दुर्ग। प्रदेश में शिक्षकों के बैक डोर से हो रहे स्थानांतरण की चर्चाओं के बीच नवीन शिक्षक संघ ने सरकार से पारदर्शी एवं खुली स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास राजपूत ने कहा कि जब स्थानांतरण का मुख्य द्वार बंद हो और खिड़की से तबादले होते रहें, तब समान अवसर की भावना कमजोर पड़ जाती है। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है। इसलिए शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया भी समान, पारदर्शी और सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए। यदि कुछ लोगों को बैक डोर से स्थानांतरण का लाभ मिले और अधिकांश शिक्षक प्रक्रिया से ही अनभिज्ञ रहें, तो यह अवसर की समानता की भावना के विपरीत है।

नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश पदाधिकारी राजेश शुक्ला ने बताया कि पिछले ढाई वर्षो में बैक डोर से हुए स्थानांतरणों ने शिक्षक समाज के बीच असंतोष उपजा है। अधिकांश शिक्षकों को यह तक जानकारी नहीं है कि स्थानांतरण के लिए आवेदन किसे और कैसे करना है, इसके बावजूद लगातार तबादले होने की खबरें सामने आ रही हैं। इससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि युक्तियुक्तकरण के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक अपने निवास स्थान से दूर पदस्थ हो गए हैं। ऐसे में सभी शिक्षकों के लिए खुली स्थानांतरण नीति लागू की जाए तथा आपसी स्वैच्छिक स्थानांतरण की स्पष्ट और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए। गंभीर रूप से बीमार शिक्षकों एवं विशेष परिस्थितियों में कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग से विशेष स्थानांतरण प्रावधान भी किया जाना चाहिए।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास राजपूत ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की पालक होती है। इसलिए उसकी नीतियों में समानता, पारदर्शिता और न्याय का भाव स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। यदि स्थानांतरण का लाभ देना है तो वह सभी पात्र शिक्षकों को समान अवसर के साथ मिले, न कि बैक डोर व्यवस्था के माध्यम से।

संगठन की ओर चेतावनी दी कि यदि बैक डोर स्थानांतरण की प्रथा पर रोक नहीं लगाई गई और शीघ्र ही पारदर्शी एवं खुली स्थानांतरण नीति लागू नहीं की गई, तो नवीन शिक्षाकर्मी संघ लोकतांत्रिक तरीके से नवाचारी आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।