महंगाई पर हमला, जवाबों में लड़खड़ाए पूर्व मंत्री उमेश ! प्रेस वार्ता में घिरे सवालों से—सुबोध का सनसनीखेज दावा, मोबाइल लूट नहीं, साजिश है!
सुबोध हरितवाल का विस्फोटक आरोप—‘कौशिक का मोबाइल लूटा नहीं, लुटवाया गया!

बिलासपुर…देश की राजनीति में बयानबाज़ी और हकीकत के बीच का फर्क अक्सर प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही उजागर हो जाता है। बिलासपुर में हुई यह प्रेस वार्ता भी कुछ ऐसी ही रही, जहां आरोपों की धार तेज़ थी, लेकिन जवाबों की मजबूती कहीं कमजोर पड़ती दिखी। महंगाई, बेरोजगारी और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर हमला तो जोरदार रहा, मगर सवालों की बौछार में कई दावे डगमगाते नजर आए।
ऐसे माहौल में यह प्रेस कॉन्फ्रेंस केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि सवाल-जवाब, आरोप-प्रत्यारोप और बड़े खुलासों के दावों के बीच एक तीखी बहस का मंच बन गई—जहां से कई नए विवाद भी जन्म लेते दिखाई दिए।
तेज़ तेवर, जवाब कमजोर— सवालों का अखाड़ा:
बिलासपुर में जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता उस वक्त चर्चा का केंद्र बन गई, जब पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता उमेश पटेल ने महंगाई और केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला तो बोला, लेकिन पत्रकारों के महज दो सवालों में ही वे असहज और विचलित नजर आए। आरोपों की झड़ी के बीच ठोस और सटीक जवाब देने में वे बार-बार चूकते दिखे, जिससे पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस का रुख बदल गया।
एंट्री—महंगाई पर हमला, मोदी सरकार पर प्रहार:
प्रेस वार्ता में उमेश पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों को “लकवाग्रस्त” बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के चलते देश में महंगाई आसमान छू रही है और आम जनता का किचन बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता को पेट्रोल-डीजल, खाद्य तेल और यहां तक कि सोना खरीदने तक से बचने की सलाह दे रही है, जबकि खुद सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग विदेश यात्राओं में व्यस्त हैं।
आंकड़े और आरोप—लेकिन सवालों में फंसे:
उमेश पटेल ने दावा किया कि पेट्रोल-डीजल के दाम बेतहाशा बढ़े हैं, किसानों को उर्वरक की कमी झेलनी पड़ रही है और 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा भी अधूरा रह गया। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 7 वर्षों से उर्वरकों की कमी बनी हुई है और छत्तीसगढ़ में जरूरत के मुकाबले अब तक बेहद कम उर्वरक पहुंच पाया है।
हालांकि, जब पत्रकारों ने 2013 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा सोना कम खरीदने की अपील और वर्तमान में मोदी सरकार की सलाह के बीच फर्क पर सवाल उठाया, तो उमेश पटेल का जवाब स्पष्ट नहीं रहा और वे गोलमोल तरीके से बात घुमाते नजर आए। पत्रकारों ने इसे “डबल स्टैंडर्ड” करार देते हुए सीधा जवाब मांगा, लेकिन संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
देश की अर्थव्यवस्था चौपट”—तीखे राजनीतिक वार:
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के 12 साल देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित हुए हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतों, बढ़ती एक्साइज ड्यूटी, महंगी रेल यात्रा, टोल टैक्स और आवश्यक वस्तुओं पर GST को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि आज आम परिवारों को घर चलाने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है और सरकार जनता को राहत देने में पूरी तरह असफल रही है।
कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी:
इस दौरान बिलासपुर प्रभारी सुबोध हरिद्वार, शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धार्थ मिश्रा, ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री, पूर्व जिला अध्यक्ष विजय केसरवानी, पूर्व मेयर रामशरण यादव, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया, पूर्व विधायक शैलेश पांडे, राज्यसभा की पूर्व सदस्य, पूर्व सभापति नसरुद्दीन शेख और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
सुबोध का बयान—“मोबाइल लूट नहीं, लुटवाया गया!
प्रेस वार्ता का सबसे सनसनीखेज मोड़ तब आया जब बिलासपुर प्रभारी सुबोध हरितवाल ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक के साथ हुई मोबाइल लूट की घटना पर बड़ा आरोप लगा दिया।
उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य लूट नहीं है, बल्कि “मोबाइल लुटवाया गया है” ताकि उसमें छिपे कई अहम राज सामने न आ सकें। उनका दावा था कि उस मोबाइल में ऐसे तथ्य मौजूद थे, जो सामने आते तो भाजपा नेताओं की सच्चाई उजागर हो जाती। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की।
हमले तेज, लेकिन जवाब अधूरे:
कांग्रेस की इस प्रेस वार्ता में जहां एक ओर केंद्र सरकार के खिलाफ तीखे हमले देखने को मिले, वहीं दूसरी ओर पत्रकारों के सीधे सवालों पर स्पष्ट जवाब न मिलना चर्चा का विषय बन गया। सबसे ज्यादा सुर्खियां सुबोध हरितवाल के उस बयान ने बटोरीं, जिसमें उन्होंने एक साधारण दिख रही लूट की घटना को राजनीतिक साजिश करार देकर नई बहस छेड़ दी। अब यह मामला सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहेगा या जांच की दिशा पकड़ेगा—यह देखने वाली बात होगी।





