बिलासपुर..छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के जरिए सरकार प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण का संदेश दे रही है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai लगातार अधिकारियों की बैठक लेकर जनता से जुड़े मुद्दों पर सख्ती दिखा रहे हैं। लेकिन बिलासपुर जिले के परसदा स्थित मॉडर्न एंड मॉडल एकेडमिक पब्लिक स्कूल का मामला इस पूरे अभियान के बीच शिक्षा व्यवस्था पर ऐसा सवाल बनकर खड़ा हो गया है, जिसने जिला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में ला दिया है।

जिस स्कूल को बच्चों की सुरक्षा, मान्यता और फीस से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए थे, उसकी आधिकारिक वेबसाइट तक बंद पड़ी है। सीबीएसई के सारस पोर्टल में दर्ज वेबसाइट अब “डोमेन बिक्री” के संदेश के साथ दिखाई दे रही है। वेबसाइट पर स्कूल की जानकारी के बजाय असंबंधित विज्ञापन नजर आ रहे हैं। इसके बावजूद स्कूल में नए सत्र के लिए प्रवेश और फीस वसूली जारी है।

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सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बिना वैधानिक पारदर्शिता के यह संस्थान किसके संरक्षण में संचालित हो रहा है?

CBSE नियमों की धज्जियां, छिपाए जा रहे दस्तावेज

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सीबीएसई एफिलिएशन बायलॉज 2018 के नियम 14.2.4 के तहत हर संबद्ध स्कूल के लिए “अनिवार्य सार्वजनिक खुलासा” देना जरूरी है। इसमें एफिलिएशन लेटर, राज्य शासन की एनओसी, भवन सुरक्षा प्रमाणपत्र, अग्निशमन प्रमाणपत्र, जिला शिक्षा अधिकारी से मान्यता, फीस संरचना, शिक्षकों की सूची, छात्र संख्या, स्कूल प्रबंधन समिति और पीटीए सहित 12 महत्वपूर्ण दस्तावेज वेबसाइट पर उपलब्ध कराना अनिवार्य है।

लेकिन परसदा के मॉडर्न एंड मॉडल स्कूल में इनमें से कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं है। अभिभावकों का आरोप है कि फीस की लिखित जानकारी तक नहीं दी जाती। भवन सुरक्षा और अग्निशमन दस्तावेज मांगने पर भी प्रबंधन जवाब देने से बचता है।

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चार साल पहले मान्यता खत्म  बारहवीं तक संचालन

पुख्ता दस्तावेजों के अनुसार मॉडर्न एंड मोरल  स्कूल की प्रारंभिक मान्यता केवल नर्सरी से आठवीं तक थी। बाद में उसका नवीनीकरण नहीं हुआ। इसके बावजूद सीधे नौवीं से बारहवीं तक कक्षाएं शुरू कर दी गईं। आरोप है कि पिछले चार वर्षों से स्कूल की वैध मान्यता नहीं है, फिर भी करीब 400 बच्चों की पढ़ाई जारी है।

यानी जिन बच्चों का भविष्य संवारा जाना चाहिए था, उनके भविष्य को ही अनिश्चितता में धकेल दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मान्यता नहीं थी तो बच्चों का रिजल्ट किस आधार पर तैयार हुआ और जिला शिक्षा विभाग इतने वर्षों तक मौन क्यों बैठा रहा?

न प्रयोगशाला, न मैदान, न लाइब्रेरी…बेधड़क’ संचालन

स्थानीय अभिभावकों और सूत्रों का दावा है कि स्कूल में शासन की मूलभूत गाइडलाइन तक का पालन नहीं किया जा रहा। पर्याप्त प्रयोगशाला नहीं है, व्यवस्थित पुस्तकालय नहीं है और खेल मैदान तक मानक अनुरूप नहीं बताया जा रहा। इसके बावजूद स्कूल का संचालन ऐसे हो रहा है जैसे नियम केवल कागजों के लिए बने हों।

शिक्षा मामलों के जानकार अधिवक्ता शुभेंदु नस्कर का कहना है कि अनिवार्य दस्तावेज सार्वजनिक न करना सीधे तौर पर सीबीएसई नियमों का उल्लंघन है। बिना भवन सुरक्षा और अग्निशमन प्रमाणपत्र देखे बच्चों को स्कूल भेजना जोखिमपूर्ण स्थिति पैदा कर सकता है।

विभाग का संरक्षण, व्यवस्था नतमस्तक?

