रायपुर। प्रदेश के सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा का मुद्दा अब बड़े आंदोलन का रूप लेने जा रहा है। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के शिक्षक संगठनों ने एक मंच पर आकर सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। संगठनों ने साफ कर दिया है कि अब आश्वासन से काम नहीं चलेगा। सेवा सुरक्षा को लेकर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को ब्लॉक से जिला और जिला से राजधानी तक ले जाया जाएगा।

 

छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर, नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास राजपूत और सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष इरफान सैय्यद के नेतृत्व में शिक्षक नेताओं ने गुरुवार को डीपीई और शिक्षा सचिव को ज्ञापन सौंपकर सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

 

शिक्षक नेताओं का कहना है कि प्रदेश के शिक्षक पूरी जिम्मेदारी के साथ बच्चों को पढ़ा रहे हैं और उनके भविष्य को संवार रहे हैं। ऐसे में उन्हीं शिक्षकों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति ठीक नहीं है। सरकार यदि शिक्षकों से अपनी जिम्मेदारी पूरी करने की अपेक्षा करती है तो उनके सेवा भविष्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार को उठानी होगी।

 

17 अगस्त को बेमेतरा में पहला बड़ा प्रदर्शन

 

आंदोलन के पहले चरण में 17 अगस्त को बेमेतरा में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव किया जाएगा। इसके बाद 22 अगस्त को प्रदेश के सभी ब्लॉक मुख्यालयों में शिक्षक सेवा सुरक्षा न्याय यात्रा और रैली निकाली जाएगी। इस दौरान मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर सेवा सुरक्षा की मांग रखी जाएगी। इसके बाद जिला स्तर पर भी शिक्षक सेवा सुरक्षा न्याय यात्रा, धरना और रैली आयोजित की जाएगी। इसमें मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर सरकार से तत्काल निर्णय की मांग की जाएगी।

 

9 सितंबर से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के निवास तक पदयात्रा

 

शिक्षक संगठनों ने आंदोलन के निर्णायक चरण की तारीख भी तय कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने कहा कि 9 सितंबर से आंदोलन निर्णायक चरण में प्रवेश करेगा।

बिलासपुर और सरगुजा संभाग के शिक्षक मुख्यमंत्री के विधानसभा मुख्यालय स्थित निवास तक शिक्षक सेवा सुरक्षा न्याय पदयात्रा निकालेंगे। शिक्षक करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर मुख्यमंत्री निवास पहुंचेंगे और वहां मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन दिन-रात धरना शुरू करेंगे।

 

इसी तरह रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग के शिक्षक स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के दुर्ग स्थित विधानसभा मुख्यालय निवास तक शिक्षक सेवा सुरक्षा न्याय पदयात्रा एवं रैली निकालेंगे। करीब दो किलोमीटर की पदयात्रा के बाद शिक्षक मंत्री निवास पहुंचकर मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे। शिक्षक नेताओं ने दो टूक कहा कि मांगें पूरी होने तक शिक्षक धरना स्थल से नहीं हटेंगे।

 

टीईटी को लेकर भी सरकार को घेरा

 

शिक्षक नेताओं ने टीईटी परीक्षा को लेकर भी शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी पात्रता हासिल करने की समय सीमा तय है। ऐसे में राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि जिन शिक्षकों ने अभी टीईटी पात्रता हासिल नहीं की है, उन्हें परीक्षा में शामिल होने के पर्याप्त अवसर दिए जाएं।

 

संगठनों का आरोप है कि विभाग टीईटी अनिवार्यता से जुड़े न्यायालय के निर्देशों को लागू करने में तेजी दिखा रहा है, लेकिन शिक्षकों को पात्रता हासिल करने के लिए जरूरी अवसर देने के मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। शिक्षक नेताओं का कहना है कि यदि समय पर टीईटी परीक्षा आयोजित नहीं होगी तो सेवारत शिक्षक पात्रता कैसे हासिल करेंगे। सरकार को इस पूरे मामले पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए।

 

जो शिक्षक बच्चों का भविष्य बना रहे, उनका भविष्य भी सुरक्षित हो

 

रविंद्र राठौर, विकास राजपूत और इरफान सैय्यद ने कहा कि प्रदेश के शिक्षक लाखों बच्चों को शिक्षा देने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनके सेवा भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता का असर शिक्षक और उनके परिवार दोनों पर पड़ता है। इसलिए सेवा सुरक्षा को सिर्फ नौकरी से जुड़ा विषय मानकर नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अभी भी समय है। शिक्षकों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर ठोस निर्णय लिया जाए, ताकि आंदोलन को आगे बढ़ाने की स्थिति न बने।

 

शिक्षक दिवस पर सोशल मीडिया अभियान

 

शिक्षक दिवस के अवसर पर सेवा सुरक्षा के मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया अभियान भी चलाया जाएगा। अभियान का नारा “सेवा सुरक्षा का दो वरदान, शिक्षक दिवस में शिक्षक का करो सम्मान” रखा गया है। इसके माध्यम से प्रदेशभर में सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा का मुद्दा उठाया जाएगा। शिक्षक संगठनों ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं है। यह प्रदेश के सेवारत शिक्षकों के भविष्य और सम्मान से जुड़ा आंदोलन है। सरकार को अब आश्वासन के बजाय सेवा सुरक्षा पर ठोस निर्णय लेना चाहिए।

 

बैठक और ज्ञापन कार्यक्रम में तीनों संगठनों के प्रदेश सचिव राजू टंडन, मनीष मिश्रा, बसंत कौशिक, पोखान साहू, अशोक कुमार धुर्वे, नरेश बघेल, कौशल अवस्थी, रामलाल साहू, रमेश साहू, सिराज बख्श, ईश्वर चंद्राकर, हरीश गोपाल, कृष्ण वर्मा, संजीव मानिकपुरी, हृदय राठौर और रेखा लाल श्रीवास सहित अन्य शिक्षक नेता उपस्थित रहे।