Chhattisgarh highcourt ने प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि भर्ती विज्ञापन में चयन सूची जारी होने के एक साल के भीतर पद खाली होने पर प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति देने का प्रावधान है, तो नियोक्ता इससे पीछे नहीं हट सकता।

ऐसी स्थिति में प्रतीक्षा सूची में पहले स्थान पर रहे अभ्यर्थी को नियुक्ति के लिए विचार से वंचित करना मनमाना होगा।

यह टिप्पणी करते हुए highcourt की डिवीजन बेंच ने राजनांदगांव के जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अपील खारिज कर दी।

चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की पीठ ने एसटी वर्ग के सहायक ग्रेड-तीन पद पर प्रतीक्षा सूची में पहले स्थान पर रहे चंद्रशेखर कंवर को नियुक्ति देने के सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा है। Highcourt ने 7 अगस्त 2025 को जारी अंतरिम आदेश भी रद्द कर दिया।

मामले के अनुसार, राजनांदगांव जिला न्यायालय ने 28 जून 2023 को विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें assistant grade 3 के नौ पद शामिल थे, जिनमें से दो पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थे।

Raipur निवासी चंद्रशेखर कंवर ने एसटी वर्ग से आवेदन किया था। कौशल परीक्षा में उन्होंने पहला स्थान हासिल किया और अंतिम चयन सूची में एसटी वर्ग की प्रतीक्षा सूची में भी उनका नाम पहले क्रम पर था।

इस भर्ती में चयनित एक अभ्यर्थी ने चयन सूची जारी होने के एक साल के भीतर पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद रिक्त हुए पद पर नियुक्ति के लिए चंद्रशेखर कंवर ने दावा पेश किया। हालांकि, जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने उनकी मांग यह कहते हुए खारिज कर दी कि रिक्त पद को नई भर्ती के माध्यम से भरा जाएगा। इसके बाद चंद्रशेखर कंवर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

मामले की सुनवाई करते हुए highcourt की सिंगल बेंच ने 25 जून 2025 को याचिका स्वीकार कर छह सप्ताह के भीतर नियुक्ति देने का निर्देश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए जिला न्यायाधीश की ओर से डिवीजन बेंच में अपील दायर की गई।

अपील में तर्क दिया गया कि चयनित अभ्यर्थी के पदभार ग्रहण करने के बाद इस्तीफा देने से प्रतीक्षा सूची में शामिल उम्मीदवार को नियुक्ति का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता। रिक्त पद को नई भर्ती के जरिए भरा जाना चाहिए।

डिवीजन बेंच ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट शर्त थी कि चयन सूची जारी होने के एक साल के भीतर किसी चयनित अभ्यर्थी के इस्तीफा देने, पद से हटाए जाने, मृत्यु होने या किसी अन्य कारण से पद रिक्त होने पर प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति की जा सकती है। यह प्रावधान स्वयं नियोक्ता ने भर्ती विज्ञापन में रखा था, इसलिए बाद में उससे पीछे नहीं हट सकता।

कोर्ट ने माना कि जब प्रतीक्षा सूची में अभ्यर्थी पहले स्थान पर है और विज्ञापन की शर्तों के अनुसार पद रिक्त हुआ है, तो उसे नियुक्ति के लिए विचार से बाहर करना उचित नहीं होगा। डिवीजन बेंच को सिंगल बेंच के आदेश में कोई त्रुटि नहीं मिली। इसके साथ ही जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अपील खारिज कर दी गई और चंद्रशेखर कंवर को नियुक्ति देने संबंधी सिंगल बेंच का आदेश बरकरार रखा गया।