बिलासपुर… बारिश और तूफान ने किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया है। खेतों में खड़ी धान की फसल से लेकर कटाई के बाद खेत और खलिहान में रखी उपज तक पर मौसम की मार पड़ी है। नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को राहत दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने सर्वे में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कृषि विभाग और फसल बीमा कंपनी के अधिकारियों की आकस्मिक बैठक लेकर सर्वे टीमों की संख्या बढ़ाने और जल्द से जल्द नुकसान का आकलन पूरा करने को कहा है।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि किसानों को राहत दिलाने के लिए फसलों को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन जरूरी है। बीमा कराने वाले किसानों को नियमानुसार फसल बीमा का लाभ दिलाया जाएगा, वहीं जिन किसानों ने बीमा नहीं कराया है, उन्हें भी पात्रता के आधार पर राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 के तहत सहायता मिल सकेगी। ऐसे किसानों की फसल क्षति का सर्वे कर राजस्व विभाग को सहायता के प्रकरण तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

सर्वे में तेजी लाने के लिए बीमा कंपनी को अतिरिक्त टीमें लगाने को कहा गया है। डिजिटल क्रॉप सर्वे का अनुभव रखने वाले युवाओं को भी इस काम में शामिल किया जाएगा, ताकि प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन जल्द पूरा हो सके। जिले में चालू खरीफ मौसम के दौरान एचडीएफसी एर्गो कंपनी के माध्यम से करीब 47 हजार किसानों ने फसल बीमा कराया है।

कटाई फसल को भी बीमा का लाभ

कृषि विभाग के मुताबिक, फसल पकने के बाद काटकर खेत या खलिहान में रखी धान की उपज को बारिश के पानी से नुकसान होने पर बीमित किसानों को नियमानुसार बीमा का लाभ मिल सकता है। इसके लिए प्रभावित किसानों को नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर दर्ज करानी होगी। किसान टोल फ्री नंबर 14447, व्हाट्सएप नंबर 7065514447 या अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विकास अधिकारी को इसकी जानकारी दे सकते हैं।

वहीं, अत्यधिक बारिश और तूफान के कारण खेतों में खड़ी फसल के पौधे गिरने से हुए नुकसान के मामले में फसल कटाई प्रयोगों से प्राप्त परिणामों के आधार पर नियमानुसार सहायता निर्धारित की जाएगी। कृषि विभाग ने प्रभावित बीमित किसानों से तय समय-सीमा के भीतर नुकसान की सूचना देने की अपील की है।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कृषि विभाग, राजस्व विभाग और बीमा कंपनी को आपसी समन्वय से सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का जोर नुकसान का वास्तविक आकलन कर पात्र किसानों तक राहत और बीमा राशि पहुंचाने पर है।