Sachin Pilot Punjab In charge/छत्तीसगढ़ की राजनीति के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ कांग्रेस आलाकमान ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ कांग्रेस का नया प्रभारी नियुक्त किया है। यह निर्णय राज्य में पार्टी की जड़ों को और मजबूत करने और आगामी चुनौतियों से निपटने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

वहीं, विवादों की पृष्ठभूमि में भूपेश बघेल को पंजाब प्रभारी के पद से हटा दिया गया है और उनकी जगह छत्तीसगढ़ के पूर्व प्रभारी सचिन पायलट को पंजाब की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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छत्तीसगढ़ की कमान संभालने जा रहे सुखदेव भगत वर्तमान में झारखंड के लोहरदगा से कांग्रेस सांसद हैं और संगठन में एक सुलझे हुए नेता के रूप में जाने जाते हैं। 22 अक्टूबर 1960 को लोहरदगा में जन्मे भगत की शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत है; उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए की शिक्षा प्राप्त की है।

राजनीति के मैदान में कदम रखने से पहले वे राज्य प्रशासनिक सेवा में एक अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे थे। जनसेवा के जज्बे के चलते उन्होंने वर्ष 2005 में सरकारी नौकरी छोड़कर सक्रिय राजनीति का रुख किया और पहली बार लोहरदगा से विधायक निर्वाचित हुए।

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भगत का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है, जिसने उन्हें एक अनुभवी रणनीतिकार बनाया है। मई 2013 में उन्हें झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। वे कई बार विधानसभा के सदस्य रहे। हालांकि, 2019 में उन्होंने कुछ समय के लिए भाजपा का दामन थामा था, लेकिन जल्द ही उनका मन बदला और जनवरी 2022 में वे वापस कांग्रेस में लौट आए। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन पर भरोसा जताते हुए लोहरदगा से उम्मीदवार बनाया, जहाँ उन्होंने शानदार जीत दर्ज कर पहली बार संसद तक का सफर तय किया।

संगठन में उनकी बढ़ती साख को देखते हुए वर्ष 2025 में उन्हें झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे महत्वपूर्ण राज्यों से जुड़ी संसदीय जिम्मेदारी दी गई थी और अप्रैल 2025 में उन्हें AICC ऑब्जर्वर भी नियुक्त किया गया था।

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सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर दी गई है, जब पार्टी प्रदेश में बूथ स्तर तक संगठन को पुनर्जीवित करने और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। हालांकि सचिन पायलट के कार्यकाल में संगठन के भीतर कई सुधार कार्य किए गए, लेकिन अब नए प्रभारी के सामने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बिठाने की कड़ी चुनौती होगी। आगामी चुनावों को देखते हुए भगत का प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ पार्टी के लिए ‘तुरुप का इक्का’ साबित हो सकती है।

माना जा रहा है कि इस बदलाव के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस की चुनावी रणनीति में आमूल-चूल परिवर्तन देखने को मिलेंगे। सुखदेव भगत जल्द ही प्रदेश के दिग्गज नेताओं के साथ बैठक कर वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय समीकरणों की समीक्षा कर सकते हैं। पार्टी का मुख्य फोकस अब संगठन को केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर सक्रिय करने पर है। राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो नए प्रभारी की नियुक्ति केवल एक शुरुआत है, आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे में और भी कई महत्वपूर्ण बदलाव और नई नियुक्तियां देखने को मिल सकती हैं.