SIR in Chhattisgarh।रायपुर। नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने भारत निर्वाचन आयोग को पत्र लिख कर आरोप लगाया है कि, एसआईआर में फॉर्म–7 का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिस पर रोक लगाया जाए।

उन्होंने कहा है कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2025 में मतदाता सूची की शुद्धता हेतु विषेश गहन पुनरीक्षण एसआईआर की प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी। लोकतंत्र के हित में यह कदम स्वागत योग्य हो सकता था – यदि इसके बाद मताधिकार पर सुनियोजित हमला न किया जाता।

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डॉ महंत ने अपने पत्र में लिखा है कि, आज स्थिति यह बन चुकी है SIR पूर्ण होने के बावजूद हर विधानसभा क्षेत्र में वर्ग विशेष के हजारों नागरिकों को मतदाता सूची से बाहर कर दिए जाने का भय सता रहा है जबकि वे वर्षों से लगातार चुनावों में मतदान करते रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने कहा कि, विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने बैठकें लेकर यह रणनीति बनाई कि सभी विधानसभाओं में ऐसे वर्ग  विशेष के मतदाताओं की पहचान की जाय जो भाजपा के मतदाता नहीं हैं और उन मतदाताओं के नाम सूची से विलोपित करवाने के लिए फॉर्म 7 में विवरण भर कर जिला मुख्यालयों में जमा कराया जाय। एक व्यक्ति 5 फार्म भरकर जमा करे और इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक बूथ पर 200 मतदाताओं के नाम विलोपित करवाए जाएं।

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इस तरह के फॉर्म रायपुर भाजपा कार्यालय से भी भेजे जा रहे हैं और यह भी स्पष्ट है कि एक कार्यकर्त्ता 5 लोगों का नाम विलोपित करवा सकता है।

इसी प्रकार बूथ स्तर पर ब्लेंक फॉर्म भरने वाले कार्यकर्त्ताओं को न्यूनतम 100 नाम कटवाने के लिए अघोषित तौर पर अधिकृत किया गया है जिसके लिए उन्हें निर्दश है कि उनको इस बात का विषेश ध्यान रखना चाहिए कि वह मतदाता भाजपा का मतदाता न हो।

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इस प्रकार मोटे तौर पर यह स्थापित हो रहा है कि प्रत्येक विधानसभा से लगभग 20 हजार वर्ग विशेष के मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है।ल

नेता प्रतिपक्ष  ने कहा है कि, यह अत्यंत गंभीर, दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतंत्र-विरोधी तथ्य है कि यह पूरा अभियान फॉर्म-7 के नाम पर चलाया जा रहा है। जहाँ किसी भी व्यक्ति द्वारा ”शिकायत“ भर कर यह कहा जा रहा है कि ”फलाँ व्यक्ति यहाँ नहीं रहता/कहीं और स्थायी रूप से चला गया है“, और प्रशासन बिना पर्याप्त सत्यापन के वैध मतदाताओं का नाम काटने की तैयारी कर रहा है। यह ”वोटर लिस्ट की सफाई“ नहीं- बल्कि ”वोटर लिस्ट की सफाया“ जैसा प्रतीत हो रहा है।

नेता प्रतिपक्ष डॉ महंत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि, नाम काटने/कटवाने की यह कार्रवाई ”संयोग“ नहीं, बल्कि एक सोची-समझी ‘लक्षित’ रणनीति है, जिससे  विशेष समुदाय एवं  विशेष  धर्म के मतदाताओं को चिन्हित किया जा रहा है।

 

नेता प्रतिपक्ष  ने आरोप लगाते हुए कहा है कि, SIR के नाम पर..

1, संविधान के अनुच्छेद 326 के सार्वभौमिक मताधिकार पर सीधा प्रहार है।

2, लोकतंत्र की मूल आत्मा पर हमला है।

3, निश्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है।

4, संस्थागत तटस्थता को ठेस पहुंचाने वाली कार्यवाही है। यह ”प्रषासनिक प्रक्रिया“ नहीं, बल्कि ”लोकतंत्र की रीढ़ तोड़ने“ जैसा संकट है।

नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने  भारत निर्वाचन आयोग से मैं मांग की है कि –

1.फॉर्म-7 आधारित इस प्रकार की ”लक्षित“ प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।

2.वर्ष 2003 अथवा उससे पूर्व से दर्ज, निरंतर मतदान कर रहे मतदाताओं अथवा उनके परिजनों के नाम ”संदेह के आधार“ पर हटाने की कार्रवाई पूर्णतः बंद की जाए।

3.किसी भी आवेदन को स्वीकार करने से पहले आवेदनकर्त्ता की पहचान, कारण, साक्ष्य एवं मंषा की विधिवत जांच अनिवार्य की जाए।

4.यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी समुदाय/धर्म/समूह के मतदाताओं के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार न हो।

5.मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को पारदर्षी बनाने हेतु प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में निगरानी/ऑडिट टीम गठित की जाए तथा सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की जाए।

डॉ महंत ने कहा कि, आम नागरिक इस तथ्य से भलीभांति अवगत हैं कि देश का लोकतंत्र ”चुपचाप नाम काटने“ से नहीं चलता। यदि आज एक-एक मतदाता को जानबूझकर डराकर, उलझाकर उसके अधिकार छीने गए- तो कल चुनाव की निश्पक्षता और जनादेश की पवित्रता दोनों पर आंच आएगी।

नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत ने अपेक्षा की है कि, भारत निर्वाचन आयोग देश के लोकतांत्रिक भविष्य पर मंडराते खतरे पर तत्काल हस्तक्षेप करेगा।