रामानुजगंज (पृथ्वी लाल केशरी)… सरकारी दफ्तर जनता की समस्याएं सुनने और शासकीय कामकाज निपटाने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन रामानुजगंज के जल संसाधन विभाग का कार्यालय इन बुनियादी उद्देश्यों से ही दूर नजर आ रहा है। यहां कार्यालय के कमरों पर ताले लटके रहने और अधिकारी-कर्मचारियों के मुख्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। करोड़ों रुपये की कथित गड़बड़ी के मामले में पहले ही चर्चा में रहे इस विभाग की कार्यप्रणाली अब एक अलग वजह से सवालों के घेरे में है। जिला बनने के बाद भी कार्यालय के संचालन में अपेक्षित सुधार नहीं दिखने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

स्थिति यह है कि कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को कमरों में ताले नजर आते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी अंबिकापुर में रहना पसंद करते हैं और उनके अधीनस्थ कर्मचारी भी नियमित रूप से कार्यालय में उपलब्ध नहीं रहते। ऐसे में रामानुजगंज का यह कार्यालय अपने ही मुख्यालय में कितना सक्रिय है, यह सवाल उठना लाजिमी है। जनप्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों की निगरानी के बावजूद यदि यही स्थिति बनी हुई है, तो जवाबदेही तय करने की जरूरत और बढ़ जाती है।

करोड़ों की गड़बड़ी के मामले के बाद भी सवाल बरकरार

जल संसाधन विभाग का विवाद केवल कार्यालय में उपस्थिति तक सीमित नहीं है। कार्यालय के पूर्व प्रभारी कार्यपालन यंत्री, एसडीओ और सब इंजीनियर के खिलाफ करोड़ों रुपये की गड़बड़ी के मामले में अपराध दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद भी विभागीय कामकाज की व्यवस्था में कितना बदलाव आया, इस पर सवाल बने हुए हैं। नवपदस्थ कार्यपालन अभियंता एन.पी. डहरिया, जिनका मूल पद एसडीओ बताया गया है, की कार्यालय में नियमित उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों और विभागीय प्रकरणों की मौजूदा स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

मुख्यालय रामानुजगंज, कामकाज अंबिकापुर से

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी-कर्मचारी अंबिकापुर में निवास करते हैं और रामानुजगंज स्थित कार्यालय पर ताला लगाकर विभागीय कामकाज वहीं से निपटाया जाता है। कंप्यूटर ऑपरेटर से जुड़े काम हों या ठेकेदारों के भुगतान के लिए चेक काटने की प्रक्रिया, इनके भी अंबिकापुर से संचालित होने का दावा किया जा रहा है। यदि यह स्थिति सही है, तो सवाल केवल अधिकारियों की उपस्थिति का नहीं, बल्कि कार्यालय संचालन, वित्तीय प्रक्रिया और प्रशासनिक नियंत्रण का भी है।

सरकारी कार्यालय का मुख्यालय किसी औपचारिक पते भर का नाम नहीं होता। वहां अधिकारियों की उपलब्धता, अभिलेखों का रखरखाव, जनसमस्याओं का निराकरण और शासकीय कार्यों की पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। ऐसे में यदि रामानुजगंज का कार्यालय नियमित रूप से बंद रहता है और कामकाज दूसरे शहर से संचालित होता है, तो इसकी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

जिम्मेदारी किसकी, जवाब देगा कौन?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि कार्यालय में अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? यदि मुख्यालय में नियमित उपस्थिति नहीं हो रही, तो निरीक्षण और निगरानी की व्यवस्था क्या कर रही है? और यदि भुगतान संबंधी प्रक्रियाएं दूसरे शहर से संचालित हो रही हैं, तो उनके अभिलेखों और प्रक्रिया की जांच क्यों नहीं की जानी चाहिए?

रामानुजगंज के जल संसाधन विभाग की मौजूदा स्थिति पर उठ रहे सवालों का जवाब केवल कागजी स्पष्टीकरण से नहीं मिलेगा। कार्यालय की उपस्थिति पंजिका, निरीक्षण अभिलेख, भुगतान संबंधी दस्तावेज और विभागीय कामकाज की जांच से ही वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। फिलहाल जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार अधिकारी स्थिति स्पष्ट करें और यह सुनिश्चित करें कि रामानुजगंज का सरकारी कार्यालय केवल नाम का मुख्यालय बनकर न रह जाए।