Exemption from TET/दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया आदेश के बाद उत्तर प्रदेश समेत देश भर के लाखों शिक्षकों की नौकरी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं, जिसके समाधान के लिए अब राजनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं।

उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की मांग पर बहराइच के सांसद डॉ. आनंद कुमार गोंड ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता से मुक्त रखने की पुरजोर मांग की है।

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सांसद ने सरकार से आग्रह किया है कि पुराने शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए संसद में कानून बनाकर या अन्य विधिक उपायों के जरिए रास्ता निकाला जाए।

मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए सांसद ने पत्र में बताया है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 1 सितंबर 2025 को दिए गए अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों को टेट (TET) की परीक्षा पास करनी अनिवार्य होगी। अदालत के आदेशानुसार, यदि शिक्षक यह परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें दो वर्ष के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया जाएगा। इस फैसले के बाद से ही शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है।

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शिक्षक संघ का तर्क है कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 27 जुलाई 2011 को लागू किया गया था, इसलिए इससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर बाद में बने नियम थोपना न्यायसंगत नहीं है और उन्हें इस परीक्षा से छूट मिलनी चाहिए।

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सांसद डॉ. गोंड ने शिक्षा मंत्री को अवगत कराया कि इस फैसले का असर व्यापक होगा। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश भर में लगभग 40 लाख शिक्षक इससे प्रभावित होंगे, जबकि अकेले उत्तर प्रदेश में 4 लाख से अधिक परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

इतने बड़े पैमाने पर शिक्षकों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए सांसद ने मानवीय और विधिक आधार पर उपाय निकालने की अपील की है। उन्होंने सुझाव दिया है कि जिस राज्य में जब से आरटीई लागू हुआ, उससे पहले के शिक्षकों को राहत दी जाए।

इस मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विद्याविलास पाठक के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सांसद से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई थी, जिसके बाद सांसद ने यह कदम उठाया है।

संघ का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन पुराने शिक्षकों के लिए यह नियम अव्यावहारिक है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार और जूनियर शिक्षक संघ ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए प्रतिवेदन दिया है।

फिलहाल, सांसद द्वारा केंद्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाए जाने का शिक्षक संघ ने स्वागत किया है और उन्हें उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस पर कोई सकारात्मक निर्णय लेगी।