बिलासपुर जिला शिक्षा विभाग पिछले डेढ़-दो वर्षों से भ्रष्टाचार और संरक्षण के आरोपों को लेकर लगातार चर्चा में रहा है। कई मामलों में शिकायतें सामने आईं। खुद जिला प्रशासन और कलेक्टर स्तर से विभागीय कार्यप्रणाली पर सख्ती दिखाई गई। इसके बावजूद परसदा का यह मामला बताता है कि विभाग के भीतर संरक्षण का खेल अब भी जारी है।

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि स्कूल का मालिक जिले का बेहद रसूखदार व्यक्ति है और उसी प्रभाव के चलते कार्रवाई नहीं हो पा रही। यही वजह है कि जब जिले में अन्य निजी स्कूलों पर कार्रवाई अभियान चल रहे हैं, तब मॉडर्न एंड मॉडल स्कूल पर प्रशासनिक सन्नाटा दिखाई देता है।

यहां तक कि विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी ने ऑफ रिकॉर्ड यह तक कह दिया कि “ऐसे रसूखदार लोगों पर हाथ डालना आसान नहीं, असर ऊपर तक पड़ता है।” यदि यह सच है तो फिर शिक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा संकट नियमों का नहीं, बल्कि संरक्षण तंत्र का है।

डायरेक्टर प्रेम रंजन के व्यवहार पर उठे सवाल

स्कूल के डायरेक्टर प्रेम रंजन सिंह को लेकर भी गंभीर चर्चाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि उनका व्यवहार तानाशाही शैली का है और सवाल उठाने वालों को गंभीरता से सुनने के बजाय दबाव की स्थिति बनाई जाती है।

खुद प्रेम रंजन सिंह ने यह स्वीकार किया कि वे संबंधित रसूखदार स्कूल संचालक के भाई हैं। उन्होंने स्कूल को गलतफहमी का शिकार बताया, लेकिन दूसरी ओर यह भी सामने आ रहा है कि दो बार हुई जांच में स्कूल की मान्यता संबंधी स्थिति पर गंभीर आपत्तियां दर्ज हुई थीं।

अफसरों को शिकायत का इंतज़र

सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय भुवनेश्वर के एक अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि यदि वेबसाइट बंद होने, डोमेन बिक्री और अनिवार्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के प्रमाण के साथ शिकायत मिलती है तो तत्काल नोटिस जारी किया जाएगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबद्धता से संबंधित कार्रवाई भी संभव है।

नियमों के अनुसार वेबसाइट और अनिवार्य खुलासे का पालन नहीं करने पर आर्थिक दंड के साथ संबद्धता समाप्त करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

अब नजर मुख्यमंत्री की बिलासपुर बैठक पर

पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बिलासपुर में अधिकारियों की बैठक लेने वाले हैं। सुशासन तिहार के दौरान लगातार भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही पर कार्रवाई की बात हो रही है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुख्यमंत्री इस मामले में जिला शिक्षा विभाग से जवाब मांगेंगे?

क्या चार वर्षों से कथित अवैध संचालन की उच्च स्तरीय जांच होगी? क्या बच्चों की सुरक्षा और भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई होगी? क्या उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होगी जिनकी निगरानी में यह पूरा मामला वर्षों तक चलता रहा?

फिलहाल परसदा का मॉडर्न एंड मॉडल स्कूल बिलासपुर की शिक्षा व्यवस्था के उस कड़वे सच की तरह सामने है, जहां नियमों से ज्यादा ताकत रसूख, संरक्षण और खामोशी की दिखाई दे रही है। यही कारण है कि विभाग कि किसी अधिकारी की हिम्मत नहीं है कि मॉडर्न एंड मॉडल स्कूल में हाथ डालने का दुस्साहस करें