दुर्ग.छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को उच्च शिक्षा संचालनालय, रायपुर में पदस्थ करने के राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है।

जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय सेवा नियम, 1983 के नियम 22 का हवाला देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के कर्मचारी को एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में स्थानांतरित करने की शक्ति का इस्तेमाल उसे विश्वविद्यालय से हटाकर किसी सरकारी विभाग या संचालनालय में भेजने के लिए नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने माना कि राज्य सरकार इस तरह के आदेश के लिए वैधानिक अधिकार का आधार स्थापित नहीं कर सकी।

मामले के अनुसार, राज्य सरकार ने 29 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को विश्वविद्यालय से हटाकर उच्च शिक्षा संचालनालय, रायपुर में पदस्थ कर दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए भूपेंद्र कुलदीप ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय सेवा नियम, 1983 के नियम 22 के तहत स्थानांतरण की शक्ति एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में स्थानांतरण तक सीमित है।

उच्च शिक्षा संचालनालय स्वयं कोई विश्वविद्यालय नहीं है। इसलिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव को वहां पदस्थ करना नियम 22 के दायरे से बाहर है।

राज्य सरकार की ओर से इस दलील का विरोध करते हुए कहा गया कि 23 मार्च 1999 के संशोधन के जरिए नियम 22 में ‘कुलाधिपति’ के स्थान पर ‘राज्य सरकार’ शब्द किया गया था। सरकार के अनुसार, इस संशोधन के बाद स्थानांतरण का अधिकार राज्य सरकार को प्राप्त है। यह भी बताया गया कि आदेश विभागीय जांच लंबित होने के कारण अटैचमेंट के उद्देश्य से जारी किया गया था।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने नियम 22 के दायरे पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि वर्ष 1999 में किए गए संशोधन से स्थानांतरण का अधिकार इस्तेमाल करने वाली प्राधिकारी संस्था में बदलाव हुआ, लेकिन इससे नियम के तहत स्थानांतरण की सीमा नहीं बदली। नियम की शक्ति अब भी एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में स्थानांतरण तक सीमित है।

हाई कोर्ट ने यह भी पाया कि राज्य सरकार ऐसा कोई वैधानिक प्रावधान नहीं बता सकी, जिसके तहत विश्वविद्यालय के कर्मचारी को उच्च शिक्षा संचालनालय या राज्य सरकार के किसी अन्य विभाग में अटैच किया जा सके। कोर्ट के अनुसार, केवल विभागीय जांच लंबित होने का हवाला देकर ऐसा स्थानांतरण या अटैचमेंट आदेश जारी करने का अधिकार स्थापित नहीं होता।

इन आधारों पर हाई कोर्ट ने माना कि कुलसचिव को विश्वविद्यालय से हटाकर उच्च शिक्षा संचालनालय में पदस्थ करने के आदेश के समर्थन में वैधानिक अधिकार का पर्याप्त आधार नहीं है। कोर्ट ने भूपेंद्र कुलदीप की याचिका स्वीकार करते हुए 29 सितंबर 2026 के स्थानांतरण आदेश को रद्द कर दिया।

हालांकि, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कानून के अनुरूप उचित आदेश पारित करने की स्वतंत्रता दी है।

इस फैसले में मुख्य सवाल विश्वविद्यालय सेवा नियमों के तहत स्थानांतरण की शक्ति की सीमा और विश्वविद्यालय के कर्मचारी को किसी सरकारी संचालनालय में पदस्थ करने के वैधानिक आधार का था।