Cg news।छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में गंभीर आपराधिक मामलों में जेल जा चुके तीन शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को लेकर सवाल उठे हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने आरोप लगाया है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) उदयपुर और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय की कथित लापरवाही के कारण शिक्षकों के विरुद्ध समय पर कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कलेक्टर को शिकायत देकर पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार शिक्षकों के साथ संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, तीनों शिक्षक अलग-अलग अवधि तक जेल में रहे, लेकिन उनके विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई जेल से बाहर आने और जमानत मिलने के बाद की गई।

शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि जेल में रहने के दौरान उनकी अनुपस्थिति और आपराधिक मामलों की जानकारी विभाग को थी या नहीं। हालांकि, अधिकारियों की भूमिका और कथित लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

हत्या के प्रयास के मामले में प्रधान पाठक को पांच साल की सजा

शिकायत में विजय कुमार यादव का मामला प्रमुखता से उठाया गया है। यादव शासकीय प्राथमिक शाला पेण्डरखी, उदयपुर में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ हैं।

शिकायत के मुताबिक, सरगुजा के मणीपुर थाने में वर्ष 2019 में दर्ज हत्या के प्रयास के मामले में दोषसिद्धि के बाद न्यायालय ने 3 जनवरी 2026 को उन्हें पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। वह 3 जनवरी से 9 अक्टूबर 2026 तक जेल में रहे। इसके बाद उन्होंने सजा के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर में अपील दायर की और जमानत पर रिहा हुए।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, सरगुजा-अंबिकापुर ने 22 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के माध्यम से विजय कुमार यादव को शासकीय सेवा से निलंबित किया।

आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि सजा सुनाए जाने के बाद भी करीब नौ महीने तक उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की गई और अपील तथा जमानत मिलने तक विभागीय कार्रवाई लंबित क्यों रही।

बीईओ और डीईओ की भूमिका पर उठाए सवाल

परवेज आलम गांधी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि विजय कुमार यादव के विरुद्ध वर्ष 2019 में अपराध दर्ज होने और गिरफ्तारी की जानकारी के बावजूद उस समय विभागीय कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 3 जनवरी 2026 को सजा सुनाए जाने के बाद भी संबंधित अधिकारियों ने लंबे समय तक कार्रवाई क्यों नहीं की। शिकायतकर्ता के अनुसार, यदि विभाग को समय पर जानकारी मिल गई थी, तो कार्रवाई में देरी की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिक्षक को अपील और जमानत मिलने तक निलंबन की कार्रवाई से बचाए रखा गया। शिकायतकर्ता ने इस अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने पर भी सवाल उठाते हुए सरकारी धन के संभावित नुकसान की जांच कराने की मांग की है। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

दो अन्य शिक्षकों के मामलों में भी कार्रवाई पर सवाल

शिकायत में राजकुमार टोप्पो और त्रिपाल टोप्पो के मामलों का भी उल्लेख किया गया है। राजकुमार टोप्पो शासकीय प्राथमिक शाला कटघोरिया पारा, उदयपुर में प्रधान पाठक हैं। शिकायत के अनुसार, वह 20 जुलाई 2026 से 1 अक्टूबर 2026 तक कुल 73 दिन पुलिस अभिरक्षा में रहे। वहीं, शासकीय प्राथमिक शाला जरहाडीह, उदयपुर में पदस्थ सहायक शिक्षक एलबी त्रिपाल टोप्पो 31 अगस्त से 6 अक्टूबर 2026 तक कुल 37 दिन पुलिस अभिरक्षा में रहे।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि दोनों शिक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई जमानत पर रिहा होने के बाद की गई। उन्होंने सवाल उठाया है कि संबंधित अवधि में शिक्षकों की लंबी अनुपस्थिति पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने संज्ञान क्यों नहीं लिया।

उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि अधिकारियों को मामले की जानकारी थी, तो यह जांच की जाए कि कार्रवाई में देरी किन परिस्थितियों में हुई।

कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग

सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने कलेक्टर से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, शिक्षकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का आग्रह किया है। शिकायत में यह भी मांग की गई है कि यदि किसी अधिकारी की भूमिका जानबूझकर कार्रवाई टालने या जानकारी छिपाने में पाई जाती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

फिलहाल, यह मामला शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और विभागीय कार्रवाई में देरी से जुड़े सवालों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष तथा शिकायत पर प्रशासन की ओर से की जाने वाली कार्रवाई सामने आने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।