दिल्ली।सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ राज्य विश्वविद्यालय सेवा में रजिस्ट्रार (कुलसचिव) पद की नियुक्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को करारा झटका दिया है.

शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार के उस फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया है, जिसके तहत छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा चयनित उम्मीदवार डॉ. शैलेंद्र कुमार पटेल को बाद में अनुभव की कमी का हवाला देकर अपात्र घोषित कर दिया गया था.

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य विश्वविद्यालय सेवा नियम, 1983 के नियम 10 के तहत किसी उम्मीदवार की पात्रता के संबंध में आयोग का फैसला ही अंतिम होता है.

कोर्ट ने साफ किया कि आयोग द्वारा चयन और अनुशंसा के बाद राज्य सरकार अपनी ओर से कोई नई विशेषज्ञ समिति गठित करके उम्मीदवार की पात्रता की दोबारा जांच नहीं कर सकती. यदि सरकार को आयोग के निर्णय पर कोई संदेह था, तो उसे मामला वापस आयोग के पास ही भेजना चाहिए था.

धोखाधड़ी या फर्जीवाड़े जैसी असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर सरकार अपने स्तर पर नए सिरे से परीक्षण नहीं कर सकती.

मामले के अनुसार, CGPSC ने 9 फरवरी 2021 को रजिस्ट्रार के तीन पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था, जिसमें डॉ. शैलेंद्र कुमार पटेल ने ओबीसी वर्ग से आवेदन किया था. दस्तावेजों की गहन जांच के बाद आयोग ने 30 सितंबर 2021 को उन्हें ओबीसी श्रेणी में पहला स्थान देते हुए राज्य सरकार को नियुक्ति की सिफारिश भेजी थी.

हालांकि, राज्य सरकार ने उन्हें नियुक्ति पत्र देने के बजाय एक विशेषज्ञ समिति बना दी और उसी समिति की रिपोर्ट के आधार पर 31 अक्टूबर 2022 को उन्हें अपात्र घोषित कर दिया. हालांकि, बाद में हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से 10 अप्रैल 2023 को उन्हें अस्थायी नियुक्ति दी गई, लेकिन विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार बनाने के बजाय उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त कार्यालय में पदस्थ कर दिया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट को कानूनी रूप से अमान्य ठहराते हुए डॉ. पटेल की अपील स्वीकार कर ली.

अदालत ने 31 अक्टूबर 2022 के अपात्रता आदेश को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह निर्णय की तारीख से तीन सप्ताह के भीतर डॉ. शैलेंद्र कुमार पटेल को छत्तीसगढ़ के किसी भी राज्य विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त करे. इसके साथ ही उन्हें उनके साथ चयनित अन्य उम्मीदवारों की नियुक्ति तिथि से ही वरिष्ठता और सेवा लाभ दिए जाएंगे, हालांकि 10 अप्रैल 2023 से पहले की अवधि का बकाया वेतन नहीं मिलेगा.