IND vs ENG-भारत और इंग्लैंड के बीच जारी रोमांचक वनडे सीरीज अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सीरीज 1-1 की बराबरी पर है और अब सबकी निगाहें 19 जुलाई को क्रिकेट के ‘मक्का’ कहे जाने वाले लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर टिकी हैं।

यह मुकाबला न केवल सीरीज का फैसला करेगा, बल्कि टीम इंडिया के पास पिछले 22 सालों से लॉर्ड्स में चले आ रहे हार के सिलसिले को तोड़ने का एक सुनहरा मौका भी होगा। कार्डिफ में मिली हार के बाद भारतीय टीम दबाव में तो है, लेकिन इतिहास गवाह है कि लॉर्ड्स का मैदान भारत के लिए जितनी चुनौतियां लेकर आता है, उससे कहीं ज्यादा गौरवशाली यादें भी इसके दामन में सिमटी हुई हैं।

लॉर्ड्स का यह मैदान भारतीय क्रिकेट इतिहास के दो सबसे बड़े स्वर्णिम पलों का गवाह रहा है। इसी मैदान पर 1983 में कपिल देव की ‘कपिल्स डेविल्स’ ने वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार वर्ल्ड कप की ट्रॉफी चूमी थी।

इसके बाद साल 2002 में नेटवेस्ट सीरीज के फाइनल में सौरव गांगुली की कप्तानी में भारत ने 325 रनों का विशाल लक्ष्य हासिल कर असंभव जीत दर्ज की थी, जिसके बाद गांगुली का लॉर्ड्स की बालकनी में टी-शर्ट उतारकर जश्न मनाना आज भी हर भारतीय फैन के रोंगटे खड़े कर देता है। लेकिन इन मीठी यादों के बीच एक कड़वा सच यह भी है कि साल 2004 के बाद से टीम इंडिया यहां एक भी वनडे मैच जीतने में नाकाम रही है।

आंकड़ों की बात करें तो लॉर्ड्स में भारत ने अब तक कुल 9 वनडे मैच खेले हैं, जिनमें से 4 में जीत और 4 में हार मिली है, जबकि एक मैच टाई रहा है। भारत को यहां अपनी आखिरी वनडे जीत 2004 में मिली थी। उसके बाद से बीते 22 सालों में टीम इंडिया ने यहां 3 मैच गंवाए हैं। साल 2011 में एक मुकाबला टाई रहा था, जो डकवर्थ-लुईस नियम की वजह से बराबरी पर खत्म हुआ।

वहीं, साल 2022 में खेले गए पिछले मुकाबले में इंग्लैंड ने भारत को 100 रनों के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी थी। ऐसे में मौजूदा कप्तान शुभमन गिल और उनकी युवा ब्रिगेड के कंधों पर इस ’22 साल के सूखे’ को खत्म करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

रविवार को होने वाला यह खिताबी मुकाबला भारतीय टीम के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है क्योंकि लॉर्ड्स की पिच और वहां की परिस्थितियां अक्सर मेजबान टीम को फायदा पहुंचाती हैं। टीम इंडिया की सबसे बड़ी परेशानी उसकी बल्लेबाजी रही है, जो पिछले मैच में पूरी तरह बिखर गई थी। अब निर्णायक मैच में विराट कोहली, रोहित शर्मा और कप्तान गिल को न केवल लॉर्ड्स के खराब रिकॉर्ड को पीछे छोड़ना होगा, बल्कि एक ऐसी पारी खेलनी होगी जो भारत को सीरीज जिता सके।

क्या टीम इंडिया 22 साल बाद लॉर्ड्स में जीत का तिरंगा फहरा पाएगी या इंग्लैंड अपने घर में फिर बाजी मार ले जाएगा, इसका फैसला 19 जुलाई को होगा। फैंस को उम्मीद है कि शुभमन गिल की कप्तानी में एक बार फिर लॉर्ड्स की बालकनी में जीत का वैसा ही जश्न देखने को मिलेगा जैसा 2002 में दिखा था।