बिलासपुर/रायपुर/दुर्ग-भिलाई | विशेष रिपोर्ट..

बिलासपुर स्थित नारायणा टेक्नो स्कूल से जुड़ा विवाद अब एक बड़े शिक्षा घोटाले की आशंका में बदलता नजर आ रहा है। मान्यता, फीस वसूली और CBSE के नाम पर पढ़ाई जैसे आरोपों के बीच अब “एक शहर में पढ़ाई और दूसरे शहर में परीक्षा” का मामला सामने आने के बाद पूरे प्रकरण ने गंभीर रूप ले लिया है।

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने इस पूरे मामले को उच्च स्तर पर लेते हुए  सभी प्रमाण और शिकायतों की सॉफ्ट कॉपी  प्रदेश के प्रमुख सचिव तक भिजवा दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत कराते हुए संज्ञान मे लाया है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध हो।

ये खबर भी पढ़ें…
शिक्षकों की सेवा सुरक्षा का भरोसा, आंदोलन के बीच बगिया में CM साय के साथ संवाद, राखी बांधने वाली शिक्षिकाओं को मुख्यमंत्री का रिटर्न गिफ्ट
शिक्षकों की सेवा सुरक्षा का भरोसा, आंदोलन के बीच बगिया में CM साय के साथ संवाद, राखी बांधने वाली शिक्षिकाओं को मुख्यमंत्री का रिटर्न गिफ्ट
जशपुर/बगिया:(मनीष जायसवाल) छत्तीसगढ़ के शिक्षक आंदोलन में बुधवार का दिन संवाद के लिहाज से अहम रहा। दिन में स्कूल शिक्षा...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

मंत्री ने अपने निर्देश में साफ किया है कि नारायणा टेक्नो स्कूल की मान्यता की स्थिति की विस्तृत जांच हो। यदि स्कूल को वैध मान्यता प्राप्त नहीं है, तो आखिर किस आधार पर कक्षा 1 से 7 तक बच्चों को प्रवेश दिया गया और अभिभावकों को किस जानकारी के आधार पर भरोसे में लिया गया—यह जांच का प्रमुख बिंदु रहेगा।

इसके साथ ही CBSE के नाम पर पढ़ाई का मुद्दा भी गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। राज्य बोर्ड की जगह CBSE पैटर्न की किताबें क्यों चलाई जा रही हैं, और यदि पढ़ाई CBSE के अनुरूप हो रही है तो बच्चों को छत्तीसगढ़ बोर्ड की परीक्षा में बैठाने की तैयारी क्यों की जा रही है—इस पूरे शैक्षणिक ढांचे को मंत्री ने बच्चों के भविष्य के साथ संभावित खिलवाड़ बताया है।

ये खबर भी पढ़ें…
CG School Edcuation : स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कलेक्टरों को लिखा पत्र
CG School Edcuation : स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने कलेक्टरों को लिखा पत्र
CG School Edcuation/रायपुर। स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने प्रदेशभर के कलेक्टर्स को पत्र लिखकर सितंबर महीने में आयोजित...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू बहु-शहर संचालन और छात्र उपस्थिति को लेकर सामने आया है। जानकारी के अनुसार, नारायणा टेक्नो स्कूल रायपुर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर में संचालित हो रहा है, लेकिन छात्र संख्या कम होने के बावजूद एक ही छात्रों की उपस्थिति अलग-अलग स्थानों पर दर्ज किए जाने की आशंका है। आरोप यह भी है कि एक शहर में पढ़ाई दर्शाकर वही छात्र दूसरे शहर में परीक्षा देते नजर आ रहे हैं। रायपुर और बिलासपुर के बीच सामने आया यह पैटर्न फर्जी उपस्थिति और परीक्षा प्रणाली में गंभीर गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिया है कि यह स्पष्ट किया जाए कि वास्तविक छात्र संख्या कितनी है, उनकी उपस्थिति कहां दर्ज हो रही है और परीक्षा केंद्रों में उनका सत्यापन किस प्रक्रिया से किया जा रहा है। इस पूरे नेटवर्क को उन्होंने संगठित अनियमितता की आशंका के रूप में चिन्हित किया है।

ये खबर भी पढ़ें…
एलसीआईटी के आगे विभाग-प्रशासन घुटने पर? बड़े शिक्षण संस्थान पर विभागीय आदेश बेअसर, शिकायतों के बाद भी बेलगाम व्यवस्था!
एलसीआईटी के आगे विभाग-प्रशासन घुटने पर? बड़े शिक्षण संस्थान पर विभागीय आदेश बेअसर, शिकायतों के बाद भी बेलगाम व्यवस्था!
बिलासपुर/बोदरी...बोदरी स्थित लक्ष्मीचंद इंस्टीट्यूट हायर सेकेंडरी स्कूल (एलसीआईटी) को लेकर फिर शिकायत सामने आई है। इस बार शिकायत फीस और...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

फीस वसूली को लेकर भी मंत्री ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यह जांच का हिस्सा होना चाहिए कि स्कूल द्वारा ली जा रही फीस किस आधार पर तय की जा रही है, उसका उपयोग कहां किया जा रहा है और क्या इसमें अभिभावकों का आर्थिक शोषण हो रहा है। इसके साथ ही किताबों और अन्य सामग्री से जुड़े वेंडर नेटवर्क की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।

मंत्री ने अपने पत्र में यह भी साफ किया है कि जांच में जो भी अधिकारी, प्रबंधन या संबंधित व्यक्ति दोषी पाए जाते हैं, उनके खिलाफ तत्काल कड़ी से कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पूरे मामले में पारदर्शिता बनाए रखते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में भरोसा कायम रह सके।

नारायणा टेक्नो स्कूल का यह मामला अब केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, नियामक तंत्र और अभिभावकों के विश्वास से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। केंद्र के सीधे हस्तक्षेप के बाद अब यह देखना अहम होगा कि जांच कितनी गहराई तक जाती है और क्या इस कथित ‘डबल खेल’ का पूरा सच सामने आ पाता है।