स्तर पर निःशुल्क प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की मांग की है।

प्रशिक्षण में कंप्यूटर संचालन, स्क्रीन पर प्रश्न हल करने, उत्तर बदलने, समय प्रबंधन और परीक्षा सबमिट करने की प्रक्रिया समझाई जाए। इसके साथ ही मॉक टेस्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को तकनीकी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

मंच ने प्रत्येक जिले में पर्याप्त परीक्षा केंद्र बनाने और शिक्षकों को गृह जिले अथवा निकटतम केंद्र में परीक्षा देने की सुविधा देने पर भी जोर दिया है। परीक्षा के दौरान सर्वर, बिजली या कंप्यूटर में खराबी आने पर अतिरिक्त समय, पुनः परीक्षा अथवा अन्य न्यायसंगत समाधान का स्पष्ट प्रावधान करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

शिक्षक साझा मंच ने विभागीय TET के उत्तीर्ण अंकों को न्यायसंगत एवं व्यावहारिक आधार पर निर्धारित करने की मांग की है। मंच ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत तथा अनारक्षित वर्ग के लिए 50 प्रतिशत अंक निर्धारित करने पर विचार करने का सुझाव दिया है।

मंच का कहना है कि प्रश्नपत्र में केवल सैद्धांतिक जानकारी के बजाय अध्यापन कौशल, बाल मनोविज्ञान, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, कक्षा-कक्ष की परिस्थितियों और विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान से जुड़े प्रश्नों को उचित महत्व दिया जाना चाहिए।

इससे परीक्षा सेवारत शिक्षकों की वास्तविक शैक्षणिक दक्षता का बेहतर आकलन कर सकेगी।

इसके अलावा, परीक्षा के अवसरों की संख्या, साल में परीक्षा कितनी बार आयोजित होगी तथा निर्धारित समय में पात्रता प्राप्त नहीं करने पर शिक्षकों की नौकरी, वेतन, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की गई है। प्राथमिक स्तर पर कार्यरत सहायक शिक्षकों को उच्च प्राथमिक स्तर की पात्रता परीक्षा में शामिल होने का अवसर देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।

रविंद्र राठौर ने कहा कि विभागीय TET का उद्देश्य सेवारत शिक्षकों को पात्रता हासिल करने का अवसर देना होना चाहिए। परीक्षा की व्यवस्था बनाते समय शिक्षकों की सेवा अवधि, अनुभव और व्यावहारिक परिस्थितियों का ध्यान रखा जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि परीक्षा की समय-सारिणी, पाठ्यक्रम, उत्तीर्ण अंकों, परीक्षा के अवसरों और सेवा संबंधी परिणामों को लेकर स्थिति पहले से स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि शिक्षकों के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे।

प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें शिक्षक अपनी शैक्षणिक योग्यता का आकलन सहज और पारदर्शी तरीके से करा सकें।

उन्होंने CBT प्रशिक्षण, मॉक टेस्ट और प्रत्येक जिले में परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि तकनीकी जानकारी के अभाव में किसी शिक्षक को परेशानी नहीं होनी चाहिए। प्रश्नपत्र में विद्यालयीन गतिविधियों और वास्तविक अध्यापन कौशल को पर्याप्त महत्व दिया जाना चाहिए।

विकास सिंह राजपूत ने कहा कि विभागीय TET को लेकर शासन द्वारा जारी किए जाने वाले दिशा-निर्देशों में शिक्षकों के हितों और भविष्य से जुड़े सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक दोनों स्तरों की परीक्षा देने के इच्छुक शिक्षकों के लिए समय-सारिणी अनुकूल होनी चाहिए। साथ ही, परीक्षा के दौरान तकनीकी व्यवधान, उत्तरकुंजी, आपत्ति दर्ज कराने और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया भी पारदर्शी होनी चाहिए।

शिक्षक साझा मंच ने मांग की है कि आवेदन से लेकर प्रवेश पत्र, परीक्षा केंद्र, तकनीकी सहायता, परीक्षा परिणाम, उत्तरकुंजी और आपत्ति प्रक्रिया तक की सभी जानकारियां एक आधिकारिक दिशा-निर्देश पुस्तिका में उपलब्ध कराई जाएं।

प्रदीप पाण्डेय विकास राजपूत के साथ राजू टंडन, हेम कुमार साहू, ईश्वर चंद्राकर,लखेश्वर वर्मा ने आज स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और DPI संचालक से मिलकर आग्रह किया है कि ज्ञापन में शामिल सभी बिंदुओं पर सकारात्मक विचार कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। मंच के अनुसार, विभागीय TET केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि हजारों सेवारत शिक्षकों की पात्रता और सेवा संबंधी हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए इसके आयोजन में पारदर्शिता, समान अवसर और व्यावहारिक सुविधाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।