छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के दौरान पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखने का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। समाज कल्याण विभाग की अधिसूचना में बदलाव और भर्ती विज्ञापन जारी होने के बीच तालमेल नहीं होने से यह स्थिति बनी।

याचिकाकर्ताओं ने इस मुद्दे को अदालत में उठाया, जिसके बाद राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि भर्ती विज्ञापन में दिव्यांगता के आधार पर आरक्षित पदों के समूहवार विभाजन में संशोधन के लिए शुद्धिपत्र जारी करने पर सहमति है। भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्ण दृष्टिबाधित श्रेणी (B) के अभ्यर्थियों को शामिल किए जाने की भी जानकारी दी गई।

मीनाक्षी मांगलेकर एवं दो अन्य याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता रूंगठा के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की। 7 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से सहायक शिक्षक भर्ती के विस्तृत विज्ञापन में दिव्यांगता श्रेणियों के अनुसार पदों का समूहवार विभाजन सही तरीके से नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया गया।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस कृष्णराम महापात्र की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच में हुई। प्रारंभिक सुनवाई के बाद अगली सुनवाई के लिए 9 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की गई।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता रूंगठा स्वयं भी दृष्टिबाधित हैं। वे ब्रेल लिपि के माध्यम से कानूनी दस्तावेजों और कानून की पुस्तकों का अध्ययन करते हैं।

सुनवाई के दौरान उन्होंने दिव्यांगता की श्रेणियों और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों का मुद्दा उठाया। कोर्ट ने इस पर राज्य सरकार से जवाब मांगा।

राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने समाज कल्याण विभाग की अधिसूचना के आधार पर भर्ती विज्ञापन में दिव्यांगता की श्रेणियों का चिन्हांकन किया था।

पहले जारी अधिसूचना में सहायक शिक्षक पद के लिए पूर्ण दृष्टिबाधित श्रेणी (B) को चिन्हांकित नहीं किया गया था। बाद में समाज कल्याण विभाग ने संशोधित अधिसूचना जारी कर इस श्रेणी को शामिल किया, लेकिन तब तक भर्ती विज्ञापन जारी हो चुका था और ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी पूरी हो गई थी।

मामले में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, 25 फरवरी 2026 की अधिसूचना के आधार पर दिव्यांगता की श्रेणियों का चिन्हांकन किया गया था। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने 16 अप्रैल 2026 को सहायक शिक्षक पद का संक्षिप्त विज्ञापन जारी किया।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल की वेबसाइट पर 24 जुलाई 2026 को विस्तृत विज्ञापन जारी हुआ। उसमें भी पहले की अधिसूचना के आधार पर पदों का चिन्हांकन किया गया, जिसके चलते पूर्ण दृष्टिबाधित श्रेणी (B) को शामिल नहीं किया गया।

समाज कल्याण विभाग ने 11 सितंबर 2026 को संशोधित अधिसूचना जारी की, जिसमें सहायक शिक्षक पद के लिए पूर्ण दृष्टिबाधित श्रेणी (B) को शामिल किया गया।

हालांकि, तब तक भर्ती प्रक्रिया में ऑनलाइन आवेदन लिए जा चुके थे। विभाग की ओर से कोर्ट को बताया गया कि इस चरण पर संशोधित अधिसूचना के अनुसार वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में इस श्रेणी को शामिल करना विधिक और व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने सामान्य प्रशासन विभाग के 5 मार्च 2019 के पत्र के अनुसार दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित पदों को श्रेणियों में विभाजित करने के मुद्दे पर भी सवाल उठाया।

राज्य सरकार की ओर से डिवीजन बेंच को बताया गया कि लोक शिक्षण संचालनालय दिव्यांगों के लिए आरक्षित पदों के समूहवार विभाजन में संशोधन के लिए शुद्धिपत्र जारी करने पर सहमत है। इसका प्रारूप भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

इस मामले में विभागीय अधिसूचना और भर्ती विज्ञापन के समय के बीच अंतर महत्वपूर्ण बन गया है। संशोधित अधिसूचना आने तक आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, जबकि याचिकाकर्ताओं का सवाल था कि पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण व्यवस्था में प्रावधान क्यों नहीं किया गया। सरकार ने भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं में इस श्रेणी को शामिल करने की बात कही है। मामले में हाई कोर्ट की आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी।