रतनपुर….रतनपुर नगर पालिका परिषद में भ्रष्टाचार का ऐसा जाल बुना गया है, जिसमें न केवल विकास कार्य फंस रहे हैं, बल्कि शासन-प्रशासन की नाकामी भी खुलकर सामने आ रही है। कुर्मी समाज भवन निर्माण कार्य का मामला प्रदेश में अपने आप में विकास बनाम भ्रष्टाचार की लड़ाई का शायद इकलौता ऐसा उदाहरण बन गया है, जो शासन, प्रशासन, विभाग और अधिकारियों की संवेदनहीनता और स्वार्थ का जीवंत सबूत है।

हमने पिछले कुछ महीनों में रतनपुर नगर पालिका की भ्रष्ट गतिविधियों पर कई रिपोर्टें प्रकाशित की हैं — कभी सफाई ठेके में अनियमितता, तो कभी फर्जी बिलिंग और फाइलों में धांधली। लेकिन इस बार मामला और भी चौंकाने वाला है, क्योंकि यहां एक वैध, स्वीकृत और सरकारी बजट से शुरू हुआ निर्माण कार्य, ‘कमीशन न देने’ की सज़ा भुगतते हुए तीन साल से अधूरा पड़ा है।

50 लाख की लागत से शुरू भवन, आज भी अधूरा

रतनपुर मेला ग्राउंड स्थित कुर्मी समाज भवन निर्माण कार्य पूर्ववर्ती भूपेश सरकार में 50 लाख की लागत से स्वीकृत हुआ था। कार्य NIT/814 के तहत 14 जनवरी 2022 को ठेकेदार को 10.3 प्रतिशत  कम दर पर ई-टेंडर में आवंटित किया गया। मुख्यमंत्री और कलेक्टर के निर्देश पर ‘नो कमीशन एग्रीमेंट’ के तहत ठेकेदार ने निर्माण कार्य शुरू हुआ ।

परंतु जैसे ही निर्माण कार्य आगे बढ़ा, नगर पालिका अधिकारियों को इसमें कमीशन का ‘मुनाफा’ नजर नहीं आया। इसके बाद शुरू हुआ इस भवन को अधर में लटकाने का षड्यंत्र — कभी डिज़ाइन में देरी, कभी फाइल रोकना, कभी पेचीदा जवाबदारी का जाल।

1 साल तक लटकाया— 3 दिन में काम शुरू

सूत्रों के अनुसार ठेकेदार ने 6 जनवरी 2024 को लेंटर का स्ट्रक्चरल डिज़ाइन मांगा। नगर पालिका परिषद ने पूरे एक साल तक कोई जवाब नहीं दिया। लीगल नोटिस देने पर भी प्रशासन ने चुप्पी साधे रखी। चौंकाने वाली बात तब हुई जब 3 जनवरी 2025 को रायपुर से बनवाया गया पूरा नया भवन डिज़ाइन भेज दिया गया — और ठेकेदार को 3 दिन में काम शुरू करने का फरमान सुनाया गया।

जिस भवन का लेंटर लेवल तक निर्माण हो चुका था। उसके लिए बिना किसी औचित्य के नया स्ट्रक्चरल डिज़ाइन थमाना न केवल तकनीकी दृष्टि से बेतुका है बल्कि यह साफ इशारा करता है कि किसी सुनियोजित चाल के तहत कार्य को लटकाने का प्रयास हो रहा है।

कमीशन के नाम ठेकेदार को सजा—ब्लैकमेल का खेल

शुरुआत में सीएमओ ने मौखिक रूप से कहा था कि इस कार्य में कोई अधिकारी कमीशन नहीं मांगेगा। ठेकेदार ने इसी भरोसे पर कार्य शुरू किया। लेकिन भुगतान से पहले अधिकारियों के बदलते ही पूरा माहौल पलट गया। ठेकेदार से 15 परतिशत कमीशन की मांग की गई, और इंकार करने पर हर मोर्चे पर रुकावटें डाली जाने लगीं।

कभी फाइल दबाई गई, कभी नया डिज़ाइन लटकाया गया, तो कभी लीगल नोटिसों को नजरअंदाज कर समय टालने की रणनीति अपनाई गई। विभाग और अधिकारी समय बीतने का इंतजार करते रहे ताकि न काम हो, न भुगतान — और अंत में ठेकेदार को ‘ब्लैकलिस्ट’ करने की राह साफ हो सके।

सवालों के घेरे में नगर पालिका परिषद

 मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत कार्य को ठेकेदार के बार-बार निवेदन और लीगल नोटिस के बावजूद क्यों अधूरा छोड़ा गया? जो भवन लेंटर लेवल तक तैयार था, उसके लिए बिना कारण नया डिज़ाइन क्यों बनाया गया? चार साल पुरानी दरों पर नए डिज़ाइन का कार्य करवाने की मंशा के पीछे आखिर कौन सा ‘खेल’ छिपा है? क्या यह पूरा मामला ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने और कमीशन वसूलने की साजिश का हिस्सा है?

विकास को ‘कमीशन कल्चर’ ने बनाया बंधक

रतनपुर नगर पालिका परिषद इदं विधियों से साफ जाहिर हो रहा है कि प्रदेश में विकास कार्य किस तरह भ्रष्टाचार और स्वार्थ की दलदल में धंसते जा रहे हैं। कुर्मी समाज भवन निर्माण कार्य भ्रष्टाचार की वही परतें खोलता है, जिन्हें नगर पालिका परिषद वर्षों से छिपाने में लगी रही है।

एक भवन जो समाज के लिए उपयोगी होना था, आज राजनीतिक रस्साकशी, कमीशनबाज़ी और अफसरशाही की लापरवाही का शिकार होकर जर्जर हालात में पड़ा है — और जनता केवल तमाशा देख रही है।