Dhanteras 2026,धनतेरस 2026। इस साल धनतेरस का पर्व धार्मिक दृष्टि से खास संयोग लेकर आ रहा है। 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को धनतेरस के साथ शुक्र प्रदोष का संयोग बन रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रयोदशी तिथि और शुक्रवार के इस मेल पर भगवान शिव की पूजा के साथ मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की आराधना का भी विशेष महत्व है।

मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने, दान-पुण्य करने तथा जरूरतमंदों की सहायता करने से घर में सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहती है।

जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो उसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में शुक्र प्रदोष का संबंध सुख-सुविधाओं, वैभव और समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है। वहीं, धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि और धन के देवता कुबेर की पूजा की परंपरा है। ऐसे में इस बार धनतेरस और शुक्र प्रदोष का संयोग शिवभक्तों के लिए विशेष माना जा रहा है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस के दिन प्रदोष काल यानी शाम के समय शिवलिंग का कच्चे दूध, गंगाजल या पंचामृत से अभिषेक करना शुभ माना जाता है।

मान्यता है कि इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं। पूजा के दौरान शिवलिंग पर सफेद चंदन का लेप लगाने के साथ गुलाब का इत्र या सुगंधित पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं। इसे मानसिक शांति और पारिवारिक सुख की कामना से जोड़ा जाता है।

इस दिन शिवलिंग पर 11 बेलपत्र अर्पित कर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करने की भी परंपरा है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। शुक्र प्रदोष होने के कारण सफेद वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जरूरतमंदों को चावल, दूध या सफेद वस्त्र दान करना पुण्यकारी होता है। कुछ लोग स्नान के पानी में थोड़ी इलायची या इत्र मिलाकर स्नान करने की परंपरा भी निभाते हैं।

धनतेरस पर घर में बरकत और सुख-समृद्धि की कामना से कुछ पारंपरिक उपाय भी किए जाते हैं। इस दिन साबुत धनिया और नमक का नया पैकेट खरीदकर घर लाना शुभ माना जाता है। लोक मान्यता है कि इससे घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। इसी तरह धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदने की परंपरा भी प्रचलित है।

मान्यता है कि नई झाड़ू घर लाने से नकारात्मकता दूर होती है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। कुछ लोग नई झाड़ू पर सफेद धागा भी बांधते हैं।

धनतेरस की शाम भगवान कुबेर की पूजा करना भी विशेष माना जाता है। पूजा के दौरान दीपक जलाकर भगवान कुबेर का स्मरण करें और श्रद्धा के साथ ‘ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः’ मंत्र का जाप करें। धार्मिक विश्वास है कि इससे घर में धन-धान्य और समृद्धि बनी रहती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस और शुक्र प्रदोष का यह संयोग भगवान शिव, मां लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना का विशेष अवसर है।

इस दिन पूजा-पाठ के साथ जरूरतमंदों की मदद और सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करने का भी महत्व बताया गया है। हालांकि, इन उपायों को धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़ी मान्यताओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।