Gold Silver Price।दिल्ली।सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए सर्राफा बाजार से बड़ी खबर है। बीते सप्ताह घरेलू वायदा बाजार में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। सोना करीब 4 प्रतिशत टूट गया, जबकि चांदी की कीमत में 7 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई।

बाजार में बिकवाली के पीछे महंगे कच्चे तेल, डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी जैसे वैश्विक कारकों को जिम्मेदार माना जा रहा है।

अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर है, जिनसे सोने-चांदी की अगली चाल प्रभावित हो सकती है।

घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में दिसंबर डिलीवरी वाला सोना बीते सप्ताह 5,768 रुपये यानी करीब 4 प्रतिशत गिरकर लगभग 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।

चांदी में इससे भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसके भाव में 15,087 रुपये यानी करीब 7.14 प्रतिशत की कमी आई और कीमत लगभग 1.96 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई।

इस गिरावट के साथ चांदी 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे फिसल गई। ये आंकड़े वायदा बाजार के हैं, इसलिए इन्हें स्थानीय सर्राफा दुकानों पर मिलने वाले खुदरा भाव के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने-चांदी पर दबाव बना रहा। कॉमेक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना करीब 4.14 प्रतिशत गिरकर 4,007.9 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। शुक्रवार के कारोबार में इसकी कीमत एक समय 3,989 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी। वहीं, वैश्विक बाजार में चांदी लगभग 6 प्रतिशत टूटकर 53.95 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

Gold Silver Price।कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट की एक प्रमुख वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है। उपलब्ध बाजार जानकारी के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था।

तेल महंगा होने से परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है, जिससे महंगाई पर दबाव पड़ता है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकते हैं। ऊंची ब्याज दरें और मजबूत डॉलर सोने जैसी ऐसी परिसंपत्तियों के आकर्षण को कम कर सकते हैं, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता।

LKP Securities के रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में मजबूती के कारण सोने को निचले स्तरों पर भी पर्याप्त सहारा नहीं मिल पा रहा है।

वहीं, JM Financial Services के प्रणव मेर ने चांदी की गिरावट के पीछे औद्योगिक धातुओं में कमजोरी और ऊंची कीमतों के कारण मांग में नरमी को अहम वजह बताया है। चांदी का इस्तेमाल आभूषणों के अलावा कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है, इसलिए औद्योगिक मांग में बदलाव इसकी कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

अब बाजार की निगाहें 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी हैं। फेड की ब्याज दर संबंधी नीति और उसके प्रमुख अधिकारियों की टिप्पणियों से यह संकेत मिल सकता है कि आने वाले समय में मौद्रिक नीति का रुख कैसा रहेगा।

यदि फेड महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाता है और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ती है, तो डॉलर तथा बॉन्ड यील्ड को समर्थन मिल सकता है। ऐसी स्थिति में सोने-चांदी पर दबाव बढ़ने की आशंका रहेगी। इसके विपरीत, नरम रुख से कीमती धातुओं को राहत मिल सकती है।

इस सप्ताह यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान के फैसलों के साथ अमेरिका के महंगाई संबंधी आंकड़ों, तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और उपभोक्ता विश्वास से जुड़े आंकड़ों पर भी बाजार की नजर रहेगी।

इन संकेतकों से वैश्विक अर्थव्यवस्था, ब्याज दरों और डॉलर की दिशा को लेकर निवेशकों की उम्मीदें प्रभावित हो सकती हैं।

ऐसे में सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए यह समझना जरूरी है कि हालिया गिरावट के बावजूद कीमतें आगे किस दिशा में जाएंगी, इसकी निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। आभूषण खरीदने वालों को स्थानीय खुदरा भाव, शुद्धता, मेकिंग चार्ज और अन्य लागू शुल्क की तुलना करनी चाहिए।