Teacher News/रायपुर। TET की अनिवार्यता और प्रमोशन में रोड़ा अटकने को लेकर शिक्षक नेताओं की लामबंदी भी होने लगी है। प्रदेश के शिक्षकों के तीन संगठनों ने इस लड़ाई को मिलजुलकर लड़ने का ऐलान करते हुए एकता का प्रदर्शन भी कर दिया है।इसी बीच शिक्षकों की समस्याओं को लेकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन सामने आ गया है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को पत्र लिखकर जरुरी मांगों को रख दिया है।

फेडरेशन ने अपने पत्र में लिखा है, छत्तीसगढ़ के प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत सहायक शिक्षकों एवं शिक्षकों की पदोन्नति लंबे समय से लंबित है।

हाल ही में शिक्षा विभाग की बैठक में पदोन्नति हेतु शिक्षक पात्रता परीक्षा TET को अनिवार्य किए जाने संबंधी निर्णय से प्रदेश के हजारों शिक्षकों में असमंजस एवं निराशा की स्थिति निर्मित हुई है।

वर्तमान भर्ती नियमों में पदोन्नति हेतु टीईटी की अनिवार्यता स्पष्ट नहीं है: प्रचलित शिक्षक भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में पदोन्नति के लिए टीईटी को अनिवार्य पात्रता के रूप में निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में विभागीय बैठक के निर्णय के आधार पर पदोन्नति में अतिरिक्त शर्त जोड़ना प्रचलित नियमों की भावना के विपरीत होगा।

वर्ष 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करने की समय-सीमा होने की स्थिति में तत्काल पदोन्नति रोकना उचित नहीं: यदि शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए वर्ष 2028 तक का समय दिया गया है, तो उन्हें उक्त अवधि के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करने का अवसर दिया जाना चाहिए। टीईटी के नाम पर वर्तमान में लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को रोकना अथवा वरिष्ठ शिक्षकों को पदोन्नति से वंचित करना पूर्णतः अन्यायपूर्ण होगा।

वरिष्ठता के आधार पर तत्काल पदोन्नति की जाए: फेडरेशन की मांग है कि वर्तमान में उपलब्ध रिक्त पदों पर विभाग द्वारा तैयार वरिष्ठता सूची के आधार पर पात्र शिक्षकों की पदोन्नति तत्काल की जाए। पदोन्नति में आरक्षण संबंधी प्रावधानों का भी नियमानुसार पालन किया जाए।

टीईटी उत्तीर्ण करने हेतु अवसर प्रदान किया जाए: जिन शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक माना जा रहा है, उन्हें शासन द्वारा पर्याप्त अवसर प्रदान किया जाए। इसके लिए लोक शिक्षण संचालनालय DPI के माध्यम से विभागीय टीईटी का आयोजन शीघ्र किया जाना उचित होगा, ताकि सभी पात्र शिक्षक निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपनी पात्रता पूर्ण कर सकें।

वरिष्ठता के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े: जिन शिक्षकों ने वर्षों तक शासकीय सेवा में रहते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन किया है, उनकी पदोन्नति केवल टीईटी उत्तीर्ण नहीं होने के आधार पर रोकना अथवा वरिष्ठता सूची में कनिष्ठ शिक्षकों से पीछे करना न्यायसंगत नहीं होगा। इससे वरिष्ठता एवं पदोन्नति के अधिकार प्रभावित होंगे तथा भविष्य में न्यायालयीन विवाद उत्पन्न होने की पूरी संभावना है।