बिलासपुर…सात साल से हवाई सुविधा के विस्तार की मांग, आंदोलन के कई दौर और अब प्रधानमंत्री को पत्र। इसके बावजूद बिलासपुर का बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट बड़े विमानों की उड़ान के लिहाज से तैयार नहीं हो सका है। इसी मुद्दे पर हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति ने कलेक्टोरेट का घेराव कर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने एयरपोर्ट को 4सी श्रेणी में विकसित करने के लिए 300 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान देने और केंद्र सरकार से ठोस निर्णय लेने की मांग की।

आंदोलन की सातवीं वर्षगांठ पर समिति ने प्रतीकात्मक रूप से उल्टा मार्च भी निकाला। समिति का कहना है कि बिलासपुर प्रदेश का दूसरा प्रमुख शहर है, जहां उच्च न्यायालय, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का मुख्यालय, एसईसीएल और गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान हैं। इसके बावजूद हवाई संपर्क के मामले में शहर को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पाई है। प्रदर्शन के दौरान सुदीप श्रीवास्तव, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, वरिष्ठ कांग्रेस नेता विजय केशरवानी और विजय पांडे सहित अन्य लोग मौजूद रहे। नेताओं ने पत्रकारों से बातचीत में हवाई सेवाओं के विस्तार को लेकर केंद्र सरकार की उदासीनता पर सवाल उठाए। प्रदर्शन के दौरान कलेक्टोरेट के सामने कुछ समय तक यातायात भी प्रभावित रहा।

3सी एयरपोर्ट से आगे बढ़ने की मांग

समिति का कहना है कि सात साल के जन आंदोलन के बाद बिलासपुर में 3सी श्रेणी का एयरपोर्ट तो तैयार हुआ, लेकिन यहां उड़ानों का दायरा सीमित है। छोटे एटीआर विमानों पर निर्भरता के कारण बड़े शहरों से हवाई संपर्क और उड़ानों के विस्तार की संभावनाएं बाधित हैं। समिति अब रनवे को मौजूदा करीब 1500 मीटर से बढ़ाकर 2800 मीटर करने, स्थायी हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) टावर बनाने और आधुनिक टर्मिनल भवन के निर्माण की मांग कर रही है। उसके मुताबिक, इन कार्यों के लिए करीब 300 करोड़ रुपये की जरूरत है और रनवे विस्तार के लिए आवश्यक भूमि भी उपलब्ध है।

प्रधानमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की मांग

संघर्ष समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में दो विकल्प रखे हैं। केंद्र सरकार बिलासपुर एयरपोर्ट के उन्नयन के लिए 300 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान स्वीकृत करे या राज्य सरकार को दो साल की समय-सीमा देकर 4सी श्रेणी के अनुरूप विकास कार्य पूरा कराने के निर्देश दे। समिति ने अपने पत्र में छत्तीसगढ़ से मिलने वाले कोयला राजस्व, ऊर्जा उत्पादन और रेलवे के माल परिवहन से होने वाली आर्थिक गतिविधियों का हवाला देते हुए कहा है कि बिलासपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को बेहतर हवाई सुविधा मिलनी चाहिए।

समिति ने रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदेश में फिलहाल बड़े विमानों के संचालन के लिए 4सी श्रेणी की सुविधा वहीं उपलब्ध है। बिलासपुर में भी रनवे विस्तार और जरूरी आधारभूत ढांचे के निर्माण से बड़े विमानों के संचालन का रास्ता खुल सकता है।

मांग से आगे अब समय-सीमा का सवाल

सात साल से चल रहे आंदोलन के बीच अब सवाल सिर्फ एयरपोर्ट के विस्तार का नहीं, बल्कि निर्णय और निर्माण की समय-सीमा का भी है। समिति चाहती है कि केंद्र और राज्य सरकार जिम्मेदारी तय कर परियोजना को आगे बढ़ाएं। कलेक्टोरेट में प्रदर्शन और प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र के जरिए उसने हवाई सुविधा के मुद्दे को फिर सामने रखा है। अब देखना होगा कि इस मांग पर सरकार की ओर से कोई ठोस पहल होती है या बिलासपुर को बड़े विमानों की उड़ान के लिए अभी और इंतजार करना पड़ता है।