रांची: झारखंड सहित देशभर के प्राथमिक शिक्षकों के बीच हड़कंप मच गया है। केंद्र सरकार द्वारा ‘फ्री एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE), 2009′ के लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिए जाने के विरोध में शिक्षकों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

‘टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के आह्वान पर आगामी 4 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक विशाल विरोध रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें झारखंड से भी बड़ी संख्या में प्राथमिक शिक्षक भाग लेंगे।

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क्या है विवाद की जड़?

​विवाद की मुख्य वजह सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का एक हालिया आदेश है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि RTE कानून के तहत सभी प्राथमिक शिक्षकों के लिए, चाहे उनकी नियुक्ति कभी भी हुई हो, TET उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।

जिन शिक्षकों ने अभी तक यह पात्रता परीक्षा पास नहीं की है, उन्हें इसके लिए दो वर्ष का समय दिया गया है। इस आदेश के बाद उन वरिष्ठ शिक्षकों के सामने सेवा-निरंतरता का संकट खड़ा हो गया है जो दशकों से पढ़ा रहे हैं।

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“पूर्व की तिथि से कानून लागू करना गलत”

​शिक्षकों का तर्क है कि जब उनकी नियुक्ति हुई थी, तब TET जैसी कोई परीक्षा अस्तित्व में नहीं थी। ‘टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा और राष्ट्रीय महासचिव राम मूर्ति ठाकुर ने इस कदम को वैधानिक रूप से गलत बताया है। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून के तहत निर्धारित न्यूनतम योग्यता को उस कानून के लागू होने के पहले की तिथि से लागू नहीं किया जा सकता।

केंद्रीय मंत्री के आश्वासन के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं

​फेडरेशन के नेताओं ने जानकारी दी कि दिसंबर 2025 में एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मिलकर इस मुद्दे पर विस्तार से शिक्षकों का पक्ष रखा था। उस समय केंद्रीय मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया था कि शिक्षकों के हितों की रक्षा की जाएगी और कोर्ट के फैसले की समीक्षा कर वैधानिक तरीके से हल निकाला जाएगा।

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​इसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने प्रारंभिक पहल करते हुए सभी राज्यों से प्रभावित शिक्षकों की संख्या और उनके मंतव्य मांगे थे। लेकिन, महीनों बीत जाने के बाद भी अब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस वैधानिक कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे शिक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

रांची में एकजुट हुए शिक्षक, दिल्ली कूच की तैयारी

​झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के नेताओं ने रांची में एक बैठक कर दिल्ली रैली की रणनीतियों पर चर्चा की। शिक्षकों का कहना है कि यह उनकी प्रतिष्ठा और सेवा से जुड़ा मामला है। हजारों वरिष्ठ शिक्षक, जिन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा को समर्पित कर दिया, अब इस नए नियम के कारण मानसिक तनाव में हैं। फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि 4 अप्रैल की रैली के बाद भी सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।