बिलासपुर/छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पदोन्नति प्रक्रिया में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य बनाने के निर्देश ने प्रदेश के हजारों सहायक शिक्षकों के बीच भारी असंतोष और मानसिक तनाव पैदा कर दिया है। वर्षों से निष्ठापूर्वक शासकीय सेवा दे रहे शिक्षकों का मानना है कि पदोन्नति जैसे संवैधानिक और सेवा संबंधी अधिकार को एक नई परीक्षा की शर्त से जोड़ना उनके लंबे अनुभव और वरिष्ठता का अपमान है।

बिलासपुर जिले में इस मुद्दे को लेकर सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और सरकार से इस नियम पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है।

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सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन, जिला बिलासपुर के अध्यक्ष सुनील कुमार पाण्डेय ने शिक्षकों का पक्ष रखते हुए कहा कि शिक्षक किसी नई नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे अपनी वर्षों की सेवा के बदले न्यायसंगत पदोन्नति की मांग कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जो शिक्षक दशकों से कक्षा-कक्ष में बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं.

उनके अनुभव को दरकिनार कर उन पर TET की अनिवार्यता थोपना उनके सेवाकाल के अवमूल्यन जैसा है। विशेष रूप से 1998 के बाद नियुक्त हुए या लंबे समय से सेवारत हजारों शिक्षक, जो विभिन्न कारणों से अब तक TET उत्तीर्ण नहीं कर पाए हैं, इस नए नियम के कारण पदोन्नति की दौड़ से बाहर हो सकते हैं, जिसका सीधा असर उनके मनोबल और आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।

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फेडरेशन का कहना है कि पदोन्नति का प्राथमिक आधार हमेशा से वरिष्ठता और सेवा अवधि रहा है। शिक्षकों ने वर्षों के प्रशिक्षण और जमीनी कार्यक्षमता के माध्यम से अपनी योग्यता को बार-बार साबित किया है, ऐसे में उन्हें फिर से एक परीक्षा के कटघरे में खड़ा करना मानसिक दबाव पैदा करने वाला कदम है।

सुनील कुमार पाण्डेय ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की कठिन परिस्थितियों में शिक्षा व्यवस्था को संभालने वाले इन गुरुजनों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिक्षक समुदाय का मानना है कि सरकार को नियमों को केवल कागजी चश्मे से देखने के बजाय उन व्यावहारिक परिस्थितियों को समझना चाहिए, जिनसे अनुभवी शिक्षक गुजर रहे हैं।

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अपनी मांगों को लेकर मुखर होते हुए शिक्षक संगठन ने सरकार के सामने कुछ प्रमुख बिंदु रखे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि पदोन्नति में TET की अनिवार्यता को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए और वरिष्ठता व अनुभव को ही पदोन्नति का मुख्य पैमाना माना जाए।

साथ ही, जिन शिक्षकों की पदोन्नति केवल इस एक परीक्षा की वजह से रुकी हुई है, उन्हें न्यायसंगत अवसर प्रदान किया जाए। संगठन ने सरकार से आग्रह किया है कि शिक्षकों में व्याप्त भ्रम और तनाव को दूर करने के लिए एक स्पष्ट और शिक्षक-हितैषी आदेश जारी किया जाए। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके हितों की अनदेखी की गई, तो वे अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करना जारी रखेंगे।