पूर्व सीएम के तांत्रिक .के. के. श्रीवास्तव पर 8 करोड़ की धोखाधड़ी…मृत साथी को ठगा..सिविल लाइन थाना में FIR दर्ज”

बिलासपुर.. छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़े चर्चित नाम और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कथित करीबी के.के. श्रीवास्तव पर धोखाधड़ी का गंभीर मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि श्रीवास्तव ने अपने मृत बिजनेस पार्टनर के परिवार को वादा करने के बावजूद 8 करोड़ रुपए की हिस्सेदारी नहीं दी, और साथ ही बंधक ज़मीन के एवज में 1 करोड़ रुपए की देनदारी भी नहीं चुकाई।
मामले में सिविल लाइन थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पूरा मामला क्या है ?
शिकायतकर्ता रत्ना यादव, जो स्व. राजेश यादव की पत्नी हैं, ने आरोप लगाया है कि उनके पति और के.के. श्रीवास्तव ने मिलकर नर्मदा नगर के पास अमलताश कॉलोनी नामक प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। दोनों ने मिलकर बराबर पूंजी निवेश किया और कॉलोनी के निर्माण व प्लॉट बिक्री का कार्य किया।
13 दिसंबर 2015 को राजेश यादव का निधन हो गया। इसके बाद के.के. श्रीवास्तव ने समाज के प्रतिष्ठित लोगों की उपस्थिति में रत्ना यादव से यह वादा किया था कि वह उनके पति द्वारा लगाए गए धन के अनुसार मुनाफे का हिस्सा उनके परिजनों को देंगे। इस बैठक का ऑडियो रिकॉर्ड भी मौजूद है, जो पुलिस को सौंपा गया है।
जमीन बेचकर कमाया, हिस्सा नहीं दिया
2020-21 में कॉलोनी की जमीन बेचकर श्रीवास्तव ने करीब 8 करोड़ रुपये कमाए, लेकिन रत्ना यादव और उनके परिजनों को एक रुपया भी नहीं दिया गया।इसके अलावा, कॉलोनी की बंधक जमीन के बदले 1 करोड़ रुपये का भुगतान भी नहीं किया गया, जो रत्ना यादव के परिवार को मिलना था।जब परिवार ने कई बार रकम मांगी, तो श्रीवास्तव ने कभी आधी ज़मीन देने की बात कही, लेकिन फिर कोई वादा पूरा नहीं किया।
वीडियो और दस्तावेज़ सबूत के रूप में पेश
रत्ना यादव ने बताया कि 13 दिसंबर 2016 को के.के. श्रीवास्तव का एक कर्मचारी प्रशांत धिरी उनके निवास पर आया और कॉलोनी से संबंधित सभी दस्तावेज़ एकत्र किए।
इसके बाद श्रीवास्तव का वाहन चालक सभी दस्तावेज़ लेकर चला गया।
इस पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई, जिसे पुलिस को पुख्ता साक्ष्य के तौर पर सौंपा गया है।
एफआईआर दर्ज, पुलिस जांच में जुटी
सिविल लाइन थाना पुलिस ने के.के. श्रीवास्तव के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर लिया है।
पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
क्या बोले पीड़ित के परिजन ?
रत्ना यादव ने कहा,
“हमने श्रीवास्तव पर भरोसा किया था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से वादा किया, पर न लाभ दिया, न ज़मीन, न पैसा। अब कानून से उम्मीद है कि हमें न्याय मिलेगा।”
सत्ता और व्यवसाय का गठजोड़
इस पूरे मामले ने सत्ता और व्यवसाय के गठजोड़ की परतों को एक बार फिर उजागर किया है। जहां एक तरफ केके श्रीवास्तव की ईडी जांच में पहले से ही भूमिका संदिग्ध है, वहीं अब आम लोगों और मृत साथियों के परिजनों से धोखाधड़ी के आरोप ने उन्हें कटघरे में खड़ा कर दिया है।





