छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर भिलाई में दो अलग-अलग घटनाओं में दो छात्रों द्वारा आत्महत्या करने का हृदयविदारक मामला सामने आया है। इन घटनाओं ने पूरे दुर्ग जिले को स्तब्ध कर दिया है। जान गंवाने वाले दोनों छात्र अपने भविष्य को संवारने की कोशिशों में जुटे थे, लेकिन उनके इस आत्मघाती कदम ने पीछे कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं। पुलिस ने दोनों मामलों में मर्ग कायम कर गहन जांच शुरू कर दी है।

पहली दुखद घटना भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) के एक कर्मचारी के बेटे दीपांशु वर्मा से जुड़ी है।

दीपांशु ने अपनी बीएससी की पढ़ाई पूरी कर ली थी और वह उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। उसका शव भिलाई के ही एक बंद पड़े बीएसपी स्कूल परिसर में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिला।

पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें दीपांशु ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा है, “मुझसे इतनी नफरत के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरे शरीर को दफनाया नहीं जाना चाहिए, इसका अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए।” हालांकि, नोट में उसने किसी विशेष व्यक्ति पर आरोप नहीं लगाया है। परिजनों के अनुसार, घटना वाले दिन सुबह दीपांशु ने अपनी मां से 100 रुपये मांगे थे, लेकिन मां नींद में होने के कारण उसकी बात ठीक से सुन नहीं पाई थीं। देर रात तक घर न लौटने पर परिजनों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद तलाशी के दौरान उसका शव मिला।

दूसरी घटना भिलाई के सेक्टर-7 स्थित महाराणा प्रताप भवन छात्रावास की है। यहां कबीरधाम जिले के पंडरिया निवासी 19 वर्षीय निखिल पौसार्य ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। निखिल भिलाई के साईं महाविद्यालय में बीएससी बायो का छात्र था और पिछले एक साल से इसी छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रहा था।

रविवार की सुबह जब काफी देर तक निखिल के कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो उसके दोस्तों ने छात्रावास प्रबंधन को सूचित किया। कमरे का दरवाजा तोड़ने पर अंदर निखिल का शव मिला। वह कमरे में अकेला ही रहता था, जिससे शुरुआती तौर पर आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस छात्रावास के अन्य छात्रों और परिजनों से पूछताछ कर मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है।