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Bilaspur

नोटों का बैग रखकर ‘फीस मॉडल’ पर वार! नारायण टेक्नोक्रेट स्कूल के खिलाफ NSUI का सीधा एक्शन—अनियमितताओं पर 12 सवालों की चार्जशीट

पढ़ाई एक, परीक्षा दूसरी! छात्रों के भविष्य से खेल का आरोप

बिलासपुर…नारायण टेक्नोक्रेट स्कूल एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। इस बार विरोध सिर्फ नारे या ज्ञापन तक सीमित नहीं रहा—एनएसयूआई ने प्रतीकात्मक तरीके से नोटों के बंडल से भरा बैग स्कूल के सामने रखकर सीधे उस सिस्टम को कटघरे में खड़ा किया, जिस पर अभिभावकों की गाढ़ी कमाई से खेल करने का आरोप है। यह विरोध एक संदेश था—शिक्षा के नाम पर चल रहे ‘मॉडल’ को अब खुलकर चुनौती दी जा रही है।

नेहरू नगर स्थित स्कूल परिसर के बाहर हुए इस प्रदर्शन में एनएसयूआई नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने पूरे सत्र के दौरान छात्रों और अभिभावकों को गुमराह किया। सीबीएसई पैटर्न के नाम पर मोटी फीस ली गई, महंगी किताबें और सामग्री खरीदवाई गई, लेकिन हकीकत यह रही कि पूरे सत्र में सीबीएसई लागू ही नहीं था। सत्र के अंत में छात्रों को सीजी बोर्ड की परीक्षा देने के लिए खड़ा कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम को संगठन ने सीधे तौर पर “भविष्य के साथ खिलवाड़” बताया।

एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव अर्पित केशरवानी ने मौके पर कहा कि यह मामला सिर्फ फीस या किताबों का नहीं है, बल्कि विश्वास का है। अभिभावकों को जिस आधार पर प्रवेश दिलाया गया, वही आधार सत्र के अंत तक बदल दिया गया। यह पारदर्शिता नहीं, बल्कि योजनाबद्ध भ्रम की स्थिति बनाता है। संगठन ने मांग रखी कि सीबीएसई के नाम पर ली गई अतिरिक्त फीस तत्काल वापस की जाए और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

प्रदर्शन के दौरान केवल आरोप नहीं लगे, बल्कि एक विस्तृत प्रश्नावली भी सार्वजनिक की गई, जिसमें स्कूल प्रबंधन से 12 बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब मांगा गया है। इन सवालों में सबसे गंभीर मुद्दा मान्यता और संबद्धता की समय-रेखा को लेकर है—जब प्रवेश प्रक्रिया पहले शुरू हुई, मान्यता बाद में मिली और सीबीएसई संबद्धता उससे भी बाद में प्रभावी हुई, तो शुरुआती सत्र में किस आधार पर सीबीएसई पैटर्न लागू बताकर फीस ली गई?

वित्तीय पारदर्शिता को लेकर भी बड़े सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि फीस का स्थानीय स्तर पर कोई स्पष्ट लेखा-जोखा नहीं है और राशि दूसरे राज्य में स्थानांतरित की जा रही है। ऐसे में यदि भविष्य में कोई विवाद या संस्थान बंद होने जैसी स्थिति आती है, तो अभिभावकों के पास न्याय पाने का रास्ता क्या होगा—यह प्रश्न अब खुलकर सामने है।

स्कूल की आंतरिक व्यवस्था भी जांच के दायरे में लाई गई है। शुल्क रसीदों पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्तियों की वैधता, यूनिफॉर्म और किताबों की अनिवार्य खरीद में एकाधिकार, फीस निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, और कर्मचारियों के साथ कथित शोषण जैसे मुद्दों को भी सवालों के केंद्र में रखा गया है। यहां तक कि कर्मचारियों के मूल प्रमाणपत्र रखने और आउटसोर्स स्टाफ की सुरक्षा जांच को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं।

इस विरोध में युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव भावेंद्र गंगोत्री, शोहराब खान, रंजेश क्षत्रिय, गौरव परिहार, रिहान रात्रे सहित कई पदाधिकारी और छात्र नेता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह लड़ाई किसी एक संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है जो शिक्षा को व्यवसाय में बदल रही है।

पूरा मामला अब सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं रहा। जिस तरह से तथ्य, समय-रेखा और वित्तीय सवालों को सामने लाया गया है, उसने प्रशासन के लिए भी चुनौती खड़ी कर दी है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि जिम्मेदार विभाग इस पूरे प्रकरण की जांच कर ठोस कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी आरोप-प्रत्यारोप के बीच दबकर रह जाएगा।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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