Kalash After Ganesh Visarjan: गणेश उत्सव भगवान गणपति को समर्पित प्रमुख हिंदू त्योहारों में से एक है. इस दौरान भक्त पूरे श्रद्धा भाव से गणपति बप्पा की स्थापना करते हैं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं. घरों और पंडालों में गणेश जी को विराजमान कर भक्त सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं. पूजा के दौरान कलश स्थापना का भी विशेष महत्व माना जाता है. इस बार गणेश उत्सव 14 सितंबर से शुरू हुआ, जो कि 25 सितंबर को समाप्त होगा.

Kalash After Ganesh Visarjan/गणपति उत्सव के समापन पर भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं. गणपति विसर्जन के बाद पूजा में इस्तेमाल की गई सामग्री को लेकर कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि कलश, उसका पवित्र जल, नारियल और अन्य सामग्री का क्या करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश की सामग्री का इस्तेमाल और उसका निस्तारण श्रद्धा के साथ करना चाहिए.

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गणपति विसर्जन के बाद कलश के पवित्र जल को आम के पत्तों की मदद से पूरे घर में छिड़कना चाहिए और बचे हुए जल को किसी गमले या पौधे में डाल देना चाहिए. धार्मिक मान्यता है कि कलश के जल को घर में छिड़कने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि आती है. हालांकि, इस जल को तुलसी के पौधे में नहीं डालना चाहिए.

Kalash After Ganesh Visarjan/कलश के अंदर रखे सिक्के, सुपारी और हल्दी की गांठ को अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चीजों को धन रखने के स्थान पर रखने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.

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कलश के नीचे या ऊपर रखे चावलों को थोड़े से अपने घर के अनाज में मिला लें या पक्षियों (चिड़ियों) को डाल दें. अक्षत को पूजा में पवित्र माना जाता है, इसलिए इन्हें श्रद्धा के साथ इस्तेमाल करने या पक्षियों को खिलाने की परंपरा बताई जाती है.

कलश पर रखे नारियल को परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांट दें. पूजा में इस्तेमाल किए गए नारियल को प्रसाद मानकर परिवार के लोगों में बांटना शुभ माना जाता है.

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कलश में इस्तेमाल किए गए आम के पत्तों और दूर्वा (घास) को किसी पवित्र पौधे की मिट्टी में या विसर्जन स्थल पर रख दें. पूजा सामग्री को सम्मानपूर्वक रखने की परंपरा का पालन करना चाहिए.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. cgwall इसकी पुष्टि नहीं करता है.