रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों भाजपा संगठन की गतिविधियों और सरकार के कामकाज की समीक्षा को लेकर चर्चाएं तेज हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का 22 और 23 अक्टूबर का छत्तीसगढ़ दौरा पूरा होने के बाद अब भाजपा की नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी 25 और 26 अक्टूबर को रायपुर प्रवास पर रहेंगी।

उनके दौरे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों, विधायकों और संगठन पदाधिकारियों के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में इस बात पर नजर है कि संगठन की समीक्षा के दौरान किन मुद्दों पर चर्चा होती है और इसका राज्य भाजपा की आगामी रणनीति पर क्या असर पड़ता है।

स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ का प्रदेश प्रभारी बनाए जाने के बाद यह उनका पहला प्रमुख संगठनात्मक दौरा है। उनके साथ सह प्रभारी सिद्धार्थ शंभू भी रहेंगे।

दौरे में पार्टी संगठन की स्थिति, आगामी कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, इस दौरे के दौरान मंत्रिमंडल में फेरबदल या किसी मंत्री को हटाने का निर्णय होगा, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 22 अक्टूबर को रायपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। 23 अक्टूबर को वह बस्तर दशहरा के अवसर पर जगदलपुर पहुंचीं, जहां मुरिया दरबार से जुड़े कार्यक्रम में शामिल हुईं। उनके दौरे के बाद अब राजनीतिक गतिविधियों का ध्यान भाजपा के संगठनात्मक कार्यक्रमों पर केंद्रित है।

स्मृति ईरानी के प्रवास के दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण देव, संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, दोनों उपमुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों सहित पार्टी के प्रमुख नेताओं के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं। इन बैठकों में संगठनात्मक कामकाज और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की समीक्षा महत्वपूर्ण विषय रहेंगे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा संगठन में नेताओं की सोशल मीडिया सक्रियता और केंद्र तथा राज्य सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार को लेकर भी समीक्षा की तैयारी है। इसमें पार्टी नेताओं के सोशल मीडिया हैंडल पर सरकारी योजनाओं से संबंधित गतिविधियों और संगठन के संदेशों के प्रचार को महत्व दिए जाने की चर्चा है।

यदि इस तरह की समीक्षा होती है, तो इसका उद्देश्य पार्टी के जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों का आकलन करना हो सकता है।

हालांकि, नेताओं की सोशल मीडिया गतिविधियों पर किसी विशेष डिजिटल रिपोर्ट कार्ड, व्यक्तिगत ब्रांडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध या दिल्ली स्थित कार्यालय से जारी कथित गोपनीय निर्देश के सभी विवरणों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन दावों को स्थापित तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बिलासपुर प्रवास को भी राजनीतिक चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, संघ की ओर से छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रियों के कामकाज पर किसी कथित गोपनीय रिपोर्ट या उसके आधार पर कार्रवाई की पुष्टि सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। ऐसे में संघ की समीक्षा और स्मृति ईरानी के दौरे के बीच सीधे संबंध का दावा करना फिलहाल अटकल ही होगा।

स्मृति ईरानी के दौरे से पहले और उसके दौरान होने वाली बैठकों के बीच मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो सकती हैं। राज्य में मंत्रियों के प्रदर्शन, संगठन के साथ समन्वय और आगामी चुनावों की तैयारियों जैसे मुद्दे राजनीतिक विश्लेषण का हिस्सा हैं।

लेकिन चार या पांच मंत्रियों को हटाए जाने, नए चेहरों को शामिल करने या मंत्रिमंडल में बदलाव की समय-सीमा को लेकर फिलहाल कोई पुष्ट आधिकारिक जानकारी नहीं है।

इसलिए 25 और 26 अक्टूबर का दौरा भाजपा के संगठनात्मक कामकाज और आगामी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इसे मंत्रिमंडल में बदलाव का निश्चित संकेत कहना जल्दबाजी होगी।