रायपुर: (मनीष जायसवाल) गर्मी की छुट्टियों के बाद 15 जून से प्रदेश के सरकारी स्कूल फिर से आबाद होने जा रहे हैं। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत को खास बनाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग व्यापक तैयारियां कर रहा है। शाला प्रवेश उत्सव में पहली बार नई किताबें और मुफ्त गणवेश भी पहले दिन से उपलब्ध कराने की तैयारी है..। बच्चों का स्वागत होगा, स्कूलों में रौनक लौटेगी और पढ़ाई का नया अध्याय शुरू होगा..। लेकिन इन तैयारियों के बीच एक सवाल भी खड़ा है… क्या मौसम भी स्कूल खुलने के लिए तैयार है…?

मौसम विभाग के अनुमान बताते हैं कि 15 जून से 17 जून तक प्रदेश के कई मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान 39 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है..। बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और आसपास के क्षेत्रों में पारा 40 डिग्री के आसपास बने रहने की संभावना जताई गई है..। 18 जून के बाद तापमान में धीरे-धीरे कमी आने के संकेत हैं, लेकिन तब भी अधिकतम तापमान 36 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। 20 और 21 जून तक कुछ इलाकों में तापमान 33 से 37 डिग्री तक पहुंच सकता है।

यानी राहत के संकेत जरूर हैं, लेकिन स्कूल खुलने के पहले सप्ताह में गर्मी पूरी तरह विदा होती दिखाई नहीं दे रही..। बारिश की संभावना भी है, पर उसके साथ उमस बढ़ने की आशंका है। ऐसे मौसम में दोपहर का समय बच्चों के लिए सबसे ज्यादा मुश्किल भरा हो सकता है..। यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदेश में बिजली की आंख-मिचौली भी जारी है। ऐसे में केवल पंखों के भरोसे कक्षाओं के भीतर बच्चों को कितनी राहत मिल पाएगी, यह भी एक बड़ा सवाल है..।

इधर पड़ोसी राज्यों में भी मौसम को लेकर चिंता दिखाई दे रही है। मध्य प्रदेश में 21 जून से स्कूल खोलने की खबरें सामने आई हैं। महाराष्ट्र में भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूलों के खुलने की तारीख आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है..। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार विदर्भ क्षेत्र में 42 से 44 डिग्री तापमान दर्ज होने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए थे।

इस बीच राहत की बात यह है कि प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने भी मीडिया से चर्चा के दौरान मौसम की स्थिति को देखते हुए स्कूलों के संचालन समय में बदलाव की संभावना के संकेत दिए हैं..। हालांकि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है..। लेकिन प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग छात्र हित और कर्मचारी हित से जुड़े कई मामलों में अक्सर अनिर्णय की स्थिति में रहा है…। ऐसे में फिलहाल किसी बड़े फैसले की उम्मीद भी कम दिखाई देती है..!

वही दिलचस्प बात यह है कि इसी वर्ष मई महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईधन संबंधी चिंताओं के बीच एक व्यावहारिक सुझाव दिया था..। उन्होंने कहा था कि जहां संभव हो, वहां कोविड काल की तरह वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन बैठकें और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को बढ़ावा दिया जा सकता है। उनका मानना था कि इससे पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी और देश पर आर्थिक दबाव भी घटेगा।

यदि इसी सोच को शिक्षा व्यवस्था के संदर्भ में देखें तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या भीषण गर्मी वाले इन शुरुआती दिनों के लिए कुछ वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार नहीं किया जा सकता..? प्रदेश में स्कूल खुलने के साथ ही करीब दो लाख शिक्षक और कर्मचारी रोजाना आवागमन करेंगे। लाखों विद्यार्थियों का भी स्कूल आना-जाना शुरू होगा..। ऐसे में ईधन की खपत बढ़ना तय है..। दूसरी ओर मौसम विभाग लगातार गर्मी और उमस बने रहने की संभावना जता रहा है।

जब 20 से 21 जून के बाद मौसम के अपेक्षाकृत अनुकूल होने की संभावना जताई जा रही है, तब यह सवाल भी उठता है कि क्या स्कूलों को कुछ दिन बाद शुरू करने के विकल्प पर विचार नहीं किया जा सकता..? इससे बच्चों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी, ईधन की खपत भी कम होगी और नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत अपेक्षाकृत बेहतर मौसम में हो सकेगी..।