sikar jeenmata shaktipeeth/राजस्थान के सीकर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ जीणमाताजी मंदिर में शारदीय नवरात्रि की धूम शुरू हो गई है। पहले दिन मां जीण भवानी का शैलपुत्री के रूप में विशेष शृंगार किया गया, जिसके लिए जयपुर से विशेष पोशाक और कोलकाता से चटक लाल रंग का जरी बेस मंगाया गया। मंदिर के पुजारी भवानी शंकर ने बताया कि तड़के 4 बजे मंगला आरती के बाद 21 पंडितों के मंत्रोच्चार के साथ कलश स्थापना की गई और मां को पंचामृत से स्नान कराया गया। नवरात्र के साथ ही लख्खी मेले का आगाज हो गया है, जहां लाखों श्रद्धालु कुलदेवी के दर्शन कर मनौती मांग रहे हैं।

sikar jeenmata shaktipeeth/जीणमाताजी मंदिर के पुजारी भवानी शंकर ने कहा, “शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन की पूजा यहां हो रही है। सुबह चार बजे मंगल आरती के साथ ही श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए यहां पहुंच रहे हैं। सुबह आठ बजे मां का श्रृंगार किया गया, जिसमें उन्हें विशेष पोशाक पहनाई गई। ये विशेष पोशाक जयपुर से मंगाई गई। कलकत्ता से जरी का बेस मंगाया गया, जो चटक लाल रंग का था। इसके साथ ही मां को पंचामृत से स्नान कराया गया। 21 पंडितों के द्वारा मंत्रोच्चार के साथ कलश स्थापना की गई।”

उन्होंने कहा कि लाखों दर्शनार्थी अपनी मनौती लेकर यहां आ रहे हैं। आज मां शैलपुत्री के रूप में सभी भक्तों को दर्शन दे रही है। महाआरती के बाद मां को फलों का भोग लगाया गया, जिसे बाद में भक्तों में बांट दिया गया।

sikar jeenmata shaktipeeth/खंडेला विधायक सुभाष मील ने कहा कि माता के दरबार में आकर मां के दर्शन किए। आज से नवरात्र प्रारंभ हो गया है, इसलिए घटस्थापना और पूजा-अर्चना करके माता के दर्शन किए हैं। पूरे क्षेत्र के लोगों के जीवन में खुशहाली और आनंद आए, वे स्वस्थ रहें, ऐसी कामना लेकर हम वहां पहुंचे थे।

इंदौर से आई एक श्रद्धालु ने कहा कि ये हमारी कुलदेवी हैं और हमारे परिवार में जन्म से लेकर हर चीज में इन्हें ही हम अपना कुलदेवी मानते हैं। उनका आशीर्वाद हम पर सदा बना रहता है। हमें यहां आते हुए 50 साल हो गए। हमारी हर पीढ़ी यहीं आती है।

प्रसिद्ध शक्तिपीठ के रूप में पूरे देश में विख्यात प्राचीन जीणमाता मंदिर राजस्थान के सीकर जिले के नजदीक जीणमाताजी गांव की अरावली पर्वतमाला की तीन पहाड़ियों के बीच बना हुआ है। मां जीण भवानी की शक्ति, भक्ति और चमत्कारों के कारण जीणमाताजी मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था भी लगातार बढ़ती जा रही है।

आज पूरे देश-विदेश से प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु जीणमाता जी धाम पहुंचकर मां जीण के दरबार में शीश नवाकर अपनी मनोकामना पूरी करने की मनौती मांगते हैं। मंदिर की बड़ी मान्यता यह भी है कि मां जीण भवानी के दर्शन करने मात्र से ही कुष्ठरोग भी ठीक हो जाता है।

sikar jeenmata shaktipeeth/श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु सिर पर जलते कोयले की सिगड़ी रखकर या पैदल ही मां जीण भवानी की ध्वजा लेकर जीण धाम मंदिर तक पहुंचते हैं। जीण माता मंदिर जीण और हर्ष दोनों भाई-बहन के प्रेम और अटूट रिश्ते के रूप में भी जाना जाता है।

नवरात्रों में जीणमाता की प्रतिमा का विशेष पोशाक और कोलकाता व कन्नौज सहित अन्य जगह से मंगाई गए रंग-बिरंगे फूलों से शृंगार किया जाता है। नवरात्रों में लख्खी मेले के दौरान देशभर के अलग-अलग हिस्सों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु शक्तिपीठ जीण धाम पहुंचकर माता के दरबार में शीश नवाते हैं